नाले जर्जर, किसानों को नहीं मिल रहा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। ग्रामीणों को नहरी पानी उपलब्ध कराने के मकसद से कई डिस्ट्रीब्यूट्री का निर्माण कराया गया था। फसलों की सिंचाई के लिए डिस्ट्रीब्यूट्री से लिंक नालों का निर्माण करवा दिया गया, लेकिन विभाग ने पानी उपलब्ध नहीं कराया, जिस कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बता दें कि नांगल चौधरी क्षेत्र में 1978 में नोलपुर, शहबाजपुर, दोचाना, हसनपुर आदि डिस्ट्रब्यूट्री का निर्माण कराया गया था। पानी की चोरी रोकने के मकसद से 1988 में नालों का निर्माण कराया गया। तर्क दिया कि डिस्ट्रीब्यूट्री से केवल पेयजल सप्लाई होगा, फसलों की सिंचाई के लिए नाले इस्तेमाल किए जाएंगे। जिनका निर्माण कराने के लिए किसान सोसायटी गठित की गई थी। कमेटी द्वारा किसानों से चंदा एकत्रित किया गया, इसके बाद विभाग की मार्फत निर्माण करवाया गया। उस दौरान भूजल स्तर ऊंचा होने के कारण किसानों को नहरी पानी की जरूरत नहीं पड़ी। देखरेख के अभाव में अधिकांश नाले जर्जर हो चुके। जिनमें पानी की सप्लाई छोड़ना संभव नहीं है। पिछले 10-15 साल से पर्याप्त बारिश नहीं होने से भूजल स्रोत सूखने के कारण 80 फीसदी से अधिक बोरवेल ठप हो चुके। गांवों में पेयजल संकट उत्पन्न होने पर नारनौल, नांगल चौधरी, निजामपुर ब्लॉक को डार्कजोन घोषित कर दिया। ग्रामीणों की पेयजल व फसल सिंचाई व्यवस्था पूर्ण रूप से नहरी सप्लाई पर निर्भर है। आपूर्ति को लेकर सरकार ने उपलब्ध पानी का समान बंटवारा कर दिया। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार प्रत्येक जिले को महीने में 15 दिन नहरी पानी मिलेगा। अधिकारियों को टेल तक सप्लाई पहुंचाने के निर्देश हैं, ताकि ग्रामीणों को सुविधा पूर्वक पेयजल उपलब्ध हो सके, लेकिन विभाग ने फसल सिंचाई की योजना नहीं बनाई। किसान डिस्ट्रीब्यूट्री पर इंजन स्थापित कर पानी लिफ्ट करते हैं। ऐसे में पानी का समान वितरण नहीं हो पाता, जिस कारण टेल के किसानों को पिछले 38 साल से पानी सप्लाई नहीं मिल रही।
कमानिया, भुंगारका, अकबरपुर, शिमली, मूलोदी, सिरोही बहाली के ग्रामीणों ने बताया कि विभाग को किसान सोसायटी की मार्फत नालों का निर्माण करवाना चाहिए। प्रत्येक नाले में 15 दिन लगातार पानी छोड़ने की व्यवस्था करनी पड़ेगी। तभी संपूर्ण रकबे की फसल सिंचाई करना संभव होगी।
किसान सोसायटी को कराना होगा निर्माण
सिंचाई विभाग के एसडीओ नितिन भार्गव ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूट्री पर इंजन लगाकर फसल की सिंचाई करना अवैध है। इसके लिए नालों का प्रावधान है, जिनका निर्माण किसान सोसायटी को कराना होगा। उन्होंने बताया कि लागत राशि का इंतजाम किसानों को चंदा एकत्रित करके करना पड़ेगा। नोलपुर डिस्ट्रीब्यूट्री के करीब आधा दर्जन गांवों को नालों से पानी सप्लाई हो रहा है।
दशकों पहले गठित सोसायटी निष्क्रिय
विभाग द्वारा नालों के निर्माण से पहले किसान सोसायटी गठित की थी। करोड़ों की लागत से नांगल चौधरी, निजामपुर में तीन दर्जन से अधिक नालों का निर्माण कंप्लीट हो चुका। इसके बाद सोसायटी निष्क्रिय हो गई, कई सदस्यों का देहांत भी हो चुका। जिस कारण नालों की रिपेयर प्रक्रिया अटकी हुई है।