फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

रोहतक।
नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी के मामले में खेल का खुलासा हुआ है। कर्मचारियों केवल कागजों में ही सफाई कर रहे हैं। वार्ड में लगे सफाई कर्मचारियों का पूरे महीने तो खाली रहता है और एक ही दिन में पूरे महीने की हाजिरी लग जाती है। कई पार्षद इस मामले में सवाल उठा रहे हैं तो वार्ड एक में रजिस्टर में हर रोज हाजिरी नहीं लग रही है। निगम आयुक्त एवं एडीसी प्रदीप कुमार को रजिस्टर की कॉपी वाट्सअप पर भेज कर पार्षद की ओर से यह शिकायत की गई है। एडीसी ने सफाई निरीक्षक से मामले में रिपोर्ट मांगी है।
नगर निगम में करीब 300 पक्के सफाई कर्मचारी हैं। इसके साथ ही 400 के करीब डीसी रेट पर काम कर रहे हैं। इनका कार्य केवल गलियों की सफाई करना है। शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ घर-घर से कूड़ा उठाने, लिफ्टिंग से लेकर नालों की सफाई का काम निजी एजेंसी को दे रखा है। ऐसे में निगम की ओर से 20 वार्डों में एरिया के हिसाब से पक्के सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सफाई ब्रांच का कहना है कि वार्ड नंबर एक में 32 सफाई कर्मचारी लगा रखे हैं। यह वार्ड जनसंख्या के हिसाब से काफी बड़ा है। वहीं पार्षद का कहना है कि यह संख्या 25 ही है। पिछले दिनों निगम की ओर से सफाई दरोगा बदले गए। जब नए सफाई दरोगा ने काम संभाला तो निगम पार्षद की ओर से उनके वार्ड में सफाई कर्मचारियों के ड्यूटी रजिस्टर की जांच की गई। जांच में पता चला कि छह कर्मचारियों ने एक से 15 जून तक हाजिरी ही नहीं लगाई हुई। पूछने पर सफाई दरोगा ने कहा कि वे तो अभी आए हैं। उन्हें कुछ नहीं पता।
विज्ञापन


निगम आयुक्त को भेजी रजिस्टर की कापी
इसके बाद पार्षद की ओर से निगम आयुक्त एवं एडीसी प्रदीप कुमार के मोबाइल नंबर पर रजिस्टर की कॉपी भेजकर मामले की जांच की मांग गई है। आयुक्त ने सफाई ब्रांच से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। वहीं सफाई निरीक्षक का सुंदर का कहना है कि इस तरह के आरोप गलत हैं और सभी कर्मचारी रोज रजिस्टर में हाजिरी लगाते हैं।

हाउस में उठ चुका है मामला
नगर निगम हाउस की पिछली मीटिंग में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला उठ चुका है। कई पार्षदों ने सवाल उठाया था कि कई सफाई कर्मचारी अधिकारियों के घर पर काम करते हैं, जबकि वेतन निगम के खाते से जाता है। अधिकारियों ने जांच की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पार्षदों ने भी दोबारा आवाज नहीं उठाई।

सफाई कर्मचारियों को लेकर पार्षदों ने बातचीत
मेरे वार्ड में 50 से 60 सफाई कर्मचारी बताए जा रहे हैं। धरातल आधे भी दिखाई देते। कई बार सफाई ब्रांच के अधिकारियों से बात की। कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
ममता रानी, पार्षद, वार्ड नंबर 2

नहीं भेजते कर्मचारियों की सूची
मेरे वार्ड में सैनीवास और शौरा कोठी में कई गलियाें में लंबे समय से झाड़ू नहीं लगाई गई। पूछने पर अधिकारी बताते हैं कि उनके वार्ड में 15 से 16 कर्मचारी तैनात हैं। उनकी सूची उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है।
विज्ञापन

सुशीला इंदौरा, पार्षद वार्ड नंबर 3

पक्के कर्मचारी नहीं करते काम
मेरे वार्ड में 15 कच्चे कर्मचारी हैं। जबकि सुपरवाइजर सहित आठ पक्के कर्मचारी हैं। वार्ड को सफाई के लिए दो भागों में बांटा था। सांईदास कालोनी, अशोक नगर, सैनी आनंदपुरा, सैनीपुरा में पक्के कर्मचारी की ड्यूटी लगाई थी। उसी एरिया से शिकायत आ रही है। मैंने तो सभी कच्चे कर्मचारी लगाने की मांग की है।
संजय सैनी, पार्षद वार्ड नंबर 13
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें