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200 से अधिक निजी अस्पतला और जांच केंद्रों ने किया विरोध प्रदर्शन

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200 से अधिक निजी अस्पताल और जांच केंद्रों ने किया विरोध प्रदर्शन
- सीईए के विरोध के लिए हमारी डू एंड डाई की स्थिति : आईएमए
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट (सीईए) के विरोध में शुक्रवार को जिले में 200 से अधिक निजी अस्पताल और जांच केंद्रों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की।
हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी के अलावा आपात सेवाएं भी ठप रखीं। हालांकि, पहले से दाखिल मरीजों को नियमित उपचार जरूर दिया गया है। हड़ताली डॉक्टरों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार अपने अड़ियल रवैये को सही नहीं करती तो वह अनिश्चित हड़ताल करने के साथ बड़ा आंदोलन कर सकते हैं। वह एमपी, एमएलए के अलावा मंत्रियों के आवास का घेराव करने के अलावा कानूनी लड़ाई लडे़ंगे।
जिला सचिव डॉ. सुनील मुंझाल ने कहा कि सीईए के विरोध में 24 घंटे की हड़ताल की गई है। आईएमए हाउस में जिले के सभी डॉक्टरों ने बैठक कर एक्ट का विरोध किया। इसमें डॉ. एसएल वर्मा, डॉ. आरके चौधरी, डॉ. देवेंद्र सांगवान, डॉ. हरी ओम मनचंदा, डॉ. दिनेश खोसला, डॉ. सतीश चुघ ने एक्ट का विरोध करते हुए सरकार का विरोध जताया।
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पत्रकारों से बातचीत के दौरन डॉक्टरों ने बताया कि उन पर पहले ही 200 से अधिक एक्ट लागू होते हैं। अब नया एक्ट यदि लागू होता है तो छोटे व मध्यम दर्जे के अस्पताल बंद ही हो जाएंगे। सरकार बडे़ व्यवसायिक अस्पतालों को बढ़ावा देना चाहती है, इसमें आम जनता के लिए उपचार पाना असंभव होगा। वह छोटे क्लीनिकों में फैमिली डॉक्टरों के रूप में कार्य करते हैं। यदि उनका क्लीनिक बंद होता है तो सभी को दिल्ली और गुरुग्राम में ही उपचार कराना होगा। सरकार जो एक्ट लागू करने की बात कर रही है वह काला कानून है। यह एक्ट देश के चार राज्यों में ही लागू है, हाल ही में इसका कर्नाटक में काफी विरोध हुआ था।
चिकित्सकों ने बताया कि यह कानून यूपीए टू ने 2010 में तैयार किया था। इसका उस समय भी विरोध हुआ था, इस पर प्रदेश में हुड्डा सरकार के कार्यकाल में ड्राफ्ट तैयार किया गया था। अब सरकार ने उस ड्राफ्ट को लागू करने की बजाए गुरुग्राम और दिल्ली के निजी अस्पताल के मामलों के बाद पुराने एक्ट को ही लागू करने की तैयारी कर ली है। जबकि इस संबंध में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और हेल्थ सेक्रेटरी के साथ छह-सात बैठक हो चुकी हैं। इसमें कई कानूनों में संशोधन हो गया था, लेकिन इसे फिर भी पुराने नियमानुसार लागू किया जा रहा है। सरकार की इस पालिसी से प्रदेश के अधिकांश निजी अस्पताल बंद हो जाएंगे, जिससे डॉक्टरों के अलावा 70 हजार सामान्य कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे। इस मौके पर डॉ. आदित्य बत्तरा, डॉ. मनीष एरन, डॉ. राजेश जाले, डॉ. पवन शर्मा, डॉ. राखी आदि उपस्थित रहे।

