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आरओ की कहानी : खूब हो रही बेमानी, शुद्धता के नाम पर बेच रहे दूषित पानी

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अमित विश्वकर्मा
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रेवाड़ी।
अगर आप शुद्धता के नाम पर आरओ प्लांट का पानी खरीदकर पी रहे हैं तो यह खबर आपको न केवल चौकाने वाली है। बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से आपको चेताने वाली भी है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए जो आप पानी पी रहे हैं उसकी सच्चाई जानकार आप शायद सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि हम कहीं और ज्यादा बीमार होने की ओर तो नहीं जा रहे हैं। जिले में फ्लोराइड पानी का डर दिखाकर करोड़ों का कारोबार करने वाले आरओ प्लांट शुद्ध पानी की जगह संक्रमित पानी की सप्लाई कर रहे हैं। जी हां, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बावल क्षेत्र के लिए गए सभी सैंपल के फेल होने की रिपोर्ट इनकी सच्चाई बयां कर रही है। पानी को शुद्ध करना तो दूर इन प्लांट से शुद्धता मापक से कहीं ज्यादा दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। शुद्ध पानी का मोस्ट प्रोबेबल नंबर (एमपीएन) जीरो से लेकर अधिकतम तीन तक होना चाहिए। यदि इसकी संख्या तीन से ज्यादा है तो पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। लेकिन सैंपल की रिपोर्ट में सात नंबर तक होने का चौकाने वाला खुलासा हुआ है।

बावल के सभी सैंपल फेल, रेवाड़ी वालों पर भरोसा कैसे करें
शहर में जहा 50 से अधिक आरओ प्लांट चल रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह कारोबार जमकर फल फूल रहा है। शुद्ध एवं ठंडे पानी के नाम पर सप्लाई होने वाला यह पानी व्यक्ति के लिए पीना तो दूर जानवरों तक के लिए खतरनाक है। बावल रोड़ स्थित एक आरओ प्लांट का एमपीएन-6, बावल शहर के दो आरओ प्लांट का एमपीएन 6 एवं सात पाया गया। ऐसा ही हाल अन्य आरओ प्लांट का था। स्वास्थ्य विभाग की टीम का कहना है कि जिले के सभी आरओ प्लांट के सैंपल लेने के बाद फेल पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मिलीभगत के चलते क्लोरिनेशन की चेतावनी देकर इन प्लांट को छोड़ दिया जाता है।
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भूजल का खराब होना भी बड़ा कारण
जिले का खोल ब्लॉक जो डार्क जोन में है। वहीं नाहड़ एवं बावल भी नोटिफाइड जोन घोषित किए जा चुके हैं। जिले का भूजल स्तर तीन सौ फीट तक जा चुका है। वहीं अधिकतर भूजल फ्लोराइड युक्त है। इतना नहीं भूजल न्यूट्रल की बजाय क्षारीय है। वहीं आयरन, आर्सेनिक एवं अन्य तत्वों की मात्रा भी तय सीमा से ज्यादा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार रेवाड़ी का पानी केमिकल युक्त है। यही एक बड़ा कारण है कि रेवाड़ी में आरओ प्लांट का अवैध कारोबार जमकर फल फूल रहा है। लेकिन लोगों को डर दिखाकर ये संचालक भी लोगों को दूषित पानी सप्लाई करने के लिए आमादा हैं।

यूं समझिए करोड़ों के इस खेल को
बीते पांच सालों में जिले में वाटर कैंपर का कारोबार दस गुणा तक बढ़ चुका है। मुनाफे के चक्कर में आरओ प्लांट संचालक पानी को केवल ठंडा कर बेच रहे हैं। शहर मेें जहां पहले इक्का-दुक्का आरओ प्लांट हुआ करता था। अब इनकी संख्या बढ़कर पचास के पार हो चुकी है। वहीं इससे ज्यादा संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में है। जानकारी अनुसार एक प्लांट से औसतन बीस लीटर के 500 कैंपर प्रतिदिन सप्लाई होते हैं। वहीं संचालकों द्वारा एक कैंपर की कीमत 300 रुपये तक वसूली जाती है।
कैंपर की यही कीमत 2014 में महज 100 रुपये थी। इधर तीन हजार लीटर के वाटर टैंकर की सप्लाई की बात करें तो शहर में ऐसे दस से अधिक लोग इस कारोबार में जुड़े हैं। एक संचालक के द्वारा प्रतिदिन औसतन 10 टैंकरों की सप्लाई की जाती है। इन टैंकरों की कीमत भी 2014 में महज 200 रुपये थी जो बढ़कर अब 500 रुपये तक पहुंच चुकी है। इस सारे आंकड़े को जोड़ा जाए तो एक महीने ने एक करोड़ से अधिक कारोबार होता है।

किडनी पर पहला वार
जिस तरह का पानी आरओ प्लांट द्वारा सप्लाई किया जा रहा है। इस पानी का पहला वार व्यक्ति की किडनी पर होता है। चिकित्सकों का मानना है कि यदि एक साल तक लगातार यह पानी पी लिया जाए तो व्यक्ति की किडनी खराब होने से कोई नहीं बचा सकता है। इसी के साथ हड्डी भी धीरे-धीरे गलनी शुरू हो जाती है। वहीं पेट खराब होने के कारण आदमी जल्द ही चारपाई पकड़ लेता है। लेकिन कार्रवाई नहीं होने के चलते लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोग बच निकलते हैं।

जिले के आरओ प्लांट का पानी पीने लायक नहीं है। कुछ लोग पानी को ज्यादा देर तक ठंडा करने के लिए इसमें यूरिया तक डालते हैं। सैंपल फेल पाए जाने का मतलब है कि ये पानी लंबे समय तक पीने से जानलेवा भी हो सकता है। -डॉ. जेके सैनी, वरिष्ठ चिकित्सक, नागरिक अस्पताल
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हमारे पास आए सैंपलों में से बावल के सभी सैंपल फेल पाए गए हैं। एक शुद्ध पानी का एमपीए तीन से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि तीन से अधिक है तो यह पानी पीने लायक नहीं माना जाएगा। बावल स्थित आरओ प्लांट से लिए गए सैंपल के पानी का एमपीएन नंबर 7 तक पाया गया है। जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। -डॉ. रेणू बंसल, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल
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