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जिला बार की चौधर का मामला : 350 वकील नहीं डाल पाएंगे वोट

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समय पर नहीं जमा कराई बार की फीस, अब 350 वकील नहीं डाल पाएंगे वोट
- जिला बार की चौधर का मामला : 2150 वकीलों की सूची तैयार, चुनाव अधिकारी को वोटर लिस्ट देगी कार्यकारिणी

- छह अप्रैल को डाले जाएंगे बार के लिए वोट, जोजो छठी बार मैदान में, प्रधान कुंडू दौड़ से बाहर

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिला बार की चौधर को लेकर माहौल गरम होने लगा है। अबकी बार 6 अप्रैल को होने वाले बार चुनाव में करीब 350 वकील न तो वोट डाल पाएंगे और न ही चुनाव लड़ सकेंगे। जांच के दौरान पता चला है कि उक्त वकीलों ने समय पर अपनी फीस व दूसरी आपत्तियां दूर नहीं की। छह अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल की तरफ से दोनों प्रदेशों में एक साथ बार चुनाव कराए जाएंगे।

प्रदेश के अंदर रोहतक बार का अपना ही राजनीतिक स्थान है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से लेकर राज्यसभा सांसद शादीलाल बतरा, पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा, संत कुमार और कांग्रेस के दूसरे कई नेता बार से ही निकलकर प्रदेश की सियासत में स्थान बनाने में कामयाब रहे। यहीं कारण है कि जिला बार में कांग्रेस के बाद अब भाजपा भी रुचि लेने लगी है। खुद सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर दो बार जिला बार के कार्यक्रमों में शिरकत कर चुके हैं। पिछले बार चुनाव में करीब 1800 वकीलों ने अपनी वोट डालकर चौधर तय की। दीपक कुंडू लगातार दूसरी बार प्रधान बने, जबकि जयप्रकाश उप प्रधान और सुमित बुधवार सचिव बनने में कामयाब रहे। अबकी बार जिला बार का चुनाव कुछ हटकर हो रहा है। क्योंकि पंजाब और हरियाणा में एक ही दिन बार काउंसिल ऑफ हाईकोर्ट की तरफ से चुनाव कराए जा रहे हैं। साथ कुछ नियम तय किए हैं। इसके तहत एक वकील केवल एक जगह वोट डाल पाएगा। उसे समय पर फीस जमा करानी होगी।
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जोजो छठी बार मैदान में, कुंडू दौड़ से बाहर
जिला बार की चौधर को लेकर कई वकीलों के नाम चर्चा में चल रहे हैं। हालांकि खुलकर कोई सामने नहीं आया है। चार बार प्रधान रहे लोकेंद्र फौगाट उर्फ जोजो छठी बार मैदान में उतर सकते हैं। क्योंकि उनके गुट से मौजूदा प्रधान दीपक कुंडू इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। क्योंकि वे लगातार दो बार प्रधान रह चुके हैं। बार के नियमों के तहत लगातार तीसरी बार बार का चुनाव नहीं लड़ा जा सकता। जोजो 2010 में प्रधान का चुनाव उमेश भारद्वाज से हार गए थे। वहीं, हर स्वरूप हुड्डा भी मैदान में हैं। जबकि पूर्व बार सचिव दीपक भारद्वाज का नाम भी सामने आ रहे हैं।

बार में जाट समुदाय का दबदबा
जिला बार में जाट समुदाय के वकीलों का दबदबा रहा है। फरवरी 2016 में भड़के दंगों से पहले जिला बार के बाहर ही झगड़ा हुआ था। ऐसे में बार चुनाव में भी जाट और नॉन जाट का कार्ड जमकर खेला जाता है। सीधे मुकाबले में जाट समुदाय के वकील का जीतना तय माना जाता है, लेकिन अगर जाट समुदाय से कई नाम सामने आते हैं तो नॉन जाट समुदाय का एक दावेदार बाजी मार सकती है। हालांकि अभी चुनाव को लेकर केवल चर्चाओं का बाजार गरम है।
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साढ़े तीन सौ वकीलों नहीं जमा कराई फीस
जिला बार कार्यकारिणी की तरफ से 15 जनवरी तक बार की फीस व दूसरी आपत्तियां दूर करने के लिए समय सीमा रखी थी। पिछले दो सप्ताह से जमा कराई गई फीस रसीद की जांच पड़ताल की जा रही थी। साढ़े तीन सौ के करीब वकीलों ने फीस जमा नहीं कराई। ऐसे वकील चुनाव में भाग नहीं ले सकेंगे। 2150 वकीलों की मतदाता सूची तैयार की जा रही है। जो छह अप्रैल को वोट डाल सकेंगे।
- दीपक कुंडू, प्रधान जिला बार एसोसिएशन
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