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वैश्य संस्था में चुनावी घमासान : बेटे के नामांकन पत्र पर प्रधान ने किए फर्जी हस्ताक्षर

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वैश्य संस्था में चुनावी घमासान : बेटे के नामांकन पत्र पर प्रधान ने किए फर्जी हस्ताक्षर
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वैश्य संस्था में चुनावी घमासान के बीच मंगलवार को नया ही मामला सामने आया है। चुनाव अधिकारी ने आरोप लगाया है कि प्रधान ने पहले अपने बेटे का नामांकन कराया और कुछ देर बाद ही बेटे की गैर मौजूदगी में उसे वापस लेने के लिए फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए। साजिश के तहत उन्हेें फंसाने के लिए यह सब किया गया था। यह बात और है कि नामांकन वापस नहीं किया गया। उधर, इस प्रकरण को लेकर प्रधान राजेंद्र बंसल ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
दरअसल, वैश्य संस्था में 15 से 16 जून तक नामांकन पत्र भरे गए थे। नामांकन पत्रों की जांच-पड़ताल के बाद मंगलवार को प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी गई। इसी बीच चुनाव अधिकारी विजय गुप्ता की तरफ से मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति में नामांकन प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करने की बात कही है। चुनाव अधिकारी का कहना है कि मंगलवार को निर्वाचन मंडल के सदस्य, कानूनी विशेषज्ञों, नोडल अधिकारी और सहायक निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक की गई। इस बैठक में वार्ड नंबर 69 से प्रधान राजेंद्र बंसल के बेटे रोहित बंसल के नामांकन पर चर्चा हुई। सहायक निर्वाचन अधिकारी रमेश बंसल ने बताया कि रोहित बंसल ने 17 जून को नामांकन पत्र दाखिल किया था। उस समय रोहित बंसल सिंगापुर में थे। इस वजह से सन्नी पुत्र किशन बंसल ने प्रस्तावक बनकर उनका नामांकन पत्र भरा। कुछ देर बाद सन्नी ने वापस आकर प्रस्ताव वापस लेने के लिए फार्म भर दिया और फार्म पर लिख दिया कि आई विड्रा माई फार्म-प्रपोजल। इसके बाद प्रधान राजेंद्र बंसल ने वीडियोग्राफी के बावजूद अपने बेटे रोहित बंसल के फार्म पर आकर आई विड्रा माई प्रपोजल लिखा और रोहित बंसल के नाम पर हस्ताक्षर कर दिए। नियमानुसार, प्रस्तावक भी बिना उम्मीदवार की सहमति के नामांकन पत्र वापस नहीं ले सकता है। इसके अलावा बेटे के फार्म पर पिता के हस्ताक्षर मान्य नहीं होते। यह सरासर गलत है। इसके लिए रोहित बंसल को नोटिस जारी किया गया है। चुनाव अधिकारी ने आरोप लगाया है कि यह सब उन्हें फंसाने के लिए किया गया था। ताकि रोहित बंसल वापस आकर उन्हें फंसा सके कि उनकी बिना सहमति के दूसरों लोगों के कहने पर नाम वापसी क्यों किया गया। उधर, अधिकारियों की इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस मामले में बुधवार को कानूनी राय ली जाएगी और सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। वहीं प्रधान पर चुनाव प्रक्रिया में समय-समय पर बाधा डालने के भी आरोप लगाए हैं। आशंका जताई है कि प्रधान चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को दबाव में लेकर प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं। बैठक में निर्वाचन बोर्ड के रमाकांत गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता, एनसी गर्ग, संजीव गुप्ता निर्वाचन अधिकारी कॉलेजियम नंबर-71, कानूनी विशेषज्ञ ओमप्रकाश मित्तल, नितिन बंसल एडवोकेट, नोडल अधिकारी डॉ. आरए भारद्वाज और डॉ. रमेश बंसल आदि मौजूद रहे।
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सोसायटी रजिस्ट्रार ने चुनाव अधिकारी से मांगा जवाब
प्रधान पर लगे आरोपों के बीच चुनाव अधिकारी भी विवादों में हैं। चुनाव अधिकारी विजय गुप्ता ने वार्ड नंबर 71 से नामांकन पत्र दाखिल किया है। ऐसे में इसी वार्ड से दूसरे दावेदार राजेश जिंदल ने सोसायटी रजिस्ट्रार को पत्र भेजा था। आरोप लगाया था कि चुनाव अधिकारी रहते हुए कोई भी व्यक्ति कैसे चुनाव लड़ सकता है। इस आरोप के बाद सोसायटी रजिस्ट्रार की तरफ से चुनाव अधिकारी से जवाब मांगा गया है। सोसायटी रजिस्ट्रार ने जवाब मांगा है कि किस आधार पर चुनाव अधिकारी होते हुए नामांकन पत्र दाखिल किया है। हालांकि अभी तक चुनाव अधिकारी की तरफ से जवाब नहीं दिया गया है। उधर, चुनाव अधिकारी का कहना है कि वह संविधान के दायरे में रहते हुए चुनाव लड़ रहे हैं। इसके लिए निर्वाचन बोर्ड ने भी हरी झंडी दे दी है।

मतदान के दिन होंगे सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त
चुनाव अधिकारी विजय गुप्ता ने बताया कि दो जुलाई को मतदान होगा। मतदान के समय सीसीटीवी कैमरे, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई जाएगी। चुनाव स्थल पर हथियार लेकर नहीं जा सकेंगे और चुनाव प्रचार सामग्री भी नहीं लगा सकेंगे। मतदाता के पास सोसायटी द्वारा जारी पहचान पत्र और सरकार द्वारा जारी फोटोयुक्त पहचान अनिवार्य है। मौके पर एंबुलेंस, फायर बिग्रेड और डाक्टरों की टीम भी मौजूद रहेगी।

प्रधान ने किया बोलने से इनकार
प्रधान राजेंद्र बंसल पर लगे इन आरोपों को लेकर जब उनका पक्ष लेने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

यह हैं सभी के अलग-अलग बयान
संविधान के अनुसार ही चुनाव लड़ रहा हूं। इसके लिए पहले ही संविधान विशेषज्ञों से राय ले ली गई थी। तीन दिन के अंदर सोसायटी रजिस्ट्रार को जवाब भेज दिया जाएगा। प्रधान ने मुझे फंसाने के लिए बेटे के नामांकन पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर किए थे, लेकिन रोहित बंसल का नाम वापस नहीं किया गया।
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- विजय गुप्ता, चुनाव अधिकारी।

राजेश जिंदल की तरफ से चुनाव अधिकारी को लेकर पत्र मिला था। इसे लेकर चुनाव अधिकारी से जवाब मांगा गया है। नियमानुसार, यदि चुनाव अधिकारी चुनाव नहीं लड़ सकते तो उन्हें हटाने के लिए स्टेट रजिस्ट्रार को लिखा जाएगा।
- राजेश खेड़ा, सोसायटी रजिस्ट्रार
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