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पीजीआई में हड़ताली डॉक्टरों को मनाने पहुंचे अधिकारी, नहीं माने

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रोहतक। पीजीआईएमएस में चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को समाप्त करने का प्रयास रविवार को संस्थान के सीनियर डॉक्टरों की कमेटी के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने भी किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। हड़ताली डॉक्टर मामले में आरोपी डॉ. गीता गठवाला की गिरफ्तारी, डॉ. ओंकार के परिजनों के लिए मुआवजे की राशि सहित अन्य मांगों पर अडे़ रहे। वहीं इस घटनाक्रम पर सरकार की लगातार नजर बनी हुई है।
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संस्थान की ओर से गठित जांच कमेटी, एसडीएम राकेश कुमार व डीएसपी नारायण चंद मौके पर पहुंचे और हड़ताली डॉक्टरों को मनाने का प्रयास किया। यहां डॉक्टरों ने पहले वाली ही मांगों को दोहराया। इस पर कमेटी व प्रशासन ने समझाया कि उनकी मांगें नियमानुसार पूरी हो जाएंगी, लेकिन रेजिडेंस डॉक्टर अड़े रहे। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने अपने एचसीएमएस के डॉक्टरों को हड़ताल में शामिल न होने की हिदायत भी जारी कर दी है। सरकार ने पीजीआईएमएस प्रशासन को भी कहा कि वह हड़ताल का निपटारा कराएं। रविवार को भी हड़ताल समाप्त करवाने को लेकर बैठकों का दौर जारी रहा।
अप्रिय घटना के लिए हड़ताली होंगे जिम्मेदार
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के बाद पीजीआईएमएस प्रशासन भी लगातार हड़ताली डॉक्टरों पर शिकंजा कसता जा रहा है। सिविल सर्जन की ओर से जारी निर्देशों के बाद रजिस्ट्रार ने भी अपने रेजिडेंट डॉक्टरों को नोटिस जारी कर निर्देश दे दिया कि वह हड़ताल बंद कर दें। यदि उनकी हड़ताल के दौरान किसी मरीज के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो वह जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा प्रशासन ने सभी सीनियर डॉक्टरों को कहा कि वह अपने विभाग के पीजी छात्र-छात्राओं को हड़ताल से वापस बुलाएं। इस पर कुछ सीनियर डॉक्टरों ने भी अपने पीजी विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से हड़ताल से वापस आने को कहा है।
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चार-पांच डॉक्टर लौटे विभाग में, एचसीएमएस वालों की मांगी डिटेल
हड़ताल में शामिल चार-पांच रेजिडेंट डॉक्टर ने तो अपने विभागों में वापसी कर ली है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अपने एचसीएमएस के डॉक्टरों की डिटेल संस्थान से मांगी है कि कौन हड़ताल में शामिल है।
पीजीआईएमएस में हड़ताली रेजिडेंट डॉक्टरों से बातचीत करने के लिए शाम को जिला प्रशासन का दल एसडीएम की अगुवाई में विजय पार्क पहुंचा। उन्होंने हड़ताली डॉक्टरों को बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी जायज मांगों को मान लिया है। उसके बाद भी हड़ताल करना गैरकानूनी है। मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए शाम सात बजे निदेशक, सीनियर फैकल्टी की कमेटी जिला प्रशासन के साथ हड़ताली डॉक्टरों से बातचीत करने उनके पास गई। यहां सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई व उनके सभी सवालों का विस्तार से जवाब दिया गया। हड़ताल में शामिल कुछ ने तो ड्यूटी ज्वाइन कर ली है और कुछ ज्वाइन करना चाहते हैं, लेकिन कुछ छात्र यूनियन के नेता डॉक्टरों को बरगलाकर हड़ताल को आगे बढ़ाना चाह रहे हैं। इस पर कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने अपील की है कि सभी मांगों पर उचित कार्रवाई होगी, वह मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए तुरंत प्रभाव से हड़ताल खत्म करें।
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- डॉ. वरूण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी
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