श्यामेसर तालाब का 20 करोड़ से होगा जीर्णोद्घार
चरखी दादरी।
श्यामेसर तालाब के जीर्णोद्घार की कवायद नगर परिषद ने धरातल पर शुरू कर दी है। शुक्रवार को तालाब के सर्वे के लिए दोबारा दादरी आए गुरुग्राम के आर्किटेक्ट ने नप अधिकारियों से तालाब की कायाकल्प पर 10 की बजाय 20 करोड़ रुपये लागत आने का अनुमान जताया है। नगर परिषद अधिकारियों ने प्रोजेक्ट के लिए जो डिमांड की थी वो पहले अनुमानित दस करोड़ की राशि में पूरी नहीं हो पाती। आर्किटेक्ट से विचार-विमर्श के बाद नप अधिकारियों ने उसे फाइनल इस्टीमेट और नया नक्शा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, पुरानी प्लानिंग में फेरबदल भी किया गया है। पहले तालाब के बीच में मंदिर बनवाने की भी प्लानिंग जिसे अब तालाब के सौंदर्यीकरण को जहन में रखते हुए ड्राप आउट कर दिया है। आर्किटेक्ट के अगले शुक्रवार को नया नक्शा व फाइनल इस्टीमेट भेजते ही नप अधिकारी सीएम मनोहर लाल खट्टर से सीधा स्वीकृति लेने पहुंचेंगे। श्यामेसर तालाब के जीर्णोद्घार की घोषणा भी मुख्यमंत्री ने ही की थी। नप अधिकारियों की मानें तो सितंबर के अंत या अक्तूबर के पहले सप्ताह में धरातल पर काम शुरू करवा दिया जाएगा।
कभी अपने सौंदर्यीकरण के लिए मशहूर श्यामेसर तालाब फिर से पुराने रंग में जल्द नजर आएगा। वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार श्यामेसर तालाब को नगर परिषद अब पर्यटन स्थल में तब्दील करने जा रही है। नगर परिषद ने करीब तीन माह पहले तालाब के चारों तरफ ट्रैक व रंग-बिरंगी लाइटें सहित बीच में एक मंदिर बनवाने की प्लानिंग बनाकर गुरुग्राम के एक आर्किटेक्ट से इसे साझा भी किया था। नगर परिषद अधिकारियों ने उस समय इस प्रोजेक्ट पर करीब दो लाख रुपये लागत आने की संभावना जताई थी। करीब एक माह पहले आर्किटेक्ट ने तालाब का निरीक्षण किया और इसका इस्टीमेट व नक्शा तैयार किया। शुक्रवार सुबह करीब दस बजे गुरुग्राम से आर्किटेक्ट व उनकी टीम चरखी दादरी पहुंची। आर्किटेक्ट ने तालाब की कायाकल्प पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्चा आने का अनुमान जताया। इसके बाद नगर परिषद अधिकारी आर्किटेक्ट टीम सहित मौके का दोबारा से निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान आर्किटेक्ट टीम ने प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ सुझाव भी नप अधिकारियों को दिए। कार्यालय आने के बाद आर्किटेक्ट के साथ नप अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया। अंत में करीब 20 करोड़ की लागत का नया एस्टीमेट व नक्शा तैयार करने पर दोनों पक्षों में सहमति बनी। नक्शा व इस्टीमेट तैयार करने के लिए आर्किटेक्ट ने नप अधिकारियों से एक सप्ताह मांगा और अगले शुक्रवार को दोनों चीजें लेकर दादरी पहुंचने की बात कही। अगर नप अधिकारियों की भावी प्लानिंग की बात करें तो इस्टीमेट व नक्शा मिलते ही चंडीगढ़ जाकर सीएम मनोहर लाल खट्टर से ही सीधी अनुमति ली जाएगी। सीएम से जाकर अनुमति लेने के पीछे कारण इस प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाली बड़ी धनराशि के साथ-साथ यह सीएम की ही घोषणा होना है। नगर परिषद से सरकार भी इसका प्रपोजल मांग चुकी है। प्लानिंग को धरातल पर उतारने के लिए नगर परिषद गुरुग्राम के एक आर्किटेक्ट की मदद ले रही है।
आस्था का प्रतीक है ऐतिहासिक तालाब
