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पूरे साल पर भारी पड़े लॉकडाउन के 18 दिन, कोरोना से हर रोज गई जिले में औसतन 14 की जान

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जिलावासियों पर कोरोना संक्रमण काल के एक साल पर मई माह के 18 दिन सबसे भारी साबित हुए हैं। लॉकडाउन के बावजूद इस माह में अब तक 258 यानी हर रोज औसतन 14 लोगों की जान गई, जिनका नगर निगम ने श्मशान में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में मई माह में मरने वालों का आंकड़ा 223 है। अब सवाल उठता है कि 35 लोग वे कौन हैं, जिनका निगम ने कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया है।
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कोरोना ने जिले में पिछले साल मार्च माह में दस्तक दी थी। अप्रैल 2020 में कोरोना संक्रमण से दम भी तोड़ने लगे थे। सरकार की तरफ से निर्देश जारी किए गए थे कि जहां कोरोना संक्रमित मरीज की जान जाती है, वहां का स्थानीय प्रशासन ही कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करेगा। चाहे मरीज दूसरे जिले या राज्य का क्यों न रहने वाला हो। परिजनों को शव नहीं दिया जाएगा। क्योंकि शव सौंपने से कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि कोरोना संक्रमण शुरू होने से अब तक 1287 शव पहुंचे, जिनका कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। इसमें 146 मरने वाले दूसरे राज्यों से थे, जिनका रोहतक में उपचार चल रहा था।
मई माह पड़ा पूरे साल पर भारी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना संक्रमण को लेकर हर रोज सरकारी बुलेटिन जारी किया जाता है। विभाग के बुलेटिन के मुताबिक कोरोना से 30 अप्रैल तक जिले में 205 लोगों की जान गई थी। जबकि 1 मई से 18 मई तक 223 लोगों ने दम तोड़ा है। इस तरह स्वास्थ्य विभाग का रिकॉर्ड भी बयां कर रहा है कि मई माह के 18 दिन में सबसे ज्यादा लोगों ने कोरोना संक्रमण से दम तोड़ा है।
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18 दिन में कोरोना प्रोटॉकाल के तहत अंतिम संस्कार
कुल संस्कार 449
प्रदेश के शव 401
रोहतक के शव 258
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 223
सरकार की गाइड लाइन के तहत स्वास्थ्य विभाग की अनुमति व रिकॉर्ड मिलने के बाद ही कोरोना संक्रमित मरीजों के शवों का प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके लिए वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान व जींद रोड स्थित शिव शंकर श्मशान भूमि में व्यवस्था की गई है। साथ ही जींद रोड पर भी कब्रिस्तान को भी चिह्नित किया गया है।
- प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम
सरकार के नियमों के तहत मृत्यु के 21 दिन के अंदर ही ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया जाता है। ऑफलाइन प्रक्रिया बंद हैं। किसी भी अटल सेवा केंद्र या दूसरी जगह से आवेदन किया जा सकता है। नगर निगम एरिया के प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड से मिलान के बाद ऑनलाइन ही जारी किए जा रहे हैं।
- डॉ. उदयभान, प्रभारी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र ब्रांच, नगर निगम
शवों का ऑडिट पूरा होने तक स्वास्थ्य विभाग इन्हें अपने आंकड़ों में शामिल नहीं करता। जबकि पीजीआईएमएस से शव अंतिम संस्कार के लिए चला जाता है। विभाग मृतक की पूरी केस हिस्ट्री जुटाकर रिकॉर्ड तैयार करने के बाद उसे अपने आंकड़े में दिखाता है। पीजीआईएमएस में जिले के अलावा अन्य जिलों की भी मौत होती है। इसमें देखना होता है कि मरीज कहां का है और किस बीमारी से उसकी मौत हुई है।
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- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
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