किसानों ने नोटिस रद्द करवाने के लिए ओटू हेड पर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। घग्गर में 14 साल पहले खेती करने वाले सात गांवों के किसानों ने सिरसा और रानियां तहसील कार्यालय द्वारा आक्युपेशन चार्ज जमा करवाने के नोटिस जारी करने के विरोध में सोमवार को ओटू हेड पर धरना शुरू कर दिया। किसान मक्खन सिंह, विनीत कंबोज, गुरबाज सिंह और देवीलाल ने बताया कि प्रशासन ने सालों बाद ये बकाया राशि के नोटिस भेजे हैं। लेकिन उनकी जमीन तो प्रशासन ने ओटू झील बनाने के नाम पर 2005 में ही छीन ली थी।
किसानों ने कहा कि मंगलवार से शुरू हुआ उनका अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है और जब तक किसानों को नोटिस रद्द नहीं किए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों ने सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के खिलाफ नोटिस भेजने पर रोष भी जताया। किसान एकता मंच के बैनर तले धरना शुरू करते हुए किसान मक्खन सिंह, विनीत कंबोज, सुरजीत सिंह ने मांग कि किसानों को भेजे गए लाखों रुपयों के नोटिस रद्द किए जाएं। धरने पर बैठने वालों में किसान मक्खन सिंह, विनीत कंबोज, गुरबाज सिंह, देवीलाल, सुरेंद्र कुमार, पंकज कुमार, मंगाला, बसवांराम, गुरनाम सिंह, राम सिंह, तेजा सिंह, सुखेदव सिंह, राम किशन, बलवीर सिंह, निक्कू राम, करनैल सिंह, बिहारी लारल, बनखा सिंह, महेंद्र सिंह, गंगा सिंह, दर्शन सिंह, कुलवंत सिंह किसान धरने पर बैठे।
ये है मामला
सिरसा और रानियां तहसील कार्यालय से चक साहिबां, चकराईया, ओटू, नानकपुर, बूथगढ़, धनूर और चकजींवा सहित सात गांवों के 300 से ज्यादा किसान परिवारों को बकाया जमा करवाने के नोटिस जारी किए गए। प्रत्येक गांव में 50 से 60 ऐसे परिवार हैं जो कभी घग्गर में बनने वाली ओटू झील की जमीन में खेती करते थे। किसानों को दो लाख रुपये से ज्यादा बकाया के नोटिस भेजे गए हैं। किसानों ने बताया कि 1970 में यह जमीन उन्हें सालाना पट्टे पर दी गई थी। किसान हर साल अपना सालाना पट्टा राशि जमा करवाते रहे। वर्ष 1999 तक करीब दो हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना राशि जमा भी करवाई। इनेलो सरकार में इस जमीन पर ओटू झील बनाने की घोषणा हुई। लेकिन कांग्रेस सरकार में झील की खुदाई का काम शुरू हो गया। टूरिज्म प्वाइंट के नाम पर किसानों को उजाड़ दिया गया।
कैग ने आब्जेक्शन लगाया तो विभाग ने भेजे नोटिस : डीसी
डीसी प्रभजोत सिंह ने बताया कि यह सिंचाई विभाग की ओर से रिकवरी के लिए नोटिस भिजवाए गए हैं। क्योंकि किसान सालों से घग्गर में पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते थे। कैग ने ऑडिट के दौरान इस पर ऑब्जेक्शन लगा दिया। प्रिंसिपल सेक्रेटरी की ओर से आदेश आए कि इस पैसे की रिकवरी की जाए। अभी तक हमारे पास करीब 45 किसानों की ऐसी सूची आई है जिन्होंने लिखा है कि उनके पास कोई जमीन नहीं है। इसलिए हम इन किसानों की जमाबंदी चेक करवाएंगे कि वास्तव में इनके पास जमीन है या नहीं। उसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।