जिस याचिकाकर्ता ने एलिवेटेड रेलवे ट्रैक पर उठाए सवाल, उसी के घर के सामने किया जा रहा शिलान्यास
तकनीकी सवाल उठाते हुए कोर्ट में दो वकीलों ने डाली है याचिका
कोर्ट के जरिये एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के कांसेप्ट से लेकर उनके निर्माण संबंधी सभी डॉक्यूमेंट राज्य सरकार से मांगे
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
गोहाना-पानीपत रेल लाइन के लिए एलिवेटेड रेलवे ट्रैक की घोषणा के बाद से लगातार विरोध हो रहा है। एलिवेटेड रेलवे ट्रैक तकनीकी रूप से सवालों के घेरे में है, जिस पर कोर्ट में याचिका दायर की है। शनिवार को एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण का शिलान्यास किया जाना है, लेकिन इसका शिलान्यास याचिकाकर्ता के घर के सामने ही किया जा रहा है। हालांकि पहले कहा जा रहा था कि शिलान्यास जहां से एलिवेटेड रेलवे ट्रैक शुरू होगा, वहां पर किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने शिलान्यास की सूचना मिलने पर शुक्रवार को फिर एलिवेटेड रोड के औचित्य पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि तकनीकी तौर पर ट्रैक ठीक नहीं होने के साथ ही सरकार करदाताओं का पैसा बेवजह बहा रही है।
शनिवार को मुख्यमंत्री शहर में हैं और चिन्यौट कॉलोनी कॉलोनी में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का शिलान्यास करेंगे। इसी कॉलोनी में हनुमान मंदिर के पास याचिकाकर्ता एडवोकेट करण सिंह का मकान है। करण सिंह का कहना है कि उन्होंने याचिका डाली तो उन्हीं के घर के सामने शिलान्यास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह जान-बूझकर किया जा रहा है। करण सिंह के साथ ही एडवोकेट नवीन सिंघल भी इस मामले में याचिकाकर्ता हैं। इसी साल 26 फरवरी को कोर्ट के माध्यम से राज्य सरकार से एलिवेटेड रेलवे ट्रैक को मंजूरी देने समेत इस योजना से जुड़े सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग रखी गई है। याचिकाकर्ता नवीन सिंघल ने शुक्रवार को अपने चैंबर में प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि 2007-08 में रेलवे लाइन पर दो रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) बनाने की योजना तैयार की गई। इन दोनों आरओबी की लागत 54 करोड़ रुपये थी, इसके टेंडर भी निकाले गए, लेकिन इस योजना को रोककर सरकार 181 करोड़ की लागत की रेलवे बाईपास की योजना लेकर आई। इसका डीपीआर तक तैयार नहीं हुआ और निर्माण की मंजूरी दे दी गई। इस योजना को भी रोक दिया गया और एलिवेटेड रेलवे ट्रैक की योजना लेकर आए। तर्क दिया गया कि रेलवे लाइन पर पांच रेलवे फाटक हैं, ऐसे में हर जगह आरओबी नहीं बनाने पड़ेंगे, लेकिन इस कारण का कोई लिखित दस्तावेज नहीं है। याचिकाकर्ता ने कहा कि जब काम आरओबी से महज 54 करोड़ रुपये से हो सकता है तो उसकी जगह एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाकर 315 करोड़ खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है। इस रकम को रोहतक में अन्य विकास के कार्यों पर खर्च किया जा सकता है।
यह दस्तावेज मांगे गए
याचिकाकर्ताओं ने एलिवेटेड रेलवे ट्रैक को लेकर नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। इसी वर्ष फरवरी में सरकार से एलिवेटेड रेलवे ट्रैक से संबंधित सभी डॉक्यूमेंट भी पेश करने की मांग कोर्ट के जरिये की गई। आरओबी की मंजूरी से संबंधित सभी ड्राइंग, दस्तावेज, इंस्पेक्शन एवं सर्वे रिपोर्ट। एलिवेटेड रेलवे ट्रैक से संबंधित सर्वे रिपोर्ट, पर्यावरण अनापत्ति प्रमाणपत्र, एनवायरनमेंट इंपैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट, ट्रैफिक पर एक्सपर्ट की रिपोर्ट, आरओबी को लेकर स्वीकार किए गए टेंडर। आरओबी और एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण से पहले योजना बनाए में किए गए खर्च एवं अर्बन प्लानिंग रिपोर्ट की जानकारी मांगी गई है।
याचिकाकर्ता के घर के सामने काटा पेड़, नहीं दिखा पाए अनुमति पत्र
शिलान्यास कार्यक्रम की तैयारी को लेकर शुक्रवार को याचिकाकर्ता के घर के बाहर चिन्यौट कॉलोनी में शीशम का पेड़ काट दिया गया। दूसरा पेड़ नीम का है, जिसे काटने के लिए मजदूर पेड़ पर चढ़ा था। इतने में याचिकाकर्ता मौके पर पहुंचे और पेड़ पर चढ़े मजदूर को पेड़ से उतारा। याचिकाकर्ता करण सिंह ने बताया कि पेड़ काटने का अनुमति पत्र मांगने पर उन्हें नहीं दिखा गया। वह इस मामले की शिकायत वह कोर्ट में करेंगे। इस मामले में डीएफओ रेणु बाला से संपर्क किया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
मुख्यमंत्री आज करेंगे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का शिलान्यास
प्रदेश के मुख्यमंत्री 17 मार्च को सुबह 9:30 बजे चिन्यौट कॉलोनी में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का शिलान्यास करेंगे। सुबह 10 बजे पुराने आईटीआई ग्राउंड में शहीद मदनलाल धींगड़ा सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन करेंगे। सुबह 11 बजे रंगशाला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के राधा कृष्णन सभागार में हरियाणा यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के वार्षिक उत्सव में भाग लेंगे। तत्पश्चात हाइनेस हजल सेक्टर-29 में दोपहर एक बजे एक सलाम बेटियों की कामयाबी के नाम आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।