कुशाग्र मिश्रा
अब ‘क’ से कन्या की पूजा कर लो और ‘ख’ से खाली घर में खुशियां भर लो
- ‘अनारदाना: संगीतमय वर्णमाला’ किताब की कमाई का आधा हिस्सा किसानों को जाएगा
- चंडीगढ़ की रहने वाली विनोद कपूर अपनी पेंटिंग्स को लेकर किसानों के बीच आईं
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एग्री लीडरशिप समिट-2018 में एक ओर जहां कृषि से संबंधित उत्पादों की प्रदर्शनी लग रही है, वही इससे इतर भी कुछ है। यहां पर चंडीगढ़ से आई दो महिलाओं ने भी अपने स्टाल लगाएं हैं। मूलरूप से सोनीपत की रहने वाली और हाल में चंडीगढ़ निवासी स्वर्णलता बच्चों के लिए अपनी किताब ‘अनारदाना: संगीतमय वर्णमाला’ लेकर पहुंची। इसके साथ ही चंडीगढ़ की रहने वाली चित्रकार विनोद कुमार भी अपनी पेंटिंग्स लेकर किसानों के बीच पहुंची।
स्वर्णलता एनजीओ दादी चाहे, पोती आए के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने बच्चों को शुरुआत से ही देश के बारे में जानकारी देने के लिए वर्णमाला को नया स्वरूप दिया है। उन्होंने बताया कि एक बार वह अपनी सहेली के घर गईं, लेकिन वहां बच्चे के मुंह से ‘एक बोतल वोदका, काम मेरे रोज का’ जैसा गाना सुनकर वह रात भर सो नहीं पाई और एक नई वर्णमाला रची। जहां क से कबूतर की जगह क से कन्या की पूजा कर लो होता है और ख से खरगोश की जगह ख से खाली घर में खुशियां भर लो हैं। इसी तरह पूरी वर्णमाला हैं। जिसमें प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी, रेस्लर साक्षी मलिक समेत शहीद भगत सिंह से लेकर महात्मा गांधी तक हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी किताब का विमोचन मुख्यमंत्री मनोहर लाला खट्टर से कराएंगी और किताब की बिक्री की आधी रकम किसानों के वेलफेयर के लिए देंग्री।
वहीं सेल्फ टॉट आर्टिस्ट विनोद कपूरी अपनी पेंटिंग्स लेकर यहां आई हैं। पेंसिल कलर, वैक्स कलर, ऑयल कलर, वॉटर कलर से बनी उनकी पेंटिंग देखते बनती हैं। उनकी सबसे महंगी पेंटिंग 900 डालर में मलेसिया में बिकी थीं। वह सात वर्ष की उम्र से पेंटिंग्स बना रही हैं।