फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक माह बीता नहीं ट्रॉमा सेंटर के नोडल अधिकारी को बदलने का फरमान

विज्ञापन
विज्ञापन
ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों व स्टाफ से जवाब तलबी पड़ी महंगी ---
विज्ञापन

एक माह बीतने से पहले ही ट्रॉमा सेंटर से नोडल अधिकारी को बदलने का फरमान
ट्रॉमा सेंटर का लोगो

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआईएमएस के धनवंतरी अपैक्स ट्रॉमा सेंटर को शुरू हुए एक माह भी नहीं बीता है कि अब यहां के नोडल अधिकारी डॉ. महेश माल्हा को बदलने का फरमान जारी हो गया है।
डॉक्टर को प्रशासन वापस आपातकालीन विभाग में भेज रहा है। जबकि बताया जा रहा है कि नोडल अधिकारी ने हाल ही में एक रात ट्रॉमा सेंटर का दौरा किया था और ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों व स्टाफ से जवाब तलब कर लिया था। यह बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आई और अधिकारी को ही बदलने के फरमान जारी हो गए।
विज्ञापन


सूत्रों की मानें तो चौधर की जंग में ट्रॉमा सेंटर की नींव दिन-प्रतिदिन खोखली होती जा रही है। इसके शुभारंभ होने से पहले ही खींचतान चली आ रही है। प्रशासन ने जैसे-तैसे इसे आधी अधूरी तैयारियों के बीच चालू करवाया, लेकिन अभी भी यहां राजनीति हावी है। सूत्र दावा करते हैं कि ट्रॉमा सेंटर पर निजी अस्पतालों का भी दबाव है और ये राजनीतिक रूप से मजबूत हैं। ट्रॉमा सेंटर की जिम्मेदारी बतौर प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. ईश्वर को सौंपी गई है।
इसके अलावा डीएमएस की जिम्मेदारी डॉ. संदीप कुमार के पास है और नोडल अधिकारी का चार्ज डॉ. महेश को सौंपा गया था। लेकिन अचानक नोडल अधिकारी को वापस आपातकालीन विभाग भेजना सवालों में है। सूत्रों की मानें तो ट्रॉमा सेंटर में हाल ही में भर्ती हुए जीडीएमओ की भर्ती को लेकर भी विवाद है।
विज्ञापन

इन पदों में कुछ उम्मीदवार वह चुन लिए गए हैं, जिन्हें संस्थान के अधिकारी नहीं चाहते थे। गौरतलब है कि सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरके कड़वासरा का नाम अकसर ट्रॉमा सेंटर के साथ जुड़ता रहा है। अकसर चर्चाओं में रहता है कि डॉ. कड़वासरा न्यूरोसर्जन डॉ. ईश्वर से वरिष्ठ हैं, इसलिए वह उनके नीचे काम करने को तैयार नहीं हुए। हालांकि, जब भी इस संबंध में डॉ. कड़वासरा से बात की गई तो उन्होंने इस बात को मानने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें