जिस कंपनी को करना था ब्लैक लिस्ट वही संभाल रही सुरक्षा व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआईएमएस गार्ड घोटाले में संस्थान के दो सुरक्षा अधिकारी निलंबित चल रहे हैं और मामले की जांच एसआईटी कर रही है। इसके बावजूद आरोपों से घिरी निजी सुरक्षा कंपनी ही अभी भी संस्थान की सुरक्षा को संभाल रही है। जबकि आरोप है कि निजी सुरक्षा कंपनी ओरियोन ने संस्थान के अधिकारियों के साथ मिलकर हर माह लाखों रुपये का घोटाला किया है।
लगभग छह माह पहले गार्ड घोटाले की प्रथम रिपोर्ट संस्थान के डीएमएस सुरक्षा ने सौंपी तो प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद विवाद बढ़ा तो रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. रोहताश यादव ने मामले की जांच की। अधिकारी ने कर्मचारियों की संख्या और हाजिरी में गड़बड़ पाए जाने पर मामला पुलिस को सौंपने की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी। इसमें सामने आया था कि निजी कंपनी 100 से अधिक कर्मचारियों को संस्थान के अकाउंट में दिखा रही है, लेकिन वह कार्य भिवानी में कर रहे थे। इसके बाद संस्थान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी निलंबित हुए और डीएमएस सुरक्षा से उनकी जिम्मेदारी ले ली गई। लेकिन संस्थान में आज भी सुरक्षा का जिम्मा आरोपी कंपनी के पास ही है। हैरानी की बात है कि संस्थान को जिस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करना था, वहीं कार्य संभाल रही है। सूत्रों की मानें तो गत सप्ताह डीएसपी स्तर के जांच अधिकारी एमएस कार्यालय आए थे और कागजों की जानकारी ले कर गए हैं। इस मामले में सीनियर डॉक्टरों पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
सर्विस कमीशन घटा कर घोटाला खोरों को आमंत्रित कर रहा संस्थान
संस्थान घोटाला खोर सुरक्षा कंपनियों को स्वयं को कागज में सही दिखाने के लिए आमंत्रित कर रहा है। क्योंकि यहां सर्विस टेक्स पांच फीसदी से घटा कर दो फीसदी कर दिया गया है। संस्थान में 675 गार्ड की जरूरत दिखाई जाती है और प्रति गार्ड 11700 रुपये के हिसाब से पेमेंट देनी होती है। सुरक्षा कंपनियों की मानें तो दो फीसदी तो निजी कंपनी को टीडीएस ही देना पड़ जाता है, ऐसे में कंपनी को कोई बचत होने वाली नहीं है। यदि सात से आठ करोड़ रुपये लगाने वाली कंपनी को एक फीसदी भी बचत नहीं होती तो वह क्या करेगी। ऐसी स्थिति में निजी कंपनी के पास संस्थान से मिलकर घोटाला करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। सूत्रों की मानें तो हाल ही में एक नई कंपनी के नाम संस्थान का सुरक्षा टेंडर छूटा था, लेकिन वह भी तय समय पर जिम्मेदारी संभालने नहीं पहुंचे।
बोले अधिकारी
इस मामले में एमएस कार्यालय से ही सारी कार्रवाई हो रही है। जो भी नियमानुसार होगा वह होगा। इस मामले में अभी जांच चल रही है।
- डॉ. एच.के. अग्रवाल, कुलसचिव, पीजीआईएमएस