इमरजेंसी में जीवनरक्षक दवाएं मिलना बंद
- तीन लाख रुपये का बकाया पेमेंट न मिलने से रुकी सप्लाई
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के आपात कालीन विभाग में रविवार को अल सुबह से मरीजों को जीवन रक्षक दवाओं का मिलना बंद हो गया। यहां डॉक्टरों ने मरीजों को निडिल और एनएस बाजार से लाने के लिए पर्ची पकड़ानी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि संस्थान में निडिल और एनएस की उपलब्धता न होने की वजह दवा सप्लाई करने वाले की तीन लाख रुपये की पेमेंट रोका जाना है। इसके चलते गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों के परिजनों को स्वयं इन चीजों का प्रबंध करना पड़ रहा है। हैरानी तो इस बात की है कि संस्थान का सालाना बजट तकरीबन 400 करोड़ रुपये है।
आपातकालीन विभाग में प्रतिदिन 24 घंटे के अंदर 1500 से 1700 मरीजों की संख्या उपचार के लिए आती है। इसमें से तकरीबन 600 गंभीर अवस्था में होते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल उपचार के दौरान दर्द के लिए इंजेक्शन और अत्यधिक रक्तस्त्राव के कारण होने वाली समस्या से बचने के लिए नार्मल स्लाइन (एनएस) की यूनिट चढ़ाई जाती है। हैरानी की बात है कि दर्द का इंजेक्शन देने व जांच का सैंपल लेने के लिए निडिल तथा एनएस दोनों ही विभाग में उपलब्ध नहीं है। सूत्रों की मानें तो यदि दवा सप्लायर की पेमेंट नहीं की जाती तो विभाग में मौजूद अन्य दवाओं की उपलब्धता पर भी संकट शुरू हो जाएगा। वहीं संस्थान में डेंगू के मरीजों को भी प्लेटलेट्स कम होने व अन्य कारणों पर एनएस चढ़ाई जाती है। अब परिजनों को इन दोनों चीजों के लिए संस्थान के व्यवसायिक केंद्र तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
क्या है नार्मल स्लाइन
नार्मल स्लाइन पानी और नमक का मिश्रण होता है। यह शरीर में नमक और पानी की कमी को दूर करने के अलावा रक्तचाप को सामान्य करने के लिए प्रयोग में आता है। इसके साथ ही जिन मरीजों को अत्यधिक रक्त बह जाता है, उनके लिए रक्त उपलब्ध होने तक इसका प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसका प्रयोग शुगर व अन्य कई मरीजों में प्रयोग होता है।
आपात विभाग के लिए दवाओं की खरीद पर चलता है विवाद
आपात कालीन विभाग में लोकल दवाओं की खरीद अकसर विवादों में रहती है। पूर्व में भी दवाओं की खरीद मामले में एक जांच की गई थी। इसमें सवाल उठाया गया था कि दवाओं को बाजार भाव की तुलना में महंगा खरीदा गया। इसके बाद नये सिरे से दवाओं की खरीद शुरू की गई। सूत्रों की मानें तो अब वर्तमान में फिर आपात विभाग की लोकल दवाओं की खरीद पर सवाल उठे हैं। इसके चलते पेमेंट रोक दी गई है और दवाएं आनी फिर बंद हो गई हैं। यहां प्रशासन पर सवाल उठ रहा है कि बगैर मरीजों की दवा का इंतजाम किए दवा की सप्लाई करने वाली कंपनी का पेमेंट क्यों रोका गया है।
संस्थान में भी बनता है नार्मल स्लाइन
पीजीआईएमएस स्वयं नार्मल स्लाइन का निर्माण करता है और अपनी जरूरतों को पूरा करने के बाहर से भी खरीदता है। सूत्रों की मानें तो संस्थान में प्रतिदिन 1500 नार्मल स्लाइन तैयार होती है और इसमें से अकेले आपात कालीन विभाग में रोजाना 500 के करीब प्रयोग हो जाती है। इसके अलावा वार्डों में भेज दिया जाता है। संस्थान की रोजाना जरूरतों को पूरा करने के लिए बाहर से खरीद की जाती है।
मरीज करती रही खून की उल्टी, नहीं ली डॉक्टरों ने सुध
