रोहतक। देश में हर साल करीब 65 हजार विद्यार्थी एमबीबीएस की डिग्री पूरी करते हैं। इसके बाद एमडी व एमएस करने के लिए देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में उनके लिए महज 27 हजार के करीब सीट होती हैं। ऐसे में अधिकांश अगली बार सीट मिलने का इंतजार करते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अब तैयारी कर रहा है कि जिन विद्यार्थियों का एमडी व एमएस में चयन नहीं हो पाता, उन्हें डीएनबी डिग्री करने की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराई जाए। ऐसे में एमबीबीएस डॉक्टर का समय खराब होने के अलावा देश की चिकित्सा सेवाओं में इजाफा होगा।
पीजीआईएमएस के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि देश के कुछ निजी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में डीएनबी कोर्स चल रहे हैं। पंचकूला में रेडियोलॉजी में इस कोर्स को शुरू कराने की मान्यता भी मिली है। इसके अलावा प्रदेश में 19 स्थानों पर इस कोर्स को शुरू कराने के लिए आवेदन किया गया है। इसमें से तकरीबन 17 को हरी झंडी मिल चुकी है। डॉ. कालरा ने बताया कि देश के 726 जिलों के जिला अस्पतालों में इस कोर्स को शुरू करने के बाद चार से पांच हजार डीएनबी की सीटें तैयार की जा सकती हैं। इसमें जिला अस्पताल के अलावा रेलवे, सेना, ईएसआई अस्पताल भी शामिल किए जा रहे हैं।
कहां चल रहे कोर्स, बनाई जा रही रिपोर्ट
वीसी ने बताया कि रिपोर्ट तैयार की जा रही है कि देश के कितने अस्पताल में ये कोर्स चल रहे हैं और कहां पर इन्हें चलाया जा सकता है। इन सभी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ शनिवार को एक्सपर्ट की बैठक होगी। वीसी ने बताया कि जिला अस्पताल में डॉक्टर मौजूद होते हैं, इसलिए इसमें अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर व स्टाफ की जरूरत नहीं होगी। यहां प्रति अस्पताल पांच से छह करोड़ रुपये खर्च कर यह सुविधा शुरू की जा सकेगी। इससे जिला अस्पतालों का भी अपग्रेडेशन होगा। यहां एमबीबीएस डॉक्टर मरीजों को उपचार दे सकेंगे और अपने विषय में एक्सपर्ट बन सकेंगे। इस मौके पर डीन अकेडमिक अफेयर एवं निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव, पीजीआईडीएस प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी, कार्डिक सर्जन डॉ. एसएस लोहचब, डॉ. वरुण अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
कोर्स में नियमानुसार मिल सकेगा प्रवेश
वीसी ने बताया कि डीएनबी कोर्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा होगी। परीक्षा भारत सरकार कराएगी। मेरिट के हिसाब से ही सीटों का वितरण होगा। यह निर्णय देश में 52 व हरियाणा में 49 फीसदी एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। इसकी फीस भी सामान्य होगी। डॉक्टर को पूरे कोर्स के दौरान वेतन भी दिया जाएगा।