24सीटीके06..कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में मंगलवार वन हेल्थ बार्किंग रैबीज बाउंड्रीज' सम्मेलन में
रोहतक। पीजीआईएमएस कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से ''वन हेल्थ : बार्किंग रेबीज बाउंड्रीज'' चिकित्सा विज्ञान सोसाइटी का दूसरा सम्मेलन मंगलवार को आयोजित किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय डॉ. अतुल गोयल रहे। इस ऑनलाइन सम्मेलन में देशभर से 170 से ज्यादा विभिन्न राज्यों के कम्युनिटी मेडिसिन के चिकित्सकों ने भाग लिया।
यहां डाॅ. अतुल ने रेबीज जैसी बीमारियों को जड़ से खत्म करने और इसको रोकने पर करीब 30 मिनट व्याख्यान दिया। इसके बाद दूसरे वक्ता राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र से तंजिन डिकिड ने अपने वक्तव्य दिए। रेबीज समेत नई बीमारियों को रोकने के लिए क्या जरूरी कदम उठा सकते हैं, इस पर बात की। कहा कि पर्यावरण में लगातार हो रहे बदलाव, मानवीय जीवनशैली व आहार में कम गुणवत्ता की चीजों का सेवन करने नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। ऐसा खानपान रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर सकता है। इसे रोकने के लिए बाजारी खानपान से परहेज और पोषण युक्त भोजन का सेवन करने के अलावा व्यायाम आवश्यक है।
चिकित्सा विज्ञान सोसाइटी का एक आभासी दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे वक्ता महामारी नियंत्रक हिमाचल प्रदेश डॉ. उमेश कुमार रहे। उन्होंने बताया कि देश में चार प्रकार की रेबीज वैक्सीन उपलब्ध हैं। कौन सी वैक्सीन किस स्टेज पर लगाना चाहिए। यह जानना बहुत जरूरी है। सोमकोन 2024 के आयोजन सचिव कम्नुटी मेडिसिन विभाग के डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य 2030 तक रैबीज से होने वाले मृत्यु को शून्य पर लाना है। जीटीबी अस्पताल के डॉ. आमिर खान मारूफ ने बताया कि पहले ही अगर जानवरों को टीके लगा दिए जाएं तो रेबीज का खतरा नहीं रहेगा। वहीं, आरएमएल लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि जानवर के काटने के बाद मरीज को कैसे मैनेज किया जा सकता है।
इस सम्मेलन को लेकर वीसी डॉ. अनीता सक्सेना, डाॅ. एसएस लोहचब, डीन डॉ. ध्रुव चौधरी, डीन डॉ. कुलदीप लालड़, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल ने विभाग के सदस्यों को बधाई दी।