रेवाड़ी से आपातकालीन विभाग में अपनी मां राजकुमारी का उपचार कराने आई शालू यादव को एमएस को शिकायत करने के बदले फटकार मिली है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी मां लगातार खून की उल्टी कर रही थी और डॉक्टर उसे देख तक नहीं रहे थे। उसे बार-बार कभी नौ नंबर वार्ड में भेजा जा रहा था तो कभी कमरा नंबर छह में। उसने तंग आकर एमएस को फोन पर शिकायत की थी, लेकिन वहां भी उसे झाड़ पिला दी गई।
शालू ने चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत आपातकालीन विभाग के सीएमओ को दी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह 17 नवंबर को शाम आपात विभाग में आए। उसके मरीज को लगातार खून की उल्टी हो रही थी। वह स्ट्रेचर पर थी, लेकिन दो घंटे तक किसी डॉक्टर ने उसकी जांच नहीं की। जब डॉक्टर ने देखा तो कहा कि वह इस हालत में दाखिल नहीं करते। बगैर दवा शुरू किए उनकी छुट्टी करने को कह दिया गया। जब उसने इसका विरोध किया तो ट्रीटमेंट शुरू किया और कुछ समय बाद फिर छुट्टी कर दी। मरीज के शरीर में चार एचबी खून था। एक बार वह बेहोश हो गई और उसने सांस छोड़ दी तो उसे वार्ड नौ में भेज दिया गया। जब वह वार्ड नौ में गई तो उसे फिर आपात विभाग के कमरा नंबर छह में भेज दिया गया। रात को उसे इन दो जगहों के बीच छह बार चक्कर कटवा दिए गए। छह नंबर कमरे में डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मरीज डॉ. राजपूत की यूनिट की है, इसलिए वह नहीं देखेंगे। यदि उन्हें मरीज दिखाना है तो वह नया कार्ड बनवा कर आएं। हैरानी इस बात की थी कि रात को वार्ड में डॉक्टर नहीं थे और आपात विभाग में मरीज की डॉक्टरों ने जांच नहीं की। जब उसने इसकी शिकायत फोन पर एमएस को की तो उन्होंने उल्टा उसको ही झाड़ पिला दी। जब सीएमओ को लिखित शिकायत दी तो डॉक्टरों ने मरीज की जांच की और जब वह आए तो उसके साथ अभद्रता से पेश आए और उसकी भाभी को धक्का मारा। उसे कहा गया कि वह चुप रहे और पीछे खड़ी हो जाए। मरीज की हालत खराब होने के चलते वह संस्थान के ही रैन बसेरा में रुकी है।
बोले अधिकारी
मैं अभी आउट ऑफ स्टेशन हूं। आपातकालीन विभाग में नीडल और एनएस की अनुपलब्धता की जानकारी नहीं है। इसके लिए डीएमएस से बात करेंगे। जल्द ही समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।
- डॉ. ध्रुव चौधरी, प्रोफेसर इंचार्ज, आपातकालीन विभाग, पीजीआईएमएस
रात को युवती का फोन आया था, वह शिकायत कर रही थी। उसे फोन पर सिर्फ यही कहा था कि उसने मौके पर उपस्थित अधिकारी को अपनी समस्या बताई है या नहीं। लेकिन इससे पहले युवती ने ही फोन काट दिया। आपातकालीन विभाग में सीएमओ, डीएमएस, प्रोफेसर इंचार्ज की जिम्मेदारी बनती है। यदि इनके स्तर पर काम नहीं हो रहा है तो वह शिकायत पर कार्रवाई करने को तैयार हैं। इसके अलावा नार्मल स्लाइन की समस्या का एक दो दिन में समाधान हो जाएगा। संस्थान में इसकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
- डॉ. नित्यानंद, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस
लोकल पर्चेज के माध्यम से आपातकालीन विभाग में जरूरी दवाओं को मंगाया जाता था। किन्हीं कारणों के चलते दवाओं की पेमेंट नहीं हो पाई है। इसके चलते नीडल और एनएस का अभाव हुआ है। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारी को दे दी गई है, जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ. संदीप, डीएमएस, आपात कालीन विभाग, पीजीआईएमएस