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गांधी कैंप में पहुंचे सहकारिता मंत्री

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रोहतक। प्रदेश के सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर शनिवार को गांधी कैंप पहुंचे। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने दुकानदारों को राजीव गांधी विद्युत सदन परिसर में विस्थापित करने का फैसला लिया है। इसी तरह से मकान स्वामियों को चिन्योट कॉलोनी की दीवार से लगी पीजीआई की 100 गज जमीन दी जाएगी। दुकानदारों से कहा कि चार सदस्य सोमवार को नगर निगम कमिश्नर व डीटीपी से मिलकर विस्थापित होने की प्रक्रिया शुरू करें।
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प्रदेश केबिनेट की बैठक शुक्रवार को हुई जिसमें एलीवेटेड रेल ट्रैक की चपेट में आ रहे करीब 53 दुकानदारों को राजीव गांधी विद्युत सदन परिसर में विस्थापित करने का मामला उठा। कई बिंदुओं पर चर्चा करने के बाद कैबिनेट ने अपनी मोहर लगा दी। इसके साथ बात रखी गई कि श्रीनगर व चिन्योट कॉलोनी के लोगों के बजरंग भवन तक आवागमन के लिए करीब 15 फुट चौड़ा रास्ता बनाया जाना है। रास्ता बनाने के दौरान कई मकान के साथ-साथ जगह ही हटाई जाएंगी। जिसको लेकर विरोध हो सकती है, इसलिए इन मकान व जमीन स्वामियों को चिन्योट कॉलोनी से लगी पीजीआई की जमीन पर विस्थापित किया जाना है। जिस पर तय हुआ कि 100 गज जमीन दी जाएगी ताकि लोग अपना आशियाना बना सके। कैबिनेट के दोनों फैसलों से लोगों को अवगत कराने के लिए सहकारिता मंत्री शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे गांधी कैंप पहुंचे, जहां रेलवे ट्रैक की जगह पर उनका जोशीला स्वागत किया गया। मंत्री ने व्यापारी नेताओं से कहा कि सोमवार को चार सदस्य नगर निगम कमिश्नर व डीटीपी से जाकर मिले ताकि उन्हें विस्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो सके। बताते चले गोहाना रेल मार्ग पर एलीवेटेड रेलवे ट्रैक बनाया जा रहा है, जिसकी चपेट में गांधी कैंप की करीब 53 दुकानें आ रही है। रेलवे इन दुकानों को तोड़ने जा रहा है। दुकानदारों के विरोध के चलते प्रदेश सरकार ने इनको विस्थापित करने का फैसला लिया है।

बिजली निगम को भुगतान होगा कलेक्टर रेट 73 हजार के हिसाब से
सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने बातचीत करने पर बताया कि गांधी कैंप के करीब 53 दुकानदार तथा जमीन व मकान स्वामियों को विस्थापित करने के फैसला पर केबिनेट ने मोहर लगा दी है। कुल 113 लोगों को विस्थापित किया जाएगा। दुकानदार राजीव गांधी विद्युत सदन और मकान स्वामी चिन्योट कॉलोनी के नजदीक पीजीआई की जमीन पर विस्थापित होंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अव्वल तो विद्युत सदन के सामने की जमीन नहीं दी जा रही है, जो जमीन दी जा रही है वह बगल में है। दूसरे बिजली निगम से जितनी जमीन ली जाएगी उसका 73 हजार रुपये कलेक्टर रेट के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
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