भावी डॉक्टर नकल के लिए कर रहे ‘जासूसी यंत्र’ का प्रयोग
जांच अधिकारी ने परीक्षार्थी का बनाया यूएमसी
संजय कुमार
रोहतक।
सूबे में मानो नकल करना परीक्षार्थियों का जन्मसिद्ध अधिकार बन गया है। यहां बोर्ड परीक्षाओं के साथ प्रोफेशनल कोर्सों की परीक्षाओं में भी जम कर नकल चलती है। हैरानी तो इस बात की है कि धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर भी नकल करने में पीछे नहीं हैं। भावी डॉक्टर अपनी बुद्धि का प्रयोग परीक्षा की तैयारी करने की बजाए जासूसी यंत्र की खोज और उसे अपने शरीर व कपड़ों में छिपाने के लिए करते हैं। ऐसे ही एक मामले का खुलासा पीजीआईएमएस के अंदर चल रही परीक्षा में एक जांच अधिकारी ने किया है।
जांच टीम के सदस्यों ने स्वयं का व छात्र का नाम न छापने की शर्त पर खुलासा करते हुए बताया कि 1986 के पहले सूबे में नकल करने कराने जैसी कोई बात नहीं थी। अब स्थिति बद से बदतर हो गई है। प्रबंधन आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करने में बहुत पीछे है, लेकिन विद्यार्थी हजारों रुपये खर्च कर इन तकनीकों का गलत प्रयोग कर रहे हैं।
हाल ही में चल रही परीक्षाओं में एक जांच टीम ने एक निजी कॉलेज के विद्यार्थी को जासूसी यंत्र की सहायता से नकल करते हुए पकड़ा है और उसका यूएमसी भी बना दिया। टीम ने बताया कि छात्र ने जासूसी यंत्र को इयर कैनाल के अंदर गहराई में डाल रखा था, जोकि बाहर से दिखाई ही नहीं देता। इसके अलावा सिम व अन्य सिस्टम को ब्रांडेड बनियान में इस तरह फिट किया था कि कोई पता ही नहीं कर सकता। मैटल डिटेक्टर की जांच के दौरान आने वाली बीप से अंदेशा यह रहता है कि उसकी आवाज मैटल के बटन, चैन की जिप से भी आ सकती है। इसी अंदेशे में परीक्षार्थी जासूसी यंत्र को परीक्षा केंद्र के अंदर ले कर पहुंच गया। जांच के दौरान पहले तो छात्र ने यंत्र के बारे में बताने से मना किया लेकिन जब ईएनटी सर्जन को बुलाने की बात कही गई तो उसने स्वयं ही कान से निकाल कर दे दिया। इसे देखकर सभी हैरान थे कि अब इस नकल करने की तैयारी को कैसे निपटें। बाद में कई विद्यार्थियों की अब इस हिसाब से भी परीक्षा केंद्र में जांच की जाने लगी है।
जासूसी यंत्र ऑन लाइन शापिंग पर आसानी से होते हैं उपलब्ध
जासूसी यंत्र आन लाइन शापिंग के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। यहां 2000 रुपये से लेकर हजारों रुपये की कीमत में साइज व आकार के हिसाब से उपलब्ध हैं। कंपनियां इन यंत्रों के बारे में उपभोक्ताओं को यह बता कर आगाह कर देती हैं कि यदि इनका कोई प्रयोग जासूसी के लिए करता है तो वह जिम्मेदार नहीं होंगी। लेकिन सच्चाई में इन यंत्रों का गलत प्रयोग हो रहा है। इनकी खरीद के लिए कंपनियां कोई कागजात भी नहीं मांगती।
फोटो सहित एसएनजे छह