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जिले की 10 पंचायत नहीं चाहती गांव में बिके शराब

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जिले की 10 पंचायत आई आगे, आबकारी विभाग को भेजा प्रस्ताव
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विभाग की रिपोर्ट पर 2018-19 की आबकारी नीति बनाते समय सरकार लेगी फैसला
31 दिसंबर तक मांगे थे पंचायतों ने विभाग ने प्रस्ताव
विजेंद्र कौशिक
रोहतक।
एक तरफ राजस्व के लिए प्रदेश सरकार शराब बिक्री बढ़ाती जा रही है, दूसरी तरफ गांवों का युवा शराब के नशे में अपना जीवन बर्बाद कर रहा है। हालत यह है कि 15 साल के युवा तक सरेआम शराब पीते नजर आ रहे हैं। ऐसे में जिले की 10 पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजकर नए साल में शराब के ठेके गांव में न खोलने की डिमांड की है।
आबकारी विभाग की तरफ से हर साल सितंबर से दिसंबर माह तक पंचायतों से प्रस्ताव मांगे जाते हैं कि वे नए वित्त वर्ष में शराब ठेके खुलवाना चाहती हैं या नहीं। अगर शराब ठेका खोलने के पक्ष में नहीं है तो लिखित में प्रस्ताव भेज सकते हैं। इस बार 10 गांवों की पंचायत ने विभाग को प्रस्ताव भेजे हैं। चार गांवों में पहले से शराब ठेके नहीं खोले गए हैं।
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ये गांव नहीं चाहते शराब बिक्री
आबकारी विभाग को लिखित में शराब बंदी का प्रस्ताव देने वाली पंचायतों में भगवतीपुर, भैंसरू खुर्द, काहनी, गिझी, किलोई, मोरखेड़ी, डोभ, पाकस्मा, गुढ़ान व नसीरपुर शामिल हैं। भैंसरू कलां में पहले से शराब की बिक्री बंद है।
तीन साल में पांच मौत, एक मर्डर
मेरे गांव में दो शराब के ठेके खुले हुए हैं। एक ठेका पड़ोसी गांव भैंसरू कलां की सीमा पर है, जहां की पंचायत पहले ही अपनी सीमा में ठेका बंद करवा चुकी है। शराब के चलते तीन साल में गांव के अंदर पांच मौत हो चुकी हैं। एक बुजुर्ग तो 15 से 17 साल के युवाओं के साथ शराब पी रहा था। झगड़े में बुजुर्ग की हत्या कर दी गई। विभाग अगले साल गांव में शराब का ठेका न खोले। इसके लिए विभाग को पंचायत ने प्रस्ताव भी भेज दिया है।
राजेश कुमार, सरपंच भैंसरू खुर्द

महिलाएं नहीं चाहती गांव में बिके शराब
जींद रोड से चंद कदम दूरी पर उनका गांव है। गांव के बाहर शराब का ठेका खुला हुआ है। गांव की महिलाएं लंबे समय से गांव में शराब बिक्री बंद कराने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि शराब पीने के कारण कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं। इसके चलते आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा है।
हरिकिशन, सरपंच भगवतीपुर
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एक तरफ मंदिर, दूसरी तरफ स्कूल
शहर से निकलते ही भिवानी रोड पर उनका गांव हैं। बाला जी मंदिर और स्कूल के बीच में शराब का ठेका खुला हुआ है। हालत यह है कि शराब ठेके अंदर ही एक युवक की हत्या इसी साल हो चुकी है। दूसरा गांव में महिलाएं भी काफी परेशान हैं। पंचायत नहीं चाहती कि गांव में शराब का ठेका चले। इसलिए पंचायत ने प्रस्ताव आबकारी विभाग को भेजा है।
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शिव कुमार, महिला सरपंच ममता के प्रतिनिधि
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शराब पीकर घरवाली को पीटते हैं ग्रामीण
गांव के अंदर शराब का ठेका खुला हुआ है। पहले 20 साल से ज्यादा के युवा और ग्रामीण शराब पीते थे, लेकिन अब तो 15 साल तक के युवा शराब पीने लगे हैं। गांव में कई युवक तो शराब पीकर अपनी घरवाली को पीटते हैं। ऐसे सरकार से मांग है कि जितना जल्दी हो, शराब की बिक्री बंद की जाए। इसलिए आबकारी विभाग को नए साल में शराब का ठेका न खोलने का प्रस्ताव भेजा है।
महेंद्र सिंह, सरपंच गिझी
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