अमर उजाला ब्यूरो
एआरटी सेंटर की नियुक्तियों में धांधली के आरोप
- एचआईवी पीड़ितों से इंटरव्यू में पूछे निजी सवाल
एचआईवी का लोगो
संजय कुमार
रोहतक। प्रदेश के एकमात्र एआटी सेंटर पीजीआईएमएस में काउंसलर, स्टाफ नर्स व लैब तकनीशियनों की नियुक्तियों में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों ने धांधली का आरोप लगाया है। इसके साथ ही इंटरव्यू लेने वालों पर सवाल खडे़ करते हुए कहा है कि अधिकारी ने उनके जीवन से जुडे़ निजी सवाल पूछे, जबकि किसी को अधिकार नहीं है कि वह एचआईवी पीड़ित के जीवन व उनकी जीवनशैली पर कोई सवाल उठाए।
पीएलएचआईवी संगठन के प्रधान ने एआरटी सेंटर में एचआईवी पीड़ितों से हो रहे भेदभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि छह जून 2018 को एआरटी सेंटर में जॉब के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसकी अंतिम तिथि 25 जून थी। यहां नोडल अधिकारी डॉ. दीपक जैन ने अपनी मर्जी चलाते हुए पॉजिटिव मरीजों से भी लिखित परीक्षा ली। जबकि इसमें एचआईवी पॉजिटिव लोगों का सीधे इंटरव्यू होना था। लिखित परीक्षा में भी चार उम्मीदवारों ने अपनी काबीलियत दिखाई और साक्षात्कार तक पहुंच गए। हैरानी तो उस समय हुई जब साक्षात्कार लेने आए अधिकारी ने सभी एचआईवी पॉजिटिव उम्मीदवारों से निजी जीवन पर सवाल पूछे। साक्षात्कार में पूछ गए सवाल से अधिकारी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। स्थिति यह थी कि महिला उम्मीदवार से भी उलटे सवाल किए गए, ऐसा दिखाया गया कि वह एचआईवी पॉजिटिव हैं और बहुत बडे़ गुनहगार हैं। स्थिति यह थी उम्मीदवारों को चरित्रहीन साबित किया जा रहा था।
उम्मीदवारों ने सवाल उठाया है कि आवेदन में कहा गया कि वह एचआईवी पॉजिटिव लोगों को प्राथमिकता देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। काउंसलर के पद के पॉजिटिव उम्मीदवारों ने 90 में से 62, 54, 48 अंक प्राप्त किए और नेगेटिव उम्मीदवारों ने भी 62, 54, 48 अंक प्राप्त किए। इसके साथ स्टाफ नर्स की पॉजिटिव उम्मीदवार ने 90 में से 46 अंक प्राप्त किए, लेकिन उसे अयोग्य करार दे दिया। दो जुलाई को अधिकारियों ने गुप्त तरीके से परिणाम घोषित कर दिया, इसे न तो यूएचएसआर की वेबसाइट पर डाला गया और न ही कहीं बोर्ड पर चस्पा किया गया। पीड़ितों ने कहा कि सरकार लोगों को जागरूक करती है कि एचआईवी पीड़ित समाज का अलग हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद यदि अधिकारी ही उनके साथ भेदभाव करेंगे तो क्या होगा।
दवा बंद कर आंदोलन शुरू करने की दी चेतावनी
परीक्षा में पास उम्मीदवारों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि एचआईवी पॉजिटिव मरीजों से यदि भेदभाव होता है तो वह आंदोलन करेंगे। इसके लिए वह अपनी नियमित चल रही दवाओं को पहले बंद करेंगे। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। पीड़ितों ने सवाल उठाया कि साक्षात्कार में एक भी पॉजिटिव उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं दी गई है। पहले भी एक पीड़ित का नाम सार्वजनिक रूप से चस्पा कर दिया गया था, इसका केस वह न्यायालय में लड़ रहे हैं। इस संबंध में नाको की प्रोजेक्ट डायरेक्टर जसजीत कौर से संपर्क साधा गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि महिला अधिकारी ने व्हाट्सएप पर पीड़ित की शिकायत को देख लिया है, लेकिन जवाब नहीं दिया। वहीं सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि यह मामला नाको का है। वह इस संबंध में कुछ नहीं कह सकते।