अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जीएसटी के झाम में फंसती कंपनियों ने नया फरमान जारी किया है। वेतन को टुकड़ों में देने वाली कंपनियों ने 1 अक्तूबर से कर्मचारियों से जीएसटी पेड किया बिल मांगा है। कराधान विभाग के इस फरमान से शहर में करीब 25 हजार से अधिक कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। आयकर विभाग के शिकंजे से बचने के लिए कंपनी में काम करने वाले लोग अपने वेतन का भुगतान टुकड़ों में लेते थे। जैसे बेसिक सैलरी, टूर बिल के साथ मेडिकल और अन्य मद में पैसे का भुगतान आदि। कंपनी प्रबंधन से जुड़े लोग कहते हैं कि उन बिलों का भी हम भुगतान चेक से ही करते हैं। आयकर विभाग अब भी कर्मचारियों से कोई हिसाब नहीं पूछ रहा है, मगर विभाग की ओर से कंपनियों की आडिट में कर्मचारियों को अलग-अलग मद में दिए जाने वाले भुगतान का जीएसटी मांगा गया है। यह जीएसटी कंपनी की ओर से बताया जाना है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है कि वह एक अक्तूबर के बाद जो भी बिल जमा करेंगे। उसमें जीएसटी पेड होना चाहिए। शहर की कई कंपनियों के प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों को पत्र जारी किया गया है।
कंपनी व कर्मचारी दोनों मजबूर
कंपनी प्रबंधन से जुड़े लोग कहते हैं कि वह कर्मचारियों को अलग-अलग मद में दिए जाने वाले वेतन के जीएसटी के कुछ हिस्से को देने तक तैयार हैं। मगर वेतन भोगियों को भी तो कुछ हद तक प्रयास करना होगा।
कर्मचारियों को वेतन के रूप में दिए जाने वाले हिस्से के लिए लगने वाले बिल में जीएसटी के भुगतान की बात सामने आई है। जिसके कारण हमने अपने सभी कर्मचारियों को 1 अक्तूबर से जीएसटी पेड बिल लगाने के लिए नोटिस जारी किया है।
राजेश जैन , प्रबंध निदेशक, एलपीएस बोसार्ड, रोहतक।
जोन के सभी कंपनी प्रबंधन को कहा गया है कि जो भी भुगतान प्रक्रिया है उस पर मिलने वाले बिल पर जीएसटी अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति होटल में ठहरता है तो उसे बिल में जीएसटी पेड तो बताना होगा। इस तरह से जीएसटी के दायरे में आने वाले संसाधनों के बिल का भुगतान करने वाली एजेंसी जिम्मेवार होगी।
विजय मोहन जैन, आयुक्त, जीएसटी, रोहतक।