इन नियमों का विरोध
- सड़क दुर्घटना में घायल मरीज को कोई अस्पताल इलाज से मना नहीं कर सकता। उसे मरीज को उपचार देने के अलावा उसके लिए एंबुलेंस तक मुहैया कराना होगा। इसके अलावा उसे अगले अस्पताल तक सही सलामत भेजना भी डॉक्टर की जिम्मेदारी होगी। यदि रास्ते में मरीज को कुछ होता है तो डॉक्टर जिम्मेदार होगा। यदि मरीज के पास धन नहीं है तो उसका उपचार भी नि:शुल्क करना होगा।
- नया अस्पताल शहर में खोलने से पहले प्रशासन से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा। यदि कोई इस पर आपत्ति जताता है तो वह ऐसा नहीं कर पाएगा।
- नये अस्पताल वालों को बेडों की संख्या के हिसाब से पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। इस नियम ने पुराने अस्पतालों की नींद उड़ा दी है। क्योंकि शहर में पार्किंग की समस्या का पहले से ही समाधान नहीं है।
- अस्पताल में मरीज को भर्ती करने से पहले आईसीयू की सुविधा अनिवार्य है। इसमें पर्याप्त स्टाफ, डॉक्टर, इंफ्रास्ट्रकचर और आईसीयू में वीडियोग्राफी की व्यवस्था अनिवार्य है। इस पर डॉक्टरों का कहना है कि एक आईसीयू चलाने के लिए पांच से आठ लाख रुपये खर्च होता है।
- यदि कोई क्लीनिक किसी के नाम पर है तो किसी भी आपात स्थिति में वह उसके पति या पत्नी के नाम उसका पंजीकरण ट्रांसफर नहीं होगा। इसके लिए संबंधित डॉक्टर को नया पंजीकरण कराना होगा।
- अस्पताल को अपनी ओपीडी के बारे में अपने डॉक्टरों की नेम प्लेट लगानी होगी। इसके अलावा आपरेशन का खर्च डिस्प्ले करना होगा।
- नॉन मेडिको पर्सन डॉक्टर की जांच करेगा और उसे सर्टिफिकेट देगा। इसमें प्रशासन के अलावा पुलिस को शामिल किया जा रहा है, जिन्हें चिकित्सा की एबीसी भी नहीं पता होगी।
- अस्पतालों को चार लेवल पर बांटा गया है।
- 1 से 10 बेड पर एक मेडिसन, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक बाल रोग विशेषज्ञ जरूरी
- 11 से 20 बेड पर एक मेडिसन, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा एक सर्जरी, एक ऑर्थो, एक ईएनटी विशेषज्ञ के अलावा ऑपरेशन थियेटर व आईसीयू अनिवार्य
- 21 से 50 बेड वाले अस्पताल सुपर स्पेश्यलिटी में होंगे, इसमें सभी सुपर स्पेश्यलिटी के डॉक्टर होना अनिवार्य होगा। इसमें नेफ्रोलॉजिस्ट, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डिक सर्जन आदि का होना अनिवार्य होगा।
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- 51 से अधिक बेड वाले अस्पताल टरसरी केयर सेंटर की तरह कार्य करेंगे।


हड़ताल ने बढ़ाया पीजीआईएमएस का वर्क लोड
रोहतक (ब्यूरो)। क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट के चलते शुक्रवार को निजी अस्पतालों की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल ने पीजीआईएमएस का वर्क लोड बढ़ा दिया। ओपीडी में सुबह से दोपहर तक सामान्य दिनों की अपेक्षा पांच फीसदी अतिरिक्त मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे। वहीं जिला अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनके यहां की ओपीडी सामान्य रही। हालांकि, उन्होेंने निजी अस्पतालों की हड़ताल को देखते हुए अपने स्टाफ तथा डॉक्टरों को पहले ही अलर्ट किया हुआ था। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो निजी अस्पताल में सीरियस मरीज कम ही जाते हैं, रूटीन के मरीज अगले दिन जांच करवाने के लिए स्वयं को तैयार कर लेते हैं। पीजीआईएमएस के कुल सचिव डॉ. एचके अग्रवाल के अनुसार उनके यहां आपात विभाग में आने वाले मरीजों की संख्या और ओपीडी के मरीजों की संख्या प्रतिदिन सात से दस हजार की होती है। इसमें 500 से 700 मरीजों के कम अधिक होने से अधिक फर्क नहीं पड़ता। जो मरीज पीजीआई में आता है उसको उपचार दिया जाता है। आईएमए की हड़ताल से संस्थान को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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