रोहतक।
सैकड़ों, हजारों यात्रियों के सुरक्षित सफर की जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी उठाकर कई रोडवेज कर्मी एक मिसाल कायम कर रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे चालक परिचालक हैं जिन्होंने अपनी गलती की सुधार के लिए रक्तदान करने का बीड़ा उठाया है। धीरे-धीरे इस जीवनदान के लिए कई कर्मी सामने आए और इस सिलसिले में एक के बाद एक जुड़ते चले गए। अब 30 से ज्यादा ऐसे रोडवेज कर्मी हैं जिन्होंने 30 से ज्यादा बार रक्तदान कर लोगों की जिंदगी बचाई। रोडवेज विभाग ऐसे कर्मचारियों का ब्योरा तैयार कर रहा है और इन्हें जल्द सम्मानित किया जाएगा। वहीं एक कर्मचारी ने तो 69 बार रक्तदान करने पर राज्यपाल भी सम्मानित कर चुके हैं। वहीं चालक अशोक 50 से अधिक बार रक्तदान करके जान बचाई। कई रोडवेज कर्मी अपनी पत्नियों के साथ 30 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं।
बस अड्डे पर घायल यात्री की बचाई जान
तस्वीर सिंह रोडवेज डिपो में बतौर मैकेनिक कार्यरत हैं। चार माह पहले ही रोहतक बस अड्डे पर घायल एक यात्री तड़प रहा था। तस्वीर ने मौके पर पहुंचकर घायल को पीजीआई में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने खून के लिए बोला। तस्वीर ने बताया कि उस दौरान मुझे कुछ समझ में नहीं आया और खून देने के लिए हां कर दी। जब उसकी जान बची तो अहसाल हुआ कि रक्तदान से बढ़कर कुछ नहीं। अभी तक 69 बार रक्तदान कर चुका हूं।
रोडवेज से लगी टक्कर तो घायल यात्री को अस्पताल लेकर पहुंचे
पानीपत रोडवेज डिपो के परिचालक वीरेंद्र की बस की दो महीने पहले सोनीपत कार से टक्कर हो गई थी। इसमें कार सवार मनोज कुमार घायल हो गया था। घायल को तड़पता देख परिचालक वीरेंद्र उसे प्राइवेट अस्पताल ले गया। वहां खून देकर उसकी जान बच पाई। इसके अलावा पानीपत निवासी निकित सड़क पर घायल पड़ा था। उसे अस्पताल ले जाकर खून दिया। इसके अलावा तीन अन्य यात्रियों की जान भी रक्तदान करके वीरेंद्र ने बचाई।
यात्रियों ने जिंदगी खोई, तबसे लिया सबक
69 बार रक्तदान कर चुके मैकेनिक तसवीर ने बताया कि वर्ष 1991 में सोनीपत में दिल्ली रोड पर एक बस के ऊपर बिजली का तार टूटकर गिर गया था। बस एक पेड़ से टकरा गई थी। जिसके कारण कई यात्री बाल बाल बचे थे। जबकि दो की खून के अभाव में मौके पर ही मौत हो गई थी। मौत खून के अभाव में हुई थी। उन्होंने तभी रक्तदान कर लोगों की जान बचाने की ठान ली थी। तभी से वे रक्तदान करते चले आ रहे हैं।
अब तक इनका मिला है ब्योरा
रोहतक निवासी मैकेनिक तस्वीर सिंह और पत्नी शीला देवी, बस चालक जय भगवान, जितेेंद्र सिंह, सोनीपत निवासी महावीर सिंह और उनकी पत्नी संतोष, राज सिंह, रोहतक निवासी परिचालक रामलाल, पानीपत निवासी परिचालक भूप सिंह व उनकी पत्नी सावित्री, रोहतक निवासी चालक नरेंद्र, पानीपत निवासी चालक राजवीर सिंह, जींद निवासी अमित, नरेश, हिसार निवासी चालक रोहित, गुडगांव निवासी अजय कुमार, बहादुर गढ़ निवासी चालक राजेश कुमार, पानीपत निवासी सुमित, सोनीपत निवासी परिचालक रोहित, गोहाना निवासी चालक अशोक कुमार, वीरेंद्र सिंह समेत आदि।
मैकेनिक तस्वीर सिंह के अलावा कई चालक, परिचालक लगातार रक्तदान कर मिसाल कायम कर रहे है। सभी का ब्योरा अधिकारियों को भेजा जाएगा। ताकि उन्हें सम्मानित कराया जा सके। ऐसे कर्मचारियों से अन्य को भी सीख लेनी चाहिए
- राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोहतक रोडवेज डिपो