हरियाणा के रोहतक में पीजीआईएमएस के चिकित्सकों ने 4 घंटे ऑपरेशन कर 55 वर्षीय व्यक्ति के गले से 2 इंच लंबी निडिल निकालने में सफलता प्राप्त की है। इस मुश्किल ऑपरेशन की सफलता ने मरीज को नया जीवन दिया है। ब्रोन्कोस्कॉपी से निडिल नहीं निकल पाई तो पहले उसे अंदर की तरफ मोड़ कर पकड़ने की जगह बनाई और बाहर निकाला।
पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन ने टीम के साथ एक मरीज का करीब 4 घंटे जटिल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया। उसके मुंह से अंदर सांस की नली में फंसी 2 इंच लंबी निडिल बाहर निकाली।
इस उपलब्धि पर कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक डॉ. एसएस लोहचब, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मिततल व विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने डॉ. पवन व उनकी टीम को सराहा है। उन्होंने कहा कि यह जटिल कार्य करके संस्थान का नाम रोशन किया है।
डॉ. पवन ने बताया कि रोहतक के बडे बाजार में रहने वाला 55 वर्षीय व्यक्ति किसी निजी अस्पताल में अपने दांत का इलाज करा रहा था। यहां उसके मुंह में दो इंच की एक निडिल चली गई। पीजीआईएमएस के आपातकाल विभाग में इलाज के लिए आए इस मरीज का चिकित्सकों ने सीटी स्कैन कराया। सिटी स्कैन में निडिल उसके फेफडे में सांस की नली में गहराई में नजर आई।
इसका बड़ा हिस्सा मांस में धंसा था। जबकि नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर था। इलाज के लिए उसे पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन विभाग भेज दिया गया। यहां सांस की नली से निडिल निकालने के कई प्रयास किए, मगर निडिल का ऊपरी भाग पतला होने के कारण पकड़ में नहीं आ रहा था। बड़ा ब्रोंकोस्कॉपी नली में जा नहीं सकता था और छोटा ब्रोंकोस्कॉपी निडिल तक पहुंच नहीं पा रहा था।
इस कारण डॉक्टरों ने उसे मोड़ने का फैसला लिया। इससे निडिल पकड़ने की जगह बन गई। इसके बढ़ लोवर लोब के चौथे हिस्से में पहुंची निडिल को निकालने के लिए फ्लैक्सिबल ब्रोंकोस्कोप का प्रयोग कर निडिल को निकाला गया। इसमें एक आंख से कैमरे की तरह देखा जाता है। यह तकनीक काम कर गई।
ऐसा नहीं होता तो बड़ा आप्रेशन करना पड़ता। इसमें मरीज की सांस नली में सुंई होने के चलते जान का खतरा था। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. पवन के साथ डॉ. अमन, टैक्निशियन अशोक, सुमन, सुनील व भावना शामिल रहे।