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बच्चा चोरी मामले से सबक लेने को तैयार नहीं पीजीआईएमएस

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सीसीटीवी की मानीटरिंग अभी भी डॉक्टरों के जिम्मे
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फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआईएमएस के बहुचर्चित बच्चा चोरी प्रकरण के बाद भी संस्थान सबक लेने को तैयार नहीं है। अभी भी संस्थान ने सीसीटीवी की मानीटरिंग करने की जिम्मेदारी सुरक्षा अधिकारियों को सौंपने की बजाए, अपने डॉक्टरों पर ही डाल रखी है। इसका संस्थान के कई डॉक्टर विरोध भी करते हैं, लेकिन प्रशासन इसमें सुधार करने की ओर कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
संस्थान का सबसे भीड़-भाड़ और विवादों में रहने वाला आपातकालीन विभाग, लेबर रूम में सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं। लेकिन इनकी मानीटरिंग आज भी डॉक्टरों के ही जिम्मे है। आपातकालीन विभाग की मानीटरिंग डीएमएस के कक्ष में और लेबर रूम की मानीटरिंग विभागाध्यक्ष के कक्ष में ही है। बच्चा चोरी की घटना होने के बाद दो महिला डॉक्टरों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो वह भी इस पर एतराज जता चुकी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वह क्लीनिकल का काम देखें, आपरेशन करें, ओपीडी करें या सीसीटीवी पर नजर रखें। यह सारी जिम्मेदारी सुरक्षा अधिकारी के कंट्रोल रूम में होनी चाहिए। यही स्थिति अब एमसीएच और ट्रॉमा सेंटर में भी हो गई है। यहां पर भी सीसीटीवी कैमरों की मानीटरिंग की जिम्मेदारी डॉक्टरों पर डाली गई है। स्त्री रोग विभाग की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां की जिम्मेदारी लेने को भी कोई तैयार नहीं है। जबकि हर जगह पद की जिम्मेदारी लेने के लिए जंग शुरू हो जाती है। स्त्री रोग विभाग की जिम्मेदारी लेने के समय सभी अपने पर काम का बोझ बता कर पल्ला झाड़ लेते हैं। ट्रॉमा सेंटर के बाद अब मदर चाइल्ड केयर अस्पताल शुरू होने जा रहा है। यहां बेडों की अधिक संख्या होने के बाद यहां भर्ती होेने वाली महिलाओं की संख्या भी अधिक होगी। इसके बाद यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना विभाग के लिए चुनौती होगा, ऐसे में सीसीटीवी की मानीटरिंग सुरक्षा अधिकारी के पास न होना मुसीबत को दावत देने जैसा होगा।
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सिस्टर यूनिवर्सिटी से भी नहीं सीख ले रहा संस्थान
पीजीआईएमएस अपनी सिस्टर यूनिवर्सिटी एमडीयू की सुरक्षा व्यवस्था से भी सबक लेने को तैयार नहीं है। यहां पूरे संस्थान में उच्च क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरा लगे हैं और इनकी मानीटरिंग मुख्य सुरक्षा अधिकारी के कक्ष से होती है। कहीं पर भी घटना होने पर कंट्रोल रूम से ही सभी जगह अलर्ट जारी कर दिया जाता है। जबकि पीजीआईएमएस में घटना होने के बाद सीसीटीवी की फुटेज खंगाली जाती है और कुछ मामले में तो यह चालू भी नहीं होते। वहीं संस्थान में सुरक्षा कर्मचारियों की बात करें तो यहां 670 के करीब सुरक्षा गार्ड हैं।
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