भारतीय गायों को बचाने अमेरिका से आए डेनिअल, रोहतक में बैठे अनशन पर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। रोजाना पॉलीथिन खाकर मर रही गायों से भारत की जनता का दिल तो पसीजा नहीं है, लेकिन अमेरिका निवासी डेनिअल डिवाइन पिछले ढाई साल से संघर्ष कर रहे हैं। भारतीय गायों की दुर्दशा को देखते हुए डेनिअल ने घर-कारोबार छोड़कर यहीं रहने का संकल्प लिया। वे गायों और सामाजिक मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में हुए आंदोलनों में भाग ले चुके हैं और अब रोहतक में संत गोपालदास के साथ दो दिन से अनशन पर बैठे हैं। वहीं, मंगलवार शाम को रोहतक प्रशासन ने डिवाइन को नोटिस भेजकर अनशन करने से मना किया है और जवाब मांगा है। इस पर डिवाइन का कहना है कि वे भारतीय जनता की तरह सोए हुए नहीं है। यह एक मुख्य महत्वपूर्ण मुद्दा है और वे गायों को हक दिलाकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने एडवोकेट से सलाह लेकर ही नोटिस का जवाब देंगे।
मानसरोवर पार्क में संत गोपालदास के साथ अनशन पर बैठे डेनिअल को रोहतक प्रशासन ने मंगलवार शाम 6:30 बजे नोटिस भेजा। इस पर अमेरिकी संत ने कहा कि वे किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं है। वह भारत में गायों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मरते दम तक करते रहेंगे। वह संत परंपरा के आधार पर ही अनशन पर बैठे हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए आए हैं। करीब तीन साल पहले 2015 में जून में भारत आए थे और तभी से टूरिस्ट वीजा पर यहीं रह रहे हैं। वे इको फ्रेंडली विलेज और फूड फोरेस्ट संस्थाओं से जुड़कर रिसर्च कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य है कि भारत में इको फ्र्रेंडली गांव बनें और शहरीकरण कम हो। उनकी उम्र करीब 56 साल है और वे पेशे से आर्किटेक्चर थे। उन्होंने साल 2016 में सिंहस्थ महाकुंभ में दीक्षा ली है। उन्होंने बताया कि गोचरान भूमि को लेकर जब संत गोपालदास दिल्ली में जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे, तभी उनसे मुलाकात हुई थी। उन दोनों के जीवन का मुख्य उद्देश्य एक ही है और इसलिए वे साथ में संघर्ष कर रहे हैं।
गोशालाओं और गोरक्षा दलों के प्रतिनिधि पहुंचेंगे आज
गोचरान भूमि को खाली कराने की मांग को लेकर संत गोपालदास का आमरण अनशन 12वें दिन भी जारी रहा। बुधवार को सुबह 10 बजे इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर से गोशालाओं और गो रक्षा दलों के प्रतिनिधि रोहतक पहुंचकर बैठक करेंगे। इस आंदोलन को फरीदाबाद की जाट आरक्षण संघर्ष समिति और भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने भी समर्थन दिया है। दोपहर में विभिन्न गांवों से सैकड़ों महिलाओं ने पहुंचकर पार्क में भजन कीर्तन भी किया है।