एमडीयू में चल रही विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रिया के बीच पहले हुई भर्ती प्रक्रिया के बारे में एक बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे का दावा किया जा रहा है। मामला थोड़ा पुराना है, लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी से यूनिवर्सिटी की भर्ती प्रक्रिया सवालों में घेरे में है। यूनिवर्सिटी में दो साल पहले हुई जूनियर डाटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती रद्द की दी थी। यह भर्ती अब दोबारा करवाई जा रही है। सवाल यह है कि उस समय जब भर्ती ही रद्द हो गई तो यूनिवर्सिटी के पास 24 अभ्यर्थियों की सूची कहां से आई? जबकि भर्ती के लिए न कोई विज्ञापन दिया गया और न ही कोई लिखित आदेश। अब आरटीआई में मिली जानकारी को छात्र संगठनों ने वायरल कर दिया है। इसके बाद से पहले और अब की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दरअसल, जून 2015 में अवकाश के दिन यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर सेंटर में डाटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती कराई जा रही थी। गुपचुप तरीके से हो रही इस भर्ती का पता चलते ही इनसो छात्र संगठन ने हंगामा कर दिया और भर्ती को लेकर दस्तावेज मांगे। यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि यह भर्ती टीएफएस कंपनी के माध्यम से कराई जा रही है। वही, टीएफएस के अधिकारियों का कहना था कि भर्ती में यूनिवर्सिटी के कर्मचारी ही लगे थे। मामला राज्यपाल तक पहुंचने के बाद भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक ने इस भर्ती के संबंध में कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। उस समय यूनिवर्सिटी ने जो जानकारी दी थी उसे सार्वजनिक नहीं किया। दो साल पहले हुई वही भर्ती अब कराई जा रही है। इस पर भी काफी सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल की ओर से उपलब्ध कराई गई इस आरटीआई को अब वायरल कर दिया गया है। आरटीआई में जो जानकारी यूनिवर्सिटी की तरफ से दी गई है उससे खुद यूनिवर्सिटी की साख पर सवाल उठ रहे हैं।
...तो क्या मौखिक तौर पर ही होती है एमडीयू में भर्ती
यूनिवर्सिटी ने जवाब दिया है कि डीडीई और आईएचटीएम समेत अन्य विभागों में 34 कर्मचारियों की जरूरत थी। इस भर्ती के लिए जिस कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी उसे लिखित आदेश की बजाय मौखिक तौर पर बोल दिया गया था। बड़ा सवाल तो यही है कि किसी भी सरकारी संस्थान में बिना किसी लिखित आदेश के कैसे भर्ती हो सकती है? इसके अलावा कंप्यूटर सेंटर में जो टेस्ट लिया जा रहा था उसमें खुद यूनिवर्सिटी के कर्मचारी ड्यूटी पर थे। इस पर यूनिवर्सिटी का जवाब है कि उन्होंने वहां पर भी लिखित नहीं, बल्कि मौखिक तौर पर ही कर्मचारियों को ड्यूटी के लिए बोल दिया था। अब सवाल यह है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में कोई भी कर्मचारी बिना लिखित आदेश के कैसे ड्यूटी दे सकता है?
सवाल : आखिर कहां से आई 24 अभ्यर्थियों की सूची
आरटीआई के साथ ही यूनिवर्सिटी की तरफ से दो पेज की एक सूची भी मुहैया कराई गई है। 24 अभ्यर्थियों की इस सूची में उनके नाम, पिता का नाम, फोन नंबर, जन्मतिथि और उनकी क्वालीफिकेशन आदि लिखी है। सवाल यह है कि उस समय भर्ती प्रक्रिया के लिए कोई आवेदन ही नहीं मांगे गए और भर्ती प्रक्रिया पहले पायदान पर ही रद्द कर दी गई। इसके बाद आखिर यह सूची यूनिवर्सिटी के पास कहां से आई?
फिलहाल की भर्तियां भी विवादों में
यूनिवर्सिटी में फिलहाल जूनियर डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनो और असिस्टेंट प्रोफेसर समेत कई पदों के लिए भर्ती चल रही है। इन भर्ती को लेकर भी आरोप लग रहे हैं। भर्तियों में बड़े फर्जीवाड़े की आशंका जताते हुए यूनिवर्सिटी के ही कुछ लोगों ने सीएम से लेकर राज्यपाल तक को शिकायत की है।
अब फिर भर्ती में फर्जीवाड़े की तैयारी
यूनिवर्सिटी में भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार फर्जीवाड़े किए जा रहे हैं। यह आरटीआई इसका बड़ा उदाहरण है। फिलहाल में चल रही भर्तियों का मामला भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। इन भर्ती में भी फर्जीवाड़ा करने की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा हुआ तो इनसो छात्र संगठन इसका खुलकर विरोध करेगा।
- प्रदीप देशवाल, प्रदेशाध्यक्ष इनसो।
मेरे कार्यकाल से पहले यूनिवर्सिटी में भर्ती के दौरान जो भी हुआ उसकी जानकारी मुझे नहीं है। जो भी भर्ती की जाएगी उसमें पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाएगी। किसी अभ्यर्थी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।
प्रो. बीके पूनिया, वीसी, एमडीयू