नगर निगम ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चार पार्कों में आउटडोर जिम शुरू जरूर कर दिए, लेकिन 15 लाख की कीमत वाले जिम में घोटालों की बू आनी शुरू हो गई है।
उनमें 15-15 लाख रुपये खर्च भी किये। लेकिन मानसरोवर पार्क में खोला गया जिम एक दिन भी नहीं चल सका और उसकी मशीनों के पाइप टूट गये। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जिम में लगाई गई मशीनें ठीक नहीं है या नगर निगम के अधिकारी उनको एक भी दिन नहीं संभाल सके।
यह योजना सभी पार्कों में जिम बनाने के लिए तैयार हो गई है, लेकिन इस तरह योजना परवान कैसे चढ़ेगी?
नगर निगम हाउस की दो महीने पहले हुई बैठक में प्रस्ताव पास किया गया था कि शहर के चार पार्कों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आउटडोर जिम बनाये जाएंगे और वह जिम सही रहेंगे तो अन्य सभी पार्कों में इस तरह ही जिम को बनाया जाएगा।
इसका प्रस्ताव पास होते ही टेंडर प्रकाशित करने के लिए शासन को भेज दिया गया और उसपर काम भी शुरू कर दिया गया। इसके लिए एक पार्क में 15 लाख रुपये खर्च किए गए और इस तरह रेवन्यू कॉलोनी, अंबेडकर पार्क, मानसरोवर पार्क, सुभाष पार्क में जिम बनाने के बाद शुरू कर दिए गए थे।
विधायक मनीष ग्रोवर ने शुरू होने से पहले ही इन जिमों की स्थिति को देखा तो डीसी डीके बेहेरा ने पार्कों में जाकर इन जिम का उद्घाटन किया।
इस तरह 15 लाख खर्च करके बनाये गये यह जिम एक दिन भी नहीं चल सके और मानसरोवर पार्क में खोले गये जिम की मशीनों के पाइप टूट गये। मानसरोवर पार्क में दो मशीनों के पाइप टूट गये हैं, जिनमें एक मशीन पर खड़े होकर कसरत की जाती है तो एक मशीन पर बैठक कसरत होती है।
उन मशीनों के पाइप टूटने पर नगर निगम अधिकारियों पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वहां किस तरह की मशीनें लगाई गई है जो एक दिन में टूट गई है। लेकिन जब इन पार्कों के जिम में लगी मशीनों की देखरेख नगर निगम के अधिकारी नहीं कर सके तो वह अन्य सभी पार्कों में देखरेख कैसे कर सकते है?