फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निजी प्रयोगशालाओं में कट रही जेब, संस्थान की सीआरपी किट अंत की ओर

विज्ञापन
विज्ञापन
नोट: खबर में सीआरपी किट कितनी बची हुई थीं, कब मंगाई गई थीं और कब इनकी एक्सपायरी डेट है, इन सबकी जानकारी दें।
विज्ञापन


निजी प्रयोगशालाओं में कट रही जेब, संस्थान की सीआरपी किट अंत की ओर
-डॉक्टरों की लापरवाही के चलते एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच गई सीआरपी किट
-किट का समय पर प्रयोग न होना विभाग को पड़ने वाला है भारी
अमर उजाला एक्सक्लूसिव

सीआरपी जांच का लोगो फोटो सहित एसएनजे तीन
संजय कुमार
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के बाल रोग विभाग में मरीजों की सुविधा के लिए आई सीआरपी किट डॉक्टरों की लापरवाही के चलते एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच गई है। इनका समय पर प्रयोग न होना अब विभाग को ही भारी पड़ने वाला है। तीमारदारों को इस जांच को कराने के लिए निजी प्रयोगशालाओं में आर्थिक बोझ उठाना पड़ा है, जबकि यह सुविधा विभाग में निशुल्क उपलब्ध थी।
सूत्रों की मानें तो बाल रोग विभाग ने बच्चों की सीआरपी जांच के लिए 100 किट मंगवाई थी। इस किट की हर एक किट में 100 जांच की जा सकती है। यहां समस्या यह हुई है कि यह जांच मरीजों की अकसर बाहर से कराई जाती है और स्थिति यह है कि यह किट विभाग में बच गई हैं। अब विभाग इस किट को आपात विभाग में देने की तैयारी कर रहा है, लेकिन वहां भी इसे खपाने के लिए इनकार कर दिया गया है। अब बाल रोग विभाग के लिए मुसीबत हो गई है कि वह जांच किट को किस अकाउंट में दिखाए, क्योंकि यदि किट एक्सपायर हो जाती है तो उसे जवाब देना भारी हो जाएगा। अभी तक विभाग इन किटों को दूसरे विभागों व सेंट्रल स्टोर वापस भेजने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाया है। यदि इसे सेंट्रल स्टोर में भेजा जाता है तो संभव है कि इसका समुचित प्रयोग हो सके।
विज्ञापन

तीन सौ से चार सौ मरीज आते हैं प्रतिदिन
संस्थान में प्रतिदिन 300 से 400 मरीज बाल रोग विभाग में उपचार के लिए आते हैं। इसमें से औसतन 25 से 40 मरीजों की प्रतिदिन यह जांच होती है।

क्या है सीआरपी किट
सीआरपी किट को सी रिएक्टिव प्रोटिन टेस्ट कहा जाता है। यह बाजार में 300 रुपये से 500 रुपये तक होता है, जबकि संस्थान में यह निशुल्क किया जाता है। इस टेस्ट का प्रयोग जोड़ दर्द व मरीज में संक्रमण के स्तर को जांचने के लिए किया जाता है। इस जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही मरीज की एंटीबायोटिक दवाएं शुरू की जाती है।
विज्ञापन


बोलीं विभागाध्यक्ष
मरीजों की सुविधा के लिए सीआरपी किट मंगवाई गई हैं। ऐसा नहीं है कि यह एक्सपायर होने वाली हैं। वार्ड में यह जांच होती है, यदि कोई बाहर से जांच करवा रहा है तो कहा नहीं जा सकता। इस किट की रिपोर्ट संस्थान में दो दिन बाद आती है जबकि बाहर निजी प्रयोगशालाओं में उसी दिन रिपोर्ट दे दी जाती है। यह मरीज के तीमारदार के विवेक पर है कि उसे क्या करना है। विभाग में यह जांच निशुल्क की जाती है। हमारे डॉक्टर वार्ड में ही मरीजों की जांच करते हैं।
-डॉ. गीता गठवाला, विभागाध्यक्ष, बाल रोग एवं नियोनेटाल विभाग, पीजीआईएमएस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें