जलघर में डूबने से दिनोद गांव के युवक की मौत
भिवानी। डाबर कॉलोनी जलघर के टैंक में डूबने से दिनोद गांव के युवक की मौत हो गई। एक महीने के भीतर इस जलघर में डूबने की वजह से यह तीसरी मौत है। पिछले महीने की छह तारीख को डूबने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई थी। एक ही जलघर में महीने में तीसरी मौत के बाद प्रशासन की भारी लापरवाही सामने आई है।
यह घटना वीरवार दोपहर करीब दो बजे घटी। डाबर कॉलोनी स्थित जलघर में नहाना दिनोद गांव के नवीन कुमार (23) के लिए जानलेवा साबित हुआ। पढ़ाई के बाद नौकरी की तैयारियों में जुटा नवीन अपने तीन-चार दोस्तों के साथ जलघर में नहाने के लिए गया। नवीन को तैराना नहीं आता था, लेकिन फिर भी वह टैंक में उतर गया। पानी गहरा होने की वजह से नवीन को बचाया नहीं जा सका। नवीन अपने परिवार में इकलौता था।
हादसे के बाद आसपास के लोगों ने नवीन को खोजने का प्रयास किया। एक घटे से ज्यादा की मशक्कत के बाद लोगों ने नवीन के शव को बाहर निकाला। जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया। मामले के जांच अधिकारी सुरेश ने बताया कि मृतक नवीन के पिता सुरेश के बयान के आधार पर इत्तफाकिया (धारा 174) मौत की कार्यवाही करके शव परिजनों को सौंप दिया। नवीन को तैरना नहीं आता था।
एक घंटे बाद पहुंचे गोताखोर
हादसों को लेकर प्रशासन कितना मुस्तैद है, इसका अंदाजा नवीन के डूबने की घटना के दौरान देखने को मिला। एक घंटे से ज्यादा वक्त तक ग्रामीण अपने स्तर पर नवीन को जलघर में खोजते रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से भेजे गए गोताखोर शव मिलने के बाद मौके पर पहुंचे। मृतक के दोस्त ने बताया कि शव टैंक से बाहर निकाल लिया गया, तब एक गोताखोर पहुंचा। गोताखोर से पहले पुलिस पहुंच गई थी।
कब जागेगा प्रशासन
एक महीने के भीतर डाबर कॉलोनी जलघर में तीसरी मौत ने आजजन को हिलाकर रख दिया। छह मई को सिरसा के दो सगे भाइयों की इसी जलघर में डूबने से मौत हुई थी। इस घटना के बाद अमर उजाला ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया था, कि प्रशासन ने जलघर में एंट्री और नहाने वालों के खिलाफ एक्शन लिया होता तो शायद दोनों भाइयों की जान बच सकती थी। यदि प्रशासन ने छह मई की घटना के बाद भी सबक लिया होता तो शायद नवीन की जान बच सकती थी। इस गंभीर मसले पर प्रशासन की संवेदनहीनता का आलम यह है कि जलघरों व नहरों में युवक-बच्चे खुलेआम नहाते हैं। लेकिन, प्रशासन ने कार्रवाई तो दूर नहाने वालों को टोकने तक की जहमत नहीं उठाई।