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इंश्योरेंस के नाम पर रिटायर्ड मेजर से हड़पे 28 लाख 93 हजार

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इंश्योरेंस के नाम पर रिटायर्ड मेजर से हड़पे 28 लाख 93 हजार
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शहर की सरोजनी कॉलोनी निवासी आर्मी से रिटायर्ड मेजर से इंश्योरेंस के नाम पर अज्ञात व्यक्ति ने 28 लाख 93 हजार 544 रुपये हड़प लिए। आरोपी ने दिल्ली की एक इंश्योरेंस कंपनी का मैनेजर बनकर रिटायर्ड मेजर से फोन पर बातचीत की। बातचीत में आरोपी ने जॉब टाइम के इंश्योरेंस का पैसा दिलाने और कंपनी की ओर से इंश्योरेंस के नई स्कीमों का झांसा देकर रिटायर्ड मेजर से अपने खाते में इस रकम को किस्तों में जमा कराया था। फरवरी से जुलाई तक मेजर ने किस्तें जमा की, लेकिन इसके बाद भी जब इंश्यारेंस का पैसा नहीं मिला तो मेजर ने इसकी शिकायत फर्कपुर पुलिस से की।
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सरोजनी कॉलोनी निवासी सीता देवी कुछ साल पहले ही इंडियन आर्मी के मेजर पद से रिटायर्ड र्हुइं हैं। रिटायर्ड मेजर सीता देवी ने पुलिस को बताया कि इसी साल फरवरी के अंतिम सप्ताह में उसके मोबाइल नंबर 9541622939 पर 9192118969 नंबर से फोन आया। आरोपी ने खुद को एक इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर का असिस्टेंट बताया। आरोपी ने अपना नाम विवेक शर्मा बताया। इस दौरान आरोपी ने उससे पूछा कि आपका कोई इंश्योरेंस है क्या? तो उसने ना में जवाब दिया। इसके बाद आरोपी ने उनसे कहा कि आपकी जॉब टाइम के दौरान जो इंश्योरेंस हुआ था, उसका पैसा आ चुका है। इसके अलावा कोई और भी इंश्योरेंस कराना हो तो उनके पास अनेक स्कीम है। इसके बाद आरोपी ने अपने बॉस से बात कराई। फोन पर आरोपी ने बताया कि वे इंश्योरेंस कंपनी के हेड मैनेजर बोल रहे हैं। आरोपी व्यक्ति ने भी उसे उसकी जॉब के दौरान हुए इंश्योरेंस का पैसा दिलाने का झांसा दिया और कुछ अन्य इंश्योरेंस स्कीमें बताकर उनमें पैसा लगाने की बात कही। वह आरोपियों की बातों में आ गई। इस दौरान आरोपियों ने उसे इंश्योरेंस कंपनी के अकाउंट नंबर पर पैसे ट्रांसफर कराने की बात कहीं। जिसपर उसने सबसे पहले 82 हजार रुपये कंपनी के अकाउंट में जमा करा दिए। इसके बाद उसने फरवरी से जुलाई माह तक कई किस्तों में करीब 28 लाख 93 हजार 544 रुपये जमा करा दिए, लेकिन आरोपियों ने उसके इंश्योरेंस का पैसा नहीं भेजा। जब उसने आरोपियों से इस संबंध में बातचीत करनी चाही तो उनका नंबर बंद हो गया। इस पर पुलिस से शिकायत की। जांच अधिकारी एएसआई रामकुमार का कहना है कि शिकायतकर्ता की ओर से बताए गए मोबाइल नंबर और अकाउंट नंबर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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