खबर का ईपीएस लगाया जाए..........
फ्लैग : शहर के भिवानी स्टैंड व हुडा कांप्लेक्स में पीपीपी मोड से कामर्शियल कांप्लेक्स कम पार्किंग बनाने का मामला, पूर्व विधायक ने फिर सहकारिता मंत्री को घेरा, बोले
हेडिंग : विकास को लेकर मंत्री का ज्ञान कमजोर, तकनीकी शब्दों से नहीं परिचित
: मंत्री ने हाउस में प्रस्ताव से पहले मंत्री ने दी थी पीपीपी मोड में कामर्शियल बिल्डिंग को हरी झंडी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। शहर की भिवानी स्टैंड व हुडा कांप्लैक्स में प्रस्तावित पार्किंग को लेकर सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर व पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा के बीच बयानबाजी जारी है। कांग्रेस के पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा ने एक बार फिर मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा है कि मंत्री का शहर के विकास को लेकर ज्ञान कमजोर है। इस कारण वे जोनिक व कुल अनुमय क्षेत्र जैसे शब्दों से परिचित नहीं हैं। यहीं कारण है कि उन्हें यह भी ज्ञान नहीं कि हाउस में प्रस्ताव आने से पहले 18 अप्रैल 2017 को मंत्री ने अधिकारियों की मीटिंग ली थी, जिसमें पीपीपी मोड और व्यावसायिक इस्तेमाल की योजना को हरी झंडी दी थी। हाउस के अंदर तो केवल कम्यूनिटी सेंटर कम पार्किंग स्थल का प्रस्ताव आया था।
बतरा ने बयान जारी कर कहा है कि शहर के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि मंत्री शहर के विकास व जनहित की बात करने की बजाए बेवजह के बयान देकर मुद्दों को भटकाने का प्रयास करते हैं। ग्रोवर ने पिछले चार साल में शहर के हालात को समझने का एक भी गंभीर प्रयास नहीं किया। यही वजह है कि शहर के विकास को लेकर उनका सामान्य ज्ञान कम है। मंत्री पर आरोप जड़ते हुए कहा है कि बतरा ने कहा कि किसी भी निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जाने वाले एफएआर जोनिक योजना व कुल अनुमय क्षेत्र (टोटल परमिजिबल एरिया) जैसे शब्दों से मंत्री परिचित नहीं हैं। वह यह भी नहीं जानते की किसी निर्माण कार्य में कितना कवर्ड एरिया परमिजिबल होगा। यहीं नहीं निगम की ओर से पास किसी प्रस्ताव का हवाला देकर सहकारिता मंत्री शहर को मल्टी लेवल पार्किंग देने के अपने वादे से मुकर नहीं सकते। यदि निगम द्वारा मल्टी लेवल पार्किंग को पीपीपी मोड बनाने को लेकर किसी प्रकार के प्रस्ताव का जिक्र किया भी गया है तो उसमें कभी भी व्यवसायिक इस्तेमाल का जिक्र नहीं आया और निगम कि मीटिंग में इसका विरोध भी किया गया था। वैसे भी निगम कि मीटिंग का निर्णय सरकार पर बाध्य नहीं होता।
पीपीपी मोड और व्यवसायिक परिसर निर्माण में मंत्री का निजी स्वार्थ
बतरा ने कहा कि सहकारिता मंत्री शहर की जनता को यह बताएं की पार्किंग स्थल को व्यावसायिक इस्तेमाल बनाने की उपज किसके दिमाग की है। यह बात जगजाहिर है कि बीते वर्ष की तारीख 18 अप्रैल 2017 को मंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी की मीटिंग के दौरान पीपीपी मोड और व्यवसायिक स्थल के सेक्शन को पास किया गया। यह शहर की जनता के साथ एक धोखा है। शहर के हालात को देखते हुए किसी प्रकार के कामर्शियल परिसर की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले से ही शहर के मुख्य बाजार मसलन शौरी मार्केट, रेलवे रोड, माल गोदाम रोड, किला रोड पर दुकानें काफी गहन स्थिति में हैं और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था काफी बुरी हालत में है। यानी शहर को पार्किंग स्थल की आवश्यकता है ना कि किसी व्यवसायिक परिसर की। बतरा ने सहकारिता मंत्री से अपील करते हुए कहा कि फिजूल की बयानबाजी की बजाए केवल जनता से किए अपने वादों को पूरा करें। अन्यथा जनता सबक सिखाने के लिए तैयार बैठी है।
मंत्री की तरफ से नहीं आया पक्ष
पूरे मामले में सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। वहीं उनके मीडिया सलाहकार ने भी पक्ष रखने से इनकार कर दिया।