संापला। कस्बे के इस्माइला गांव में बंदर व कुत्तों का आंतक बढ़ता जा रहा है। आए दिन लोगों को काटने के मामले आ रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। वहीं, बंदर व कुत्तों के काटने के बाद लोगों को सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज के इंजेक्शन तक नहीं मिल रहे। इस कारण उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में जाकर महंगे दामों पर इलाज करना पड़ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले एक महीने मं इस्माइला में बंदर और कुत्तों के काटने के 42 मामले सामने आ चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को 90 वर्षीय दरिया, 40 वर्षीय दर्शना देवी और 26 वर्षीय विकास को बंदरों ने काट लिया। इसके अलावा सोमवार को महिमा और सीमा रानी को अपना शिकार बनाया। वहीं अमर, रेणु, दुष्यंत, सीमा, फूलवती ने बताया कि कुत्तों और बंदरों के काटने के बाद वे दहशत में हैं। अब वे घरों से निकलने में भी डर रहे हैं।
फूलवती ने बताया कि वह आंगन में आराम कर रही थी। इसी दौरान एक बंदर आया और हाथ पर काट लिया। जीवनी ने बताया कि वह खाना बना रही थी। तभी अचानक पीछे से बंदर आए और रोटी उठने के चक्कर में उसे काट लिया। सीमा का कहना है कि वह छत पर कपड़े सूखा रही थी कि बंदरों ने झुंड ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीण हरिओम, संजय पडिंत, राजेश कुमार, राजा प्रधान आदि ने बताया कि गांव में बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब छुट्टियों में बच्चे घरों में रहते हैं, लेकिन बंदरों व कुत्तों के डर घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। वे किसी भी समय बाहर खेलने तक नहीं जा पा रहे। इसके अलावा अगर घर के दरवाजे खुले रह जाएं तो वे सामान तक उठा ले जाते हैं, साथी ही तोड़फोड़ भी करते हैं। इस बारे में उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर प्रशासन तक से बंदर व कुत्तों को पकड़ने की गुहार लगाई है।
इस बारे में इस्माइला 11बी की सरंपच संतोष देवी का कहना है कि बंदरों से ग्रामीण बहुत परेशान हैं। ये किसी ने किसी को हर रोज काट रहे हैं। पंचायत इन्हें पकड़वाने के लिए जल्द ही डीसी से मिलेगी।
इस्माइला प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि बंदर व कुत्ते काटने के हर रोज दो तीन केस आ रहे हैं। सरकार की ओर से बीपीएल को छोड़कर अन्य को प्रति इंजेक्शन की 100 रुपये फीस देनी होगी। एक महीने के अंदर अब तक 42 लोग इलाज के लिए आ चुके हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वालों की संख्या अलग है। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि बंदर व कुत्ते के काटने के तुरंत बाद इलाज में लापरवाही न बरतें। इसके अलावा इन बातों का भी ध्यान रखें।
- बंदरों से आंख न मिलाएं
-बंदरियों और उसके बच्चे के बीच से न निकलें
- बंदरों को देखकर न भागे।
- घायल बंदर के पास न जाएं
- बंदरों ने मारने की बजाया डंडेे जमीन में पटकें ताकि वे घर व अंागन से बाहर निकल जाएं।