फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव : कोसली ने तोड़ा हुड्डा का गढ़, शहर व कलानौर ने दिया साथ

विज्ञापन
विज्ञापन
रोहतक। प्रदेश की सबसे हाट सीट रही रोहतक में आखिरकार हुड्डा परिवार को गढ़ ढह गया। कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा भाजपा द्वारा रचे गए जाट व गैर जाट के चक्रव्यूह से बाहर नहीं आ सके। खुद आंकड़े इस बात के गवाह हैं। अकेले कोसली हलके ने कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा को महम, बेरी, बादली व झज्जर से मिली कुल लीड से ज्यादा बढ़त भाजपा प्रत्याशी को दी है। आखिर में रोहतक शहर व कलानौर ने भाजपा को बढ़त देकर जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया। सर्विस वोटर ने निर्णायक मौके पर भाजपा की जीत की इबारत लिख दी। चुनाव परिणाम से एक तरफ जहां भाजपा में जश्न का माहौल है, दूसरी तरफ कांग्रेस कार्यालय में ताला लटका हुआ है। देश में जहां पीएम मोदी के नेतृत्व में शानदार जीत हासिल की है, जबकि प्रदेश में सीएम मनोहर लाल के नेतृत्व में पार्टी को 10 में से 10 सीट मिली हैं। चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई पार्टी अकेले अपने दम पर यह उपलब्धि हासिल करने में कामयाब रही। कांग्रेस की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली रोहतक सीट भी भाजपा ने छीन ली। सीट पर नौ हलकों में से कांग्रेस पांच में जीतकर भी हार गई। जबकि भाजपा चार हलकों व सर्विस वोटर में बढ़त बनाकर जीतने में कामयाब रही।
विज्ञापन


महम : कांग्रेस का वोट बैंक बढ़ा, लीड का अंतर 40 हजार घटा
जिला ही नहीं, प्रदेश की सियासत में महम हलके का अहम स्थान है। 1990 के महम कांड के बाद हलका सियासी के अंदर छाया रहा है। हलके से कांग्रेस को 2004 में 40 हजार, 2009 में 68 हजार और 2014 में 61 हजार से ज्यादा वोट मिले और 2019 में हलके से 68 हजार से ज्यादा वोट मिले। भाजपा को पांच साल पहले मोदी लहर के बावजूद हलके से मात्र 11 हजार 384 वोट मिले थे, लेकिन इस बार 54 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं। जबकि इनेलो को 2014 में 38 हजार 709 वोट मिले थे। अबकी बार जजपा व इनेलो को संयुक्त तौर पर मात्र 3 हजार 309 वोट मिले हैं। इससे अनुमान है कि बंटवारे के चलते इनेलो का वोट बैंक भाजपा की तरफ शिफ्ट हो गया है।

गढ़ी सांपला-किलोई : इनेलो-जेजेपी का वोट बैंक भाजपा की तरफ खिसका
2000 से गढ़ी सांपला-किलोई हलका कांग्रेस का सुरक्षित गढ़ बना हुआ है। 19 साल से कांग्रेस न तो लोकसभा और न ही विधानसभा चुनाव में हलके से हारी। 2009 में हलके से कांग्रेस को 87 हजार 908 वोट मिले। जबकि 2014 में 82 हजार 564 वोट मिले। अब 2019 में दीपेंद्र को 92 हजार 606 वोट मिले हैं। बावजूद इसके हलके से भाजपा और कांग्रेस के जीत का अंतर 20 हजार से भी ज्यादा कम हो गया। क्योंकि ग्रामीण बाहुल्य हलके में इनेलो को पिछली बार 19 हजार से ज्यादा वोट मिली थी। अबकी बार इनेलो व जजपा को संयुक्त तौर पर मात्र 4 हजार 202 वोट ही मिल सकी। खास बात यह रही कि भाजपा के पास हलके में कोई बड़ा कद्दावर नेता भी नहीं था। केवल सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ही सांपला तो कभी किलोई एरिया के गांवों जाकर जनसभा या जनसंपर्क करते थे। पिछली बार हलके से भाजपा को मात्र 18 हजार के करीब वोट मिली थी, जबकि अबकी बार 46 हजार से ज्यादा वोट मिला है।
विज्ञापन


रोहतक शहर : कभी हुड्डा को निर्णायक जीत देने वाला शहर पांच साल में बदल गया
2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों को झेलने वाला रोहतक शहर पांच साल में बहुत बदल गया है। ताऊ देवीलाल हो या कैप्टन अभिमन्यु व धनखड़, शहर ने 1991 से 2014 तक हर बार हुड्डा परिवार को लीड दी। 2014 के बाद शहर का मिजाज बदल गया है। पहला तो विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से सीट छीनी। फिर निगम चुनाव में करारी मात दी। पांच साल पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को शहर से 7 हजार की लीड मिली थी, लेकिन इस बार 20 हजार वोटों से मात मिली है। हालांकि सियासी हलकों में भाजपा को शहर से मिली लीड उम्मीद से कम मानी जा रही है। अब आगामी विधानसभा चुनाव में भी शहर को जीतने के लिए भाजपा व कांग्रेस के बीच कड़ी जोर आजमाइश तय है।

