अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
एक तरफ प्रदेश सरकार वर्षा जल संरक्षण पर जोर दे रही है तो वहीं प्रशासन की उदासीनता के चलते हर साल लाखों गैलन बरसाती पानी समस्याएं देकर व्यर्थ बह जाता है। यह तस्वीर ऐसे जिले की है, जिसके पचास गांव डार्क जोन में शामिल हैं और भूजल स्तर काफी नीचे जा चुका है। इस बार प्रशासन ने बाढड़ा उपमंडल में तो रेन हार्वेस्टिंग के लिए करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए हैं लेकिन दादरी शहर में बरसाती पानी के संचय की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। नतीजन सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों के आवास में इस समय जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
चरखी दादरी जिला में पेयजल संकट समय-समय पर गहराया रहता है। पिछले करीब डेढ़ साल से नहरी पानी की कमी के चलते जन स्वास्थ्य विभाग को एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल सप्लाई करनी पड़ रही है। पेयजल संकट को दूर करने में बरसाती पानी काफी मददगार साबित हो सकता है लेकिन इस तरफ जिला प्रशासन का ध्यान तक नहीं है। यह अनदेखी पिछले कुछ समय से नहीं बल्कि कई सालों से हो रही है। इस समय शहर से बरसाती पानी की निकासी लोगों के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों और जिला प्रशासन के लिए गले की फांस बनी हुई है। 72 घंटे पहले हुई झमाझम बरसात के बाद से ही शहर के आधा दर्जन जगहों से अब तक पानी की निकासी नहीं हो पाई है। शहर स्थित मथुरी घाटी खाड़ी और श्यामसर तालाब इस समय बदहाल है और अगर इनकी साफ-सफाई व जीर्णोद्घार कराया जाए तो यहां बरसात का पानी स्टोर किया जा सकता है।
रेन हार्वेस्टिंग प्लान की तरफ न तो नगर परिषद का ध्यान है और न ही जिला प्रशासन का। अगर बरसात के पानी को सहेज कर रखा जाए तो यकीनन पेयजल संकट को दूर करने में और भू-जल स्तर को बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है। नगर परिषद सूत्रों की मानें तो 300 गज या इससे अधिक जमीन पर बिल्डिंग का निर्माण कराने के लिए रेन हार्वेस्टिंग का प्रबंध कराना अनिवार्य है। इससे पहले मकान का नक्शा पास कराते समय तो लोग शपथ पत्र दे देते हैं लेकिन निर्माण के समय इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इस समीय 500 गज या इससे अधिक में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक संस्थाएं हैं लेकिन ज्यादातर ने रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रबंध बिल्डिंग में नहीं करवा रखा। यहां तक की जिला मुख्यालय पर खोल े गए करीब एक दर्जन विभागों के कार्यालय में से किसी में भी रेन हार्वेस्टिंग का प्रबंध नहीं है। इस समय शहर के प्रमुख रोहतक रोड, एसपी आवास, नगर परिषद कार्यालय, बस स्टैंड वर्कशॉप परिसर, गांधी नगर सड़क, ढाणी फाटक आरओबी, महिला पुलिस थाना व शहर की करीब 100 से अधिक कच्ची व पक्की गलियों में बरसाती पानी जमा है। जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी निकासी के लिए मोटरें व डीजी सेट लगाए हैं लेकिन ये नाकाफी पड़ रहे हैं और यह पानी सीवरेज लाइनों व नालों में डाला जा रहा है।
बाक्स: बाढड़ा उपमंडल में दो करोड़ रुपये किए खर्च
बाढड़ा उपमंडल के सभी गांव डार्क जोन में शामिल हैं और यहां भू-जल स्तर काफी नीचे है। जिला प्रशासन ने उपमंडल के विभिन्न गांवों में बने तालाबों की मेंटनेंस और बाउंड्री वॉल दुरुस्त कराने के लिए करीब दो करोड़ रुपये इस बार खर्च किए हैं और कुछ तालाबों में पानी का संचय भी किया जा रहा है। हालांकि इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बरसाती पानी से जलघरों को रिचार्ज नहीं किया जा सकता। वहीं, बरसाती पानी के संचय के लिए बाढड़ा उपमंडल में इस बार दो नए तालाब भी बनाने के भी विभाग दावें कर रहा है।
बाक्स: पिछले पांच सालों में हुई बरसात के आंकड़े
वर्ष बरसात (एमएम में)
2014 207
2015 309
2016 576
2017 315
2018 90
नोट:- 2018 में अब तक हुई बरसात के आंकड़े हैं।
वर्जन::
बाढड़ा ब्लॉक के गांवों को डार्क जोन से मुक्त करने के लिए करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस राशि से गांवों के तालाबों की बाउंड्री वॉल निर्माण सहित अन्य खामियां दूर की गई हैं। जिला के लिए इस बार आईडब्ल्यूएसएमपी (इंटीग्रेटिड वॉटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम) हमने तैयार कर मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों को भेज रखा है।
- मनोज कुमार, एडीसी।