रोहतक। पीजीआईएमएस का लाखों रुपये का गार्ड घोटाला अभी सुलझा भी नहीं है कि एक बार फिर संस्थान की खामी उजागर हो रही है। वर्तमान समय में काम कर रही निजी कंपनी का कांट्रेक्ट छह मार्च को समाप्त हो गया है और प्रशासन ने सात मार्च को टेंडर अपलोड किया है। अधिकारी समय पर आंखें बंद कर बैठे रहे और जब प्रदेश में आचार संहिता लगने का मुद्दा उठा तो आनन-फानन में आनलाइन टेंडर जारी कर दिया गया।
संस्थान के अधिकारियों व निजी कंपनी की ओर से मिल कर किया गया लाखों रुपये का घोटाला अभी विचाराधीन ही है। इस मामले की जांच करने के लिए जैसे ही एक टीम अंतिम छोर तक पहुंचती है, एक नई एसआईटी गठित कर दी जाती है। फिलहाल इस मामले में चौथी एसआईटी जांच कर रही है, इसके मुखिया स्वयं पुलिस कप्तान हैं। सूत्रों की मानें तो प्रशासन को दिसंबर माह में पत्र भेजा गया था कि मार्च में निजी कंपनी का टेंडर समाप्त हो रहा है। इसलिए समय रहते इसका टेंडर जारी कर दिया जाए। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी व विभाग इस फाइल पर कुंडली मार कर बैठे रहे और नतीजा अब सामने हैं। मजबूरी में निजी कंपनी को अब प्रशासन ने दो माह का समय और बढ़ा कर दे दिया है। हैरानी तो इस बात की है कि संस्थान के अधिकारियों ने पूर्व में हुए घोटाले से भी कोई सबक नहीं लिया है और आज भी इसकी कुछ जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों को दे रखी है, जो पूर्व के घोटाले में संदेहास्पद हैं। गौरतलब है कि संस्थान में 675 निजी सुरक्षा गार्ड की सीट है। इसमें 634 गार्ड, 21 सुपरवाइजर, 20 गन मैन हैं। इसमें 100 के करीब महिला गार्ड तैनात हैं। संस्थान हर माह एक करोड़ रुपये से अधिक इन्हें पेमेंट अदा करता है।
बनी रहती है गड़बड़ी की आशंका
संस्थान में सुरक्षा गार्डों को लेकर अकसर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। पूर्व में निजी कंपनी और अधिकारी मिल कर गार्डों की संख्या में खेल खेलते थे। कर्मचारी की हाजिरी पीजीआईएमएस में लगती थी और वेतन भी यही से जारी होता था, जबकि वह ड्यूटी कहीं और कर रहा होता था। इन्हीं गायब कर्मचारियों के वेतन को लेकर आपसी बंदरबांट होती थी।