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टिटौली गांव का शिव मंदिर
एमए-11
टिटौली गांव का श्याम मंदिर
एमए-11
मंदिर बनवाने में सहयोग करने वाले मुस्लिम ग्रामीण राजवीर
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टिटौली में हिंदू-मुस्लिम मिलकर करा रहे मंदिर का निर्माण
त्योहारों पर भी एक-दूसरे के घर जाकर मनाते हैं जश्न
- गांव में बने वर्षों पुराने शिव मंदिर और चौपाल का निर्माण भी दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर कराया
-हर कोई कर रहा दोनों समुदाय के आपसी प्यार और सौहार्द की सराहना
महबूब अली
रोहतक। भले ही कुछ शरारती तत्व अफवाह फैलाकर नफरत पैदा करने का प्रयास कर रहे हो, लेकिन रोहतक के टिटौली गांव के दोनों समुदाय के लोग अन्य गांव और शहर के लोगों के लिए सबक से कम नहीं है। गांव के दोनों समुदाय के लोग मिलकर पिछले छह माह से श्याम मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। यहीं नहीं शिव मंदिर और चौपाल का भी दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर ही निर्माण कराया है। इसके अलावा त्योहारों पर भी एक-दूसरे के यहां पर जाकर जश्न मनाया जाता है। हर कोई गांव के लोगों की सराहना कर रहा है।
रोहतक से टिटौली गांव की दूरी करीब 18 किलोमीटर है। गांव जाट बाहुल्य है। यहां पर 150 से अधिक मुस्लिम समुदाय के लोग भी रहते हैं। गांव के अधिकतर लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं।
गांव के सरपंच सुरेश, राजबीर, मनोज, मनोहर ने बताया कि गांव पहले से ही आपसी प्यार और सौहार्द की मिसाल रहा है। छह माह से गांव के दोनों समुदायों के लोग मिलकर श्याम मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। मंदिर के निर्माण में दोनों समुदाय के लोगों का पूरा सहयोग है। इससे पूर्व में दोनों समुदाय के लोग गांव में करीब 200 वर्ष पूर्व मिलकर शिव मंदिर का निर्माण करा चुके हैं। इसके अलावा गांव की चौपाल को भी दोनों समुदाय के लोगों ने मिलकर ही बनवाया है। श्याम मंदिर बनवाने में राजवीर के अलावा के नीटू, नत्थे समेत कई ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा है।
सरपंच ने बताया कि गांव के लोग चाहे ईद, बकरीद हो या फिर होली, दीपावली सभी त्योहारों को मिलकर मनाते हैं। शादी समारोह में भी एक दूसरे के यहां पर भागीदारी करते हैं।
वर्जन
गांव के लोग आपसी प्यार और भाईचारे के साथ रहते हैं। मंदिर का भी मिलकर ही निर्माण कराया जा रहा है।- सुरेश कुमार, सरपंच, टिटौली
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टिटौली में मिलकर दोनों समुदाय के लोग मंदिर के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं। अन्य स्थानों के लोगों को भी टिटौली के ग्रामीणों से सबक लेना चाहिए। - राजबीर, प्रधान, ऑल हरियाणा धोबी समाज
कांवड़ भी लाते हैं मुस्लिम
गांव के सरपंच सुरेश और राजबीर बताते हैं कि शिवरात्रि पर गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग कांवड़ भी लाते हैं। यहीं नहीं मंदिरों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के सफल आयोजन में भी दोनों समुदाय के लोगों की भागीदारी रहती है।