एमडीयू में खंगाला जाएगा 41 साल का रिकार्ड, सरकार ने दिए आदेश
विनीत तोमर
रोहतक। प्रदेश की ए ग्रेड यूनिवर्सिटी एमडीयू में शुरुआत से लेकर अब तक करीब 41 साल का रिकार्ड खंगाला जाएगा। यूनिवर्सिटी के पास कितना रिकार्ड सुरक्षित है और पुराना होने के कारण कितना रिकार्ड खत्म होने की स्थिति में है? अब पूरे रिकार्ड को खंगालकर उसका डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।
यूनिवर्सिटी के रिकार्ड के साथ यदि किसी ने छेड़छाड़ की है तो वह भी इसमें स्पष्ट हो जाएगा। सरकार के आदेश के बाद यूनिवर्सिटी स्तर पर इस रिकार्ड को खंगालने की तैयारी शुरू कर दी गई है। 41 साल की अवधि में करीब एक करोड़ पेज की कॉपी स्कैन होगी।
19 अप्रैल 1976 में एमडीयू का निर्माण हुआ था। समय के साथ-साथ यूनिवर्सिटी में काफी बदलाव हुआ। शिक्षा और खेल के क्षेत्र में यूनिवर्सिटी को अपनी अलग पहचान मिली। हालांकि बीच-बीच में यूनिवर्सिटी कई बार धांधली और बड़े-बड़े फर्जीवाड़ों के आरोपों में भी घिरी रही। सूत्रों की मानें तो हाल ही में सरकार की तरफ से यूनिवर्सिटी को पत्र भेजा गया है।
इसमें कहा गया है कि पिछले करीब पांच साल के रिकार्ड का डिजिटलाइजेशन किया जाए। सरकार का इसके पीछे क्या मकसद है यह तो नहीं कह सकते? लेकिन सरकार से पत्र आने के बाद यूनिवर्सिटी भी हरकत में आ गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन तैयारी कर रहा है कि पांच साल की बजाय शुरुआत से लेकर अब तक यानी 41 साल का रिकार्ड खंगाला जाए। शुरुआती दौर में छात्रों का स्थायी रिकार्ड खंगाला जाएगा। इसमें छात्र का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसका रिजल्ट रहेगा। इसे लेकर बुधवार को यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों ने घंटों तक मीटिंग की।
इसमें मंथन हुआ कि रिकार्ड खंगालने के बाद उसका पूरा डिजिटलाइजेशन कर सिस्टम पर डाला जाएगा। क्योंकि कुछ रिकार्ड ज्यादा पुराना होने के चलते खत्म होने की स्थिति में है। अधिकारियों का मानना है कि यदि शुरू से लेकर अब तक के रिकार्ड का डिजिटलाइजेशन किया जाए तो करीब एक करोड़ पेज स्कैन करने होंगे। यह काम किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इसके लिए किसी बाहरी कंपनी को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सामने आ सकते हैं रिकार्ड में हेरफेर के मामले
दरअसल, यूनिवर्सिटी को इतना लंबा समय हो गया है कि ऐसे में पूरे रिकार्ड को सहेज कर रखना चुनौती है। यूनिवर्सिटी यदि रिकार्ड खंगालती है तो उसमें यह भी सामने आ जाएगा कि कौन से रिकार्ड में हेरफेर किया गया और अपने स्थान पर न होकर इधर-उधर पहुंचाया गया है। इससे यूनिवर्सिटी को बड़ी सफलता मिल सकती है।
1995 में आई थी भयानक बाढ़
वर्ष 1995 में रोहतक समेत कई अन्य स्थानों पर भयानक बाढ़ आई थी। हालात यह थे कि पांच-छह फिट तक पानी चढ़ गया था। बाढ़ की वजह से यूनिवर्सिटी की कई बिल्डिंग के प्रथम तल पर भी पानी भर गया था। ऐसे में माना जा रहा है कि उस समय भी कुछ रिकार्ड खत्म हो सकता है।