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शुक्रवार सुबह गांव सिंहपुरा स्थित नहर के किनारे मिला शव, निंदाना गांव का रहने वाला था मृतक

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फोटो समेत
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सांपला। मनुष्य की हत्या का पाप जीव को अनेक योनियों में भोगना पड़ता है लेकिन गोवध का पाप मनुष्य की हत्या से भी अधिक होता है। राजनीति और तमाम बहसों से इतर सर्वविदित तथ्य यह है कि गाय ही नही पूरे गोवंश का हमारे समाज में खास स्थान रहा है। यह बात गांव भैसरू कलां में गो महाभागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन से आईं बाल व्यास आरती भारद्वाज ने कहीं। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन बाबा कालीदास के सौजन्य से गोकुल धाम गो सेवा महातीर्थ झज्जर के निर्माणाधीन पशु अस्पताल के लिए करवाया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन बाल व्यास ने गोमाता के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा के यजमान योगेश शास्त्री ने गांव की ओर से सभी का स्वागत किया।
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सात दिन की बछिया बनी है कथा का केंद्र
कथा के शुरू से लेकर कथा विश्राम तक व्यास पीठ के सामने एक छह सात दिन की बछिया बैठी रही। सभी श्रोताओं को बछिया के बारे में उत्सुकता बनी रही। कथा के शुरू होते ही बछिया अपने आप ही कथा के मंडप में आकर बैठ गई और पूरी कथा के दौरान अपने स्थान पर आराम से बैठी रही और कथा विश्राम के बाद ही वहां से हट गई। इस छोटी बछिया को गाय जन्म देते समय मर गई बताई है।
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फोटो कैप्शन: भैसरू कलां में श्रोताओं को कथा सुनाती बाल व्यास आरती भारद्वाज।
व्यास पीठ के ठीक सामने बैठी छोटी गोवंश।
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