कलानौर : सीएम का हलका फिर भाजपा की ओर, इनेलो-जजपा सिमटी
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का पैतृक गांव बनियानी कलानौर हलके में आता है। हलके से कई बार भाजपा प्रत्याशी विधायक बना है, लेकिन पहले कांग्रेसी करतार देवी और अब शकुंतला खटक जीत हासिल करती आ रही है। 2014 में भाजपा विधानसभा चुनाव में जीतने की दहलीज पर आकर हार गई थी। जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हलके ने 33 हजार से ज्यादा की लीड दी थी। अबकी बार बाजी पलट गई। भाजपा को हलके से 4311 की लीड मिली है। वहीं, इनेलो को पिछली बार 18 हजार से ज्यादा वोट मिली थी, लेकिन इस बार जजपा व इनेलो मिलकर 3500 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी।

बहादुरगढ़ : इनेलो-जजपा के गिरे ग्राफ से ज्यादा मजबूत हुई भाजपा
झज्जर जिले के बहादुरगढ़ हलके में शहर के अलावा आसपास के गांव भी आते हैं। इनेलो प्रत्याशी धर्मबीर फौजी हलके के ही रहने वाले हैं। बावजूद इसके हलके में भाजपा पिछली बार की तरह कांग्रेस को मात देने में कामयाब रही। कांग्रेस ने बहादुरगढ़ हलके से लीड लेने के लिए पूरा जोर लगा रखा था, लेकिन कांग्रेसियों के बीच की तनातनी कई बार उभरकर सामने आई। 2014 में भाजपा ने हलके से 3 हजार 528 वोटों की लीड मिली थी, लेकिन इस बार भाजपा ने 5 हजार 630 वोटों की बढ़त लेने में कामयाब रही। इनेलो व जजपा को मिलाकर 5 हजार भी वोट नहीं मिला। जबकि पिछली बार इनेलो प्रत्याशी को 14 हजार से ज्यादा हलके से वोट मिला था।

बादली : धनखड़ के हलके में मात खा गई भाजपा
पांच साल पहले विधानसभा चुनाव में जिस बादली हलके ने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को विधायक बनाया था। साथ ही लोकसभा चुनाव में 38 हजार से ज्यादा वोट दी थी। अबकी बार हलके में भाजपा को 50 हजार से ज्यादा वोट तो मिली, लेकिन दीपेंद्र की लीड 11 हजार से भी ज्यादा रही। मंत्री का हलका होने के बावजूद यह पार्टी के लिए चिंता का विषय है। हलके में इनेलो को 2009 में 16 हजार, 2014 में 10 हजार तो अबकी बार इनेलो व जजपा को संयुक्त तौर पर मात्र 3300 वोट ही मिला है। इससे साफ संकेत हैं कि जो वोट पहले इनेलो को मिलता था, अब अबकी बार भाजपा के खाते में गया है।

झज्जर : पूर्व शिक्षा मंत्री के शहर में 18 हजार कम हो गई कांग्रेस की लीड
हुड्डा सरकार में शिक्षा मंत्री रही गीता भुक्कल झज्जर हलके से विधायक हैं। पांच साल में भाजपा हलके में मजबूत हुई है। यहीं कारण है कि लोकसभा चुनाव में मतगणना के दिन ज्यादातर समय भाजपा कांग्रेस से आगे रही, लेकिन आखिर में कांग्रेस ने भाजपा से 4 हजार 649 वोटों की बढ़त ली। शहर में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा का व्यापक असर रहा था। साथ ही भाजपा मोदी के नाम पर वोट मांग रही थी। बावजूद इसके कांग्रेस की पांच साल पुरानी लीड 22 हजार से ज्यादा की लीड मिली थी।

बेरी : पूर्व स्पीकर रघुबीर कादियान गढ़ बचाने में कामयाब
जाट बाहुल्य बेरी हलके में कांग्रेस ने गढ़ी सांपला-किलोई के बाद दूसरा संतोषजनक प्रदर्शन किया है। यहां से दीपेंद्र हुड्डा ने 25 हजार से ज्यादा वोटों की लीड ली, जबकि पांच साल पहले 27 हजार से ज्यादा लीड थी। साफ है कि जाट बाहुल्य हलके में अबकी बार भी दीपेंद्र को अच्छा समर्थन दिया है। जबकि इनेलो व जजपा को संयुक्त तौर पर हलके से मात्र 2953 वोट मिले हैं। जबकि पांच साल पहले 14 हजार 422 वोट मिले थे। हलके से कांग्रेस राज में विधानसभा अध्यक्ष रहे रघुबीर कादियान अब भी विधायक हैं।

कोसली : उम्मीद से ज्यादा भाजपा को मिले वोट
भाजपा अगर हुड्डा का गढ़ तोड़ने में कामयाब रही है तो सबसे ज्यादा इसका श्रेय कोसली हलके के वोटर को जाता है। क्योंकि हलके ने भाजपा को कांग्रेस की चार हलकों की जोड़कर लीड से भी ज्यादा वोट दी हैं। 2009 में कांग्रेस को कोसली से 60 हजार से ज्यादा वोट मिली थी, लेकिन 2014 में पासा पलट गया। हलके से कांग्रेस को 37 हजार से ज्यादा की लीड मिली थी। 2019 में भाजपा को उम्मीद थी कि 60 हजार करीब लीड मिलेगी, लेकिन हलके ने 74 हजार से ज्यादा लीड देकर सियासी पंडितों को चौंका दिया है।

कांग्रेस को मिलने वाली वोटों से ज्यादा रद्द हो गई सर्विस वोट
रोहतक लोकसभा क्षेत्र में 22 हजार 715 सर्विस वोट हैं। इसमें से 15 हजार 320 वोट वापस भेजी गई। इसमें भाजपा को सबसे ज्यादा वोट मिली हैं। जबकि कांग्रेस को 2700 के करीब सर्विस वोट मिली। जबकि 4423 वोट रद्द हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें