अमित कौशिक।
रोहतक।
आमतौर पर देखने में आता है कि सरकारी स्कूलों के अध्यापक ड्यूटी के नाम पर महज खानापूर्ति करते हैं। शायद यही कारण है कि कोई भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाना चाहता। सरकार से तमाम सुविधाएं मिलने के बाद भी यहां पढ़ने वाले बच्चे प्राइवेट स्कूलों की अपेक्षा कहीं पीछे रह जाते हैं। वहीं एक सरकारी शिक्षक ऐसे भी हैं, जो बच्चों को पढ़ाने के लिए रविवार को भी स्कूल आते हैं। गांधी नगर स्थित प्राइमरी विंग के हेडमास्टर राजसिंह राठी ने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का बीड़ा उठा रखा है। वह छुट्टी के दिन घर पर आराम न करके बच्चों को पढ़ाने स्कूल चले आते हैं। आज वर्किंग दिनों में वह स्कूल खुलने से एक घंटा पहले ही आ जाते हैं।
शुरुआत में उनकी इस पहल का कोई खासा प्रभाव नहीं पड़ा। मगर थोड़े ही दिनों में रोजाना एक घंटा पहले आने वाले बच्चे बढ़ने लगे। अभी 50 से ज्यादा बच्चे रोजाना समय से पहले आ जाते हैं। इसके अलावा 10 से 20 बच्चे छुट्टी के दिन भी आ रहे हैं। राजसिंह बच्चों को पढ़ाने के अलावा एक्स्ट्रा एक्टिविटी भी करवाते हैं। उन्होंने चौथी और पांचवीं के कई विद्यार्थियों को बुक बाइंडिंग सिखा दी है।
अपनी जेब से खर्च कर जुटाते हैं जरूरी संसाधन
विभाग की ओर से स्कूल की रिपेयरिंग और इंप्रूमेंट के नाम पर सालाना साढ़े 12 हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि से कई संसाधन पूरे नहीं हो पाते हैं। इसलिए राजसिंह स्कूल में किसी भी जरूरी चीज की कमी को अपनी जेब से खर्च कर पूरा करते हैं।
स्कूल में बढ़ रहे बच्चों के दाखिले
जब सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या गिर रही है। वहीं, राज सिंह के स्कूल में बच्चे बढ़ जाते हैं। राज सिंह ने गांधी नगर स्थित प्राइमरी स्कूल सितंबर 2016 में ज्वाइन किया। उनके आने से पहले अप्रैल 2015 में यहां कुल 143 और अप्रैल 2016 में 136 बच्चे पढ़ रहे थे। शिक्षा के प्रति उनके जज्बे को देखते हुए अब यहां 171 से अधिक दाखिले हो चुके हैं। उनका स्वभाव ऐसा है कि शाम को उनके घर में गणित के सवालों पर अटके बच्चों का अक्सर जमावड़ा लग जाता है। वह सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं।
काम के प्रति ईमानदारी से जीत चुके इनाम
गांव मदीना निवासी राज सिंह अपने गांव और बहुअकबरपुर में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित हो चुके हैं। 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में लगी ड्यूटी में वह बेस्ट बीएलओ का खिताब भी पा चुके हैं।