शहर की ऐतिहासिक धरोहर माने जाने वाला श्यामेसर तालाब इन दिनों बदहाल पड़ा है। तालाब के चौतरफा गंदगी के ढेर लगे हुए हैं जबकि तालाब में सीवरेज मिक्स पानी भी इसकी सुंदरता को धूमिल कर रहा है। करीब एक दशक पहले तक तालाब के चारों तरफ बने मंदिरों के चलते इसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान थी जोकि अब लगभग विलुप्त होती जा रही है। यही कारण है कि अब न तो तालाब पर सैलानी नजर आते हैं और न ही मेला लगता है। तालाब की बदहाली का मुद्दा प्रदेश की दो सरकारों के सामने उठ चुका है और दो मुख्यमंत्री इसके जीर्णोद्घार की घोषणा भी कर चुके हैं।
एक साल से अटकी पड़ी है सीएम की घोषणा
सूबे के मखिया मनोहर लाल ने तालाब को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा गत 18 सितंबर को आयोजित रैली में की थी। पिछले 11 माह से इस प्रोजेक्ट का धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है। करीब आठ माह तक तो मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा है और करीब दो माह पहले इसे सिरे चढ़ाने की प्लानिंग तैयार हुई थी। शुक्रवार को इसमें दोबारा से फेरबदल किया गया। नगर परिषद अधिकारियों ने बाकायदा इस प्लानिंग का खाका कागजी स्तर पर भी तैयार कर दिया है। इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी रूप से सक्षम न होने के चलते नगर परिषद ने गुरुग्राम के एक आर्किटेक्ट को इस प्रोजेक्ट के लिए हायर किया है।
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यूं नजर आएगा श्यामेसर तालाब
नगर परिषद अधिकारियों ने तालाब को पर्यटन स्थल बनाने की प्लानिंग तैयार की इसे गुरुग्राम के आर्किटेक्ट से भी साझा कर लिया है। इसके मुताबिक तालाब के चारों तरफ ट्रैक निर्माण करवाया जाएगा और इस ट्रैक पर रंगीन लाइटें लगवाई जाएंगी। तालाब के ट्रैक पर राजस्थान का गुलाबी पत्थर भी इसकी शोभा बढ़ाने के लिए लगाया जाएगा।
डी-वॉटरिंग तक का प्लान किया नप ने तैयार
नगर परिषद इसकी डी-वॉटरिंग भी कराएगा और इसका खाका बाकायदा तैयार किया जा चुका है। नगर परिषद तालाब में पंप सेट मोटरें लगाकर सीवरेज के जरिए इस पानी की निकासी करेगा। तालाब का पानी निकालकर यहां शुद्ध पानी भरा जाएगा। इस काम के लिए नगर परिषद प्रशासनिक हस्तक्षेप के जरिए जन स्वास्थ्य विभाग की मदद भी लेगा। वहीं, अगर जन स्वास्थ्य विभाग व नप अधिकारियों में तालमेल नहीं बैठा तो फिर नप किराये पर पंप सैट व मोटरें लेकर पानी की निकासी करेगी।
वर्जन:
पहले तालाब के जीर्णोद्घार पर दस करोड़ की लागत आने की संभावना थी। शुक्रवार को आर्किटेक्ट ने तालाब का निरीक्षण करने के बाद इस पर कम से कम 20 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना जताई है। हमने उन्हें फाइनल इस्टीमेट व नक्शा तैयार करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इसके तुरंत बाद सीएम के पास जाकर इसकी अनुमति हम लेंगे। - हरीकिशन शर्मा, एमई नगर परिषद
वर्जन::
हमने मौका दोबारा से शुक्रवार को देख लिया है। यह बड़ा प्रोजेक्ट है और इस पर दस की बजाय कम से कम 20 करोड़ लागत आएगी। आठ सितंबर को हम नक्शा व इस्टीमेट नगर परिषद अधिकारियों को सौंप देंगे। सीएम मनोहर लाल के साथ प्रोजेक्ट साझा करते वक्त नप अधिकारियों के साथ मैं भी जाऊंगा और उन्हें इस प्रोजेक्ट के बारे में बताऊंगा। - गोपाल, आर्किटेक्ट गुरुग्राम