फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पब्लिक हेल् थ विभाग ने हक मांगने वाले कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो सहित एसएनजे दो
विज्ञापन

सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के कार्यालय में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ित

पब्लिक हेल्थ विभाग ने हक मांगने वाले कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पब्लिक हेल्थ विभाग शहरवासियों के साथ अनुबंध के आधार पर तैनात कर्मचारियों को भी परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। कर्मचारियों ने जैसे ही इंजीनियर इन चीफ के पत्र का हवाला देकर डीसी रेट पर वेतन, पीएफ व ईएसआई की सुविधा मांगी तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके विरोध में बुधवार को कर्मचारी सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के माध्यम से जन स्वास्थ्य मंत्री बनवारी लाल को ज्ञापन देने पहुंचे।
पीड़ित कर्मचारियों ने बताया कि वह डिवीजन नंबर दो में कार्य कर रहे हैं। 2017 के अप्रैल, जून व 2018 में तीन माह का बढ़ा हुआ वेतन नहीं दिया गया है। इस संबंध में वह अभियंता से मिले तो उन्हें बताया गया कि वेतन जा चुका है, वह अपने एसडीई से बात करें। जब एसडीई सुरेश अहलावत से बात की तो उन्होंने जेई विकास के पास भेज दिया। जेई के पास गए तो नौकरी से निकाल दिया गया। जब इसकी शिकायत एसडीई से की तो उन्होंने कहा कि उनकी सेवानिवृत्ति के तीन माह बचे हैं, उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्हें न तो कोई निलंबित कर सकता है और न ही उनका तबादला हो सकता है। मैं अपनी मर्जी का मालिक हूं, तुमने भाजपा को वोट दिया और वोट दे लो। कर्मचारियों ने रोष जताते हुए कहा कि अधिकारी जातिगत सूचक शब्दों का प्रयोग करते हैं। इसकी शिकायत लेकर जब वह लेबर निरीक्षक सुनीता के पास गए और इंजीनियर इन चीफ का पत्र दिखाया तो उस पत्र को ही फर्जी बता दिया गया। वह मजबूरी में अपनी शिकायत मंत्री तक भेज रहे हैं। इस मौके पर प्रदीप, विकास, भूवनेश्वर, मंजीत, राजकुमार आदि उपस्थित रहे। वहीं इस संबंध में जब लेबर निरीक्षक सुनीता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी पत्र को फर्जी नहीं बताया। जब उनके पास शिकायत आई है तो कार्रवाई भी होगी। इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारी से बात की जाएगी। गौरतलब है पब्लिक हेल्थ विभाग के इंजीनियर इन चीफ की ओर से पत्र जारी हुआ है कि सभी कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार वेतन दिया जाए और सुविधाएं दी जाएं। लेकिन विभाग में वेतन के नाम पर लाखों रुपये का हेरफेर हो रहा है। वह अधिकारी के पत्र पर कार्रवाई करने की बजाय आवाज उठाने वालों को बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बोले अधिकारी
किसी को कोई जातिसूचक शब्द नहीं कहा गया है। जो कर्मचारी आरोप लगा रहे हैं वह एक माह से ड्यूटी पर ही नहीं हैं। ऐसे में क्या उनके घर पर जाकर कुछ कहा गया है। कर्मचारियों को ठेकेदार ने हटाया है, इसमें मेरा कोई लेना-देना नहीं है।
- सुरेश अहलावत, एसडीई, पब्लिक हेल्थ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें