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सरकारी स्कूलों में घट रही विद्यार्थियों की संख्या

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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में घट रही विद्यार्थियों की संख्या
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- बेपरवाह शिक्षक व लापरवाह सरकार की उपेक्षा से निजी स्कूल जा रहे विद्यार्थी
विकास सैनी
रोहतक।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में साल दर साल विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। पिछले तीन वर्षों में 1.17 लाख विद्यार्थी कम हुए हैं। बेपरवाह शिक्षकों व लापरवाह सरकार की उपेक्षा के चलते ये विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ कर निजी स्कूल जा रहे हैं। यही हाल रहा तो सरकारी स्कूलों पर ताला लगने में देर नहीं है। ऐसी स्थिति में शिक्षा आम आदमी की पहुुंच से दूर हो जाएगी।

बगैर शिक्षक और सुविधा कैसे पढ़ें विद्यार्थी
सरकारी स्कूलों में व्यवस्था बेहद लचर है। सरकार इसे दुरुस्त करने की ओर से सख्त कदम नहीं उठा पा रही है। हालात ये हैं स्कूलों में न शिक्षक हैं न सुविधाएं। बगैर ड्यूल डेस्क व जर्जर हाल कमरों में विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। प्रदेश के करीब 14 हजार स्कूलों में शिक्षकों के 50 हजार से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं। यही नहीं ज्यादातर स्कूलों में पीने का साफ पानी व शौचालय तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
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210 में से 100 दिन ऑन लाइन डाटा अपडेट कर रहे शिक्षक
सरकार शिक्षकों पर शैक्षणिक कार्य के अतिरिक्त काम उन पर लाद रही है। कभी जनगणना तो कभी स्वास्थ्य कार्यक्रम, कभी चुनावी ड्यूटी तो कभी दूसरे सरकारी कार्यक्रम, ज्यादातर समय शिक्षक ऐसे ही कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस कारण शैक्षणिक कार्य बेहतर ढंग से नहीं हो रहा है। व्यवस्था बनाने के नाम पर भी महम खानापूर्ति ही की जा रही है। सरकार की ऑन लाइन पेपर चैक की योजना ने पहले से ओवरलोड शिक्षकों को और व्यस्त कर दिया है। वर्ष के 365 में से करीब 210 विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के 100 दिन ऑन लाइन डाटा अपडेट करने में जा रहे हैं। मंथली असेसमेंट टेस्ट (मैथ) योजना के तहत शिक्षकों को एक सप्ताह विद्यार्थियों का टैस्ट लेना होता है। जबकि दूसरा सप्ताह यह डाटा ऑन लाइन अपडेट करने में खर्च करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए सिलेबल पूरा करना मुश्किल हो जाता है।

निजी स्कूलों में एसी की हवा, बस की भी सुविधा
सरकारी व्यवस्था के उलट निजी स्कूल विद्यार्थियों को उनकी सहूलियत के लिए हर सुविधा मुहैया करा रहे हैं। इसमें मेहनती शिक्षकों के साथ स्मार्ट क्लास रूम, पढ़ने का बेहतर माहौल, पेयजल, शौचालय, बिजली, डेस्क, एसी की ठंडी हवा, बस सुविधा समेत हर मूलभूत सुविधा उनके लिए उपलब्ध हैं। परीक्षा परिणाम भी बेहतर आता है। यही वजह है कि विद्यार्थी सरकारी स्कूलों का मिड डे मील, दूध, किताबें, वर्दी, साइकिल सबका मोह त्याग कर निजी स्कूल जा रहे हैं।

वर्जन :
सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सरकार की इच्छाशक्ति पर निर्भर है। वर्ष 1990 तक सब ठीक था। इसके बाद सरकार ने किसी भी तरह की सेवा पर यूजर चार्ज लगा दिया। पिछले डेढ़ दशक में शिक्षा के नाम पर खेल चल रहा है। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। सुविधाओं की कमी है। प्रदेश में 50 हजार व देश में 18 लाख शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। शिक्षकों को पहले टेस्ट लेना होता है, फिर डाटा ऑन लाइन करना होता है। इस कारण 210 दिन होने वाली पढ़ाई मुश्किल से 110 दिन ही हो पाती है। शिक्षक अपने स्तर पर स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
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-वजीर सिंह, प्रांतीय प्रवक्ता, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ।

वर्जन :
स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम है। इसे सुधारने की जरूरत है। इसके लिए नकल पर रोक के अलावा हरियाणा बोर्ड को सीबीएसई के मुकाबले बेहतर बनाने की जरूरत है। सीबीएसई का अंग्रेजी माध्यम हरियाणा बोर्ड पर भारी पड़ रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देकर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
-दिलबाग अहलावत, वरिष्ठ उपप्रधान, हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ।

प्रदेश के स्कूलों में पिछले तीन वर्षों की कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों की संख्या का ब्यौरा
जिला 2015-16 2016-17 2017-18
अंबाला 84322 81587 79010
भिवानी 150482 141382 138496
फरीदाबाद 104533 99592 99575
फतेहाबाद 104533 101669 101423
गुड़गांव 116061 113830 114009
हिसार 153651 147145 142162
झज्जर 61212 58257 57034
जींद 129346 123915 120449
कैथल 113799 109295 107967
करनाल 127962 124234 121689
कुरुक्षेत्र 89769 84850 83193
महेंद्रगढ़ 72330 66283 64789
मेवात (नूह) 174188 170349 174889
पलवल 113220 104202 103734
पंचकूला 54849 54368 56068
पानीपत 89559 88603 90536
रेवाड़ी 71792 67350 64602
रोहतक 70480 65764 63831
सिरसा 143124 137922 137289
सोनीपत 114046 108651 107413
यमुनानगर 97301 93665 92351
कुल 2237873 2142913 2120509
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