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पार्षदों का आरोप : कमाई के चक् कर में जल्दी छोड़े जा रहे हैं टैंडर

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मर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी। नगर परिषद चुनाव में करीब आठ महीने का ही समय रह गया है। ऐसे में पिछले कई सालों से भ्रष्टाचार के आरोपों की हुईं जांच और सत्ता पलट के बाद अब फिर से आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। इस बार मामला नगर परिषद के खाते में जमा 35 करोड़ रुपयों का। कुछ पार्षदों ने हाल में शहर में विकास कार्यों के लिए छोड़े गए टेंडर को दिखावा करार देते हुए अधिकारियों की मदद से कमीशनबाजी का आरोप लगाया है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को कमाई की तैयारी करार दिया है। इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि ई-टेंडरिंग निष्पक्ष तरीके से हो रही है।

एक ही काम बार-बार करा गाढ़ी कमाई हड़पने की तैयारी

नगर परिषद उप प्रधान पवन बठला, पार्षद इतेंद्रपाल यादव आदि ने आरोप लगाया कि नगर परिषद के खाते में जमा 35 करोड़ रुपए को आठ महीने से पहले ही खाने की तैयारी हो रही है। इसमें अधिकारियों की मदद भी ली जा रही है। अधिकारियों को भी राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। ऐसे में कमीशनबाजी का खेल बेखौफ खेला जा रहा है। यह सारी प्रक्रिया जनता की गाढ़ी कमाई को हड़पने की तैयारी के लिए है।
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छह माह पहले बदलीं प्रधान, आज भी वही हाल
पार्षदों का यह भी आरोप है कि अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते विकास कार्यों के लिए होने वाली ई-टेंडरिंग के विज्ञापन गुपचुप ढंग से लोकल अखबारों में देखकर खानापूर्ति की जाती है। इससे साफ है कि परिषद में भ्रष्टाचार चरम पर है। शहर में रुके कार्यों के कारण ही करीब छह माह पूर्व पार्षदों ने चेयरपर्सन बदलने का निर्णय लिया था। इस निर्णय का उद्देश्य विकास कार्यों को गति देना था। लेकिन, आज भी हालात पुराने जैसे ही हैं।

कु छ पार्षद लड़ रहे निजी स्वार्थों की लड़ाई
इस संबंध में नगर परिषद के पूर्व प्रधान शकुंतला भांडोरिया का कहना है कि उन्हें भ्रष्ट बताने वाले पहले ये बताएं कि आखिर अब भ्रष्टाचार के मामले सामने क्यों आ रहे हैं। कुछ पार्षद निजी स्वार्थों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका शहर के विकास से कोई लेना-देना नहीं है। यही कारण है कि परिषद की बैठक में कभी निंदा प्रस्ताव तो कभी अविश्वास प्रस्ताव लाकर समय खराब किया जा रहा है।
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विकास कार्यों के लिए होने वाली ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी ईमानदारी के साथ निष्पक्ष तरीके से हो रही है। कम आवेदन आने पर ई-टेंडरिंग कराई ही नहीं जाती। अधिकारियों पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं।
-मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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