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बॉक्सिंग हॉल में लहराते स्लोगन दे रहे बेटियों के सशक्तिकरण का संदेश

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बॉक्सिंग हॉल में लहराते स्लोगन दे रहे बेटियों के सशक्तीकरण का संदेश
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- साई बॉक्सिंग एकेडमी के हॉल में बीएफआई ने टंगवाए बड़े-बड़े बैनर बने आकर्षण का केंद्र
- हर बैनर पर छपा स्लोगन दे रहा बेटियों को सशक्त बनने का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
यहां दुपट्टा नहीं, सिर्फ पंच लहराते हैं। लड़कियां भी रिंग पसंद करती हैं, मगर स्कवेयर शेप। लड़कियां दिल नहीं, जबड़े भी तोड़ती हैं। ये स्लोगन बेटियों की मजबूत और सशक्तीकरण की कहानी कह रहे हैं। यकीन ना हो तो इनके पंच के सामने दो मिनट टिक कर इनकी ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। राजीव गांधी खेल परिसर के बॉक्सिंग हॉल में ऊपर लहराते स्लोगन और नीचे रिंग में बरसते घूंसे भी कुछ यही बयां कर रहे हैं।
दरअसल, देश में बॉक्सिंग को प्रोत्साहन देने के लिए बीएफआई (बॉक्सिंग फैडरेशन ऑफ इंडिया) पुरजोर प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने राजीव गांधी खेल परिसर में देश की पहली बॉक्सिंग एकेडमी शुरू की है। शनिवार को यहां दूसरी एलाइट वुमेन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप का शुभारंभ हुआ है। यहां देश भर के मंझे हुए बॉक्सर चैंपियनशिप में शामिल हो रहे हैं। यहीं कॉमनवेल्थ व एशियन खेलों के लिए देश की बॉक्सिंग टीम के खिलाड़ियों का रास्ता तय होना है। चैंपियनशिप के विजेता इंडियन टीम के कैंप में शामिल होंगे। यहीं टीम का चयन होगा। इसके चलते यहां देश भर से 35 टीमों में 258 बॉक्सर आ रहे हैं। इनके साथ टीम के मैनेजर, कोच व अन्य लोग भी हैं।
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बीएफआई ने इस अवसर को पूरी तरह भुनाते हुए बॉक्सिंग व बेटियों को प्रोत्साहित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इसके चलते बॉक्सिंग हॉल में बड़े-बड़े बैनर लगवाएं गए हैं। इन पर बेटियों को खेलों में हिस्सा लेने व आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने वाले संदेश छपे हैं। बेटियों को सशक्त बनाने वाले ये संदेश चैंपियनशिप के मुकाबले देखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पिछले करीब छह महीने से चैंपिशनशिप की तैयारियों में जुटे बीएफआई की क्रिएटिव टीम ने दो महीने की माथा पच्ची के बाद स्लोगन तैयार किए। बेटियों से जुड़े ये स्लोगन हॉल के अलावा खेल परिसर में भी कई जगह लगाए गए हैं।

कैंप में होगा खिलाड़ियों का चयन
कॉमनवेल्थ व एशियन खेलों के लिए देश की बॉक्सिंग टीम का चयन होना है। इसके लिए देश भर के बॉक्सरों का दमखम आजमाने के लिए बीएफआई ने रोहतक में एलाइट चैंपियनशिप रखी है। यहां कड़े मुकाबलों के बाद जीत कर आने वाले विजेता को इंडियन टीम के कैंप में शामिल किया जाएगा। कैंप में ही कॉमनवेल्थ व एशियन खेलों में जाने वाले खिलाड़ियों का चयन होगा।
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ये हैं मुख्य स्लोगन
- कहीं सुना है पावरफुल मजबूत लड़कियां।
- लड़कियां भी रिंग पसंद करती हैं, मगर स्कवेयर शेप।
- लड़कियों की ताकत सर्वश्रेष्ठ।
- यहां दुपट्टा नहीं, सिर्फ पंच लहराते हैं।
- लड़कियां दिल नहीं, जबड़े भी तोड़ती हैं।

वर्जन :
चैंपिशनशिप को लेकर बीएफआई काफी समय से तैयारी कर रहा था। इसी कड़ी में बॉक्सिंग व बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए स्लोगन लिखने का फैसला लिया गया। इसे डिजाइन करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। फेडरेशन की क्रिएटिव टीम की मदद से बॉक्सिंग हॉल को स्पर्धा के लिए खासतौर पर सजाया गया है।
- सतीश के सरहदी, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर एवं खेल निदेशक, बॉक्सिंग एकेडमी साई।
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