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जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए चल रही दो महीने की वेटिंग, मरीज परेशान
लक्ष्मी नगर निवासी स्वीटी पानू के अर्जेंट अल्ट्रासाउंड लिखने पर भी नहीं की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराना आसान नहीं है। यहां जांच के लिए लगभग दो महीने की वेटिंग दी जा रही है। उपचार के लिए इतने लंबे समय का इंतजार मरीजों को परेशान कर रहा है। मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों में जाने के लिए मजबूर हैं।
लक्ष्मी नगर निवासी स्वीटी पानू ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए दो महीने से चक्कर कटाया जाता है। इस संबंध में एक शिकायत उपायुक्त कार्यालय को भी दी गई है। वह जिला अस्पताल में भी जांच कराने गई थी। वह तीन महीने की गर्भवती है, उसे ब्लीडिंग हो रही थी। ओपीडी में डॉक्टर ने जांच के बाद अर्जेंट अल्ट्रासाउंड जांच लिख दी। इसके बाद वह जब जांच के लिए गई तो पता चला कि वहां तो दो-दो माह की वेटिंग के बाद नंबर आ रहा है। उसने डॉक्टर से बात की तो उसे शनिवार को सुबह नौ बजे आने को कहा गया। ब्लीडिंग के बावजूद डॉक्टर ने अगले दिन जांच के लिए आने को समय दिया। जब वह शनिवार सुबह पहुंची तो उसे जांच के लिए बुलाया ही नहीं गया। वह 12 बजे तक जांच केंद्र के बाहर बैठी रही। दर्द के चलते जब वह नहीं बैठ पाई तो उसने अंदर जाकर डॉक्टर से बात की। आरोप है कि उससे जांच केंद्र के अंदर स्टाफ नर्स ने अभद्रता की। जब उसने अपना कागज मांगा तो उसे दिया नहीं गया। बाद में डॉक्टर ने जब जांच के लिए बुलाया तो कहा कि उसे यूरिन का प्रेसर ही नहीं है। इस पर डॉक्टर को कहा कि अब यूरिन के प्रेसर होने की बात कौन बताएगा। यह बात स्टाफ को ही बतानी थी। इस पर डॉक्टर ने अपनी जिम्मेदारी बाहर गेट पर तैनात कर्मचारी पर डाल दी। मौके पर कई मरीजों को बगैर जांच के वापस भेज दिया गया। मौके पर अनीता, ममता, केला, पूजा, ज्योति, रेशमा आदि के साथ भी यही बर्ताव किया गया। इन मरीजों की भी अल्ट्रासाउंड जांच नहीं की गई। स्वीटी ने बताया कि विवाद के बाद डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड किया, लेकिन तब तक समस्या अधिक बढ़ गई।
जिला अस्पताल में हैं दो अल्ट्रासाउंड मशीनें
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने की दो मशीनें हैं। इसमें एक मशीन आठ से नौ साल पुरानी है और दूसरी पोर्टेबल है। अस्पताल में एक महिला रेडियोलॉजिस्ट है। यहां हर रोज ओपीडी समय में 60 के करीब मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच नि:शुल्क होती है। यदि मरीज का किसी कारण से संस्थान में जांच नहीं हो पाती तो उसे बाहर इसके लिए 700 से 1200 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
बोले अधिकारी
हम प्रयास करते हैं कि अधिक से अधिक मरीजों की जांच हो सके। एक मशीन होने के चलते कई बार मरीजों की वेटिंग बढ़ जाती है। इसके अलावा जो भी मरीज की समस्या है, उसका समाधान कराया जाएगा। आपात स्थिति वाले मरीजों की जांच जल्द करवा दी जाती है।
- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल रोहतक