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पौने दो लाख वोटर द्वारा चयनित मेयर व पार्षद नहीं दे पाएंगे चुनावी साल के बजट में दखल

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। नगर निगम के पौने दो लाख मतदाताओ द्वारा चयनित मेयर मनमोहन गोयल और 22 वार्ड पार्षद चुनावी साल के बजट में दखल या सुझाव नहीं दे पाएंगे। क्योंकि निगम प्रशासन ने पार्षदों व मेयर के शपथ लेने से दो दिन पहले आठ जनवरी को ही बजट मंजूरी के लिए सरकार के पास चंडीगढ़ भेज दिया। वहीं मेयर का कहना है कि अधिकारियों को ऐसी क्या जल्दबाजी थी, आयुक्त से बात करूंगा। नियमों के तहत अब हाउस की अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है।
जून 2018 में नगर निगम के पिछले हाउस का कार्यकाल पूरा हो गया था। राज्य चुनाव आयोग ने छह माह बाद 16 दिसंबर को प्रदेश के पांच निगमों रोहतक, पानीपत, करनाल, यमुनानगर व हिसार का चुनाव करवाया। पहली बार मतदाताओं ने सीधा वोट डालकर मेयर का चयन किया। साथ ही पार्षद चुने गए। रोहतक निगम में 19 दिसंबर को परिणाम आने के बाद 10 जनवरी को मेयर व पार्षदों को शपथ दिलाई गई। इसके बाद अब तक दूसरी बैठक नहीं हुई, जिसमें सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का चयन किया जा सके। दोनों पदों पर चयन होने के बाद ही निगम हाउस का पूरी तरह गठन हो पाएगा। ऐसे में निगम प्रशासन ने साल 2019-20 का बजट मेयर व पार्षदों के शपथ लेने से पहले ही पास करके मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा दिया। पिछले साल यह बजट फरवरी में हाउस से मंजूरी के लिए भेजा गया, जबकि इस बार जनवरी के पहले सप्ताह में ही बजट भेज दिया गया है।
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निगम अधिकारियों को ऐसा नहीं करना चाहिए था : मेयर
पता चला है कि आठ जनवरी को ही निगम प्रशासन ने नए वित्त वर्ष 2019-20 का बजट पास करके चंडीगढ़ भेज दिया। अधिकारियों को हाउस के गठन का इंतजार करना चाहिए था, जिससे पार्षद जनप्रतिनिधि होने के नाते अपने सुझाव बजट में शामिल करवा सकते।
मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम

अधिकारियों ने की लोकतंत्र की हत्या : खुराना
मुझे अचरज हुआ, जब पता चला कि नए वित्त वर्ष 2019-20 का बजट निगम प्रशासन ने पार्षदों के शपथ लेने से पहले ही पास करके भेज दिया। जनप्रतिनिधि होने के नाते पार्षदों के हाउस में आने का इंतजार करना चाहिए था। यह तो लोकतंत्र की हत्या है।
कंचन खुराना, पार्षद वार्ड नंबर 13

पार्षदों को कुछ नहीं समझते निगम आयुक्त : गुलशन
जब निगम को अधिकारियों द्वारा ही चलाना था तो उनका चयन कराने की क्या जरूरत थी। पार्षदों को स्कूटर या बाइक तक अंदर ले जाने की अनुमति नहीं। अब बजट भी उनके शपथ लेने से पहले की चंडीगढ़ भेज दिया गया, जो निंदनीय है।
गुलशन ईशपुनियानी, कांग्रेस समर्थित पार्षद वार्ड नंबर 15

धक्का शाही की जा रही, इसका कड़ा विरोध किया जाएगा : अहलावत
19 दिसंबर को चुनाव परिणाम आ गया था। तत्काल मेयर व पार्षदों को शपथ दिलाकर हाउस की मीटिंग बुलाकर बजट पास कराना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जो की शर्मनाक है। फिर चयनित पार्षद क्या करेंगे। तत्काल मेयर मीटिंग बुलाएं, ताकि अधिकारियों से जवाब मांगा जा सके।
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कदम सिंह अहलावत, पार्षद वार्ड नंबर 11

समय पर बजट भेजना अधिकारियों की जिम्मेदारी : आयुक्त
नियमों के तहत जनवरी में नए वित्त वर्ष का बजट भेजा जाता है। निगम अधिकारियों ने दिसंबर में मीटिंग करके बजट पर मंथन किया। आठ जनवरी को निगम ने बजट पास करके चंडीगढ़ भेज दिया था। समय तक मेयर और पार्षदों ने शपथ तक नहीं ली थी।
आरएस वर्मा, आयुक्त नगर निगम
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