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200 बिस्तरों का अस्पताल बनने में खर्च होंगे 77 करोड़ रुपये की धनराशि, अपग्रेड के लिए कल खुलेगा टैंडर

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200 बेड का अस्पताल बनने में खर्च होंगे 77 करोड़, अपग्रेड के लिए कल खुलेगा टेंडर
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यमुनानगर। शहर के सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब पीजीआई का रुख नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने मुकंद लाल नागरिक अस्पताल को अपग्रेड करते हुए 100 से 200 बेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पर 77 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। सीएम एनाउंसमेंट के तहत सरकार की तरफ से यह ग्रांट जारी कर दी गई है। सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग को मंजूरी दी जा चुकी है। इस राशि से अत्याधुनिक नई बिल्डिंग बनाई जानी है। जिसकी औपचारिकता पूरी हो गई है और चीफ इंजीनियर की तरफ से नक्शा भी क्लीयर हो चुका है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपग्रेडेशन का टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इसी के साथ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए बिलासपुर व छछरौली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनाए जा रहे है।

प्रत्येक फ्लोर पर होगी 50 बेड की सुविधा
चार मंजिला बिल्डिंग बनाई जाएगी। जिसमें प्रत्येक फ्लोर पर 50 बेड की सुविधा होगी। जनरल मेडिसिन के लिए 34 बेड, पीडियट्रिक के 12 बेड, आइसोलेशन वार्ड के छह बेड, जनरल सर्वे के लिए 20 बेड, ऑर्थो सर्जरी के लिए 20 बेड, गायनी वार्ड के लिए 40 बेड, आई व ईएनटी वार्ड के लिए छह बेड, बर्न वार्ड के दो बेड, साइकेट्रिक वार्ड के चार बेड, प्रिजनर वार्ड के चार बेड बनेंगे। ग्राउंड फ्लोर पर रिसेप्सन, इंक्वायरी, हेल्प डेस्क, रजिस्ट्रेशन काउंटर व इमरजेंसी लैब ग्राउंड फ्लोर पर होगी। ग्राउंड फ्लोर पर मैट्रन रूम व नर्सिंग सिस्टर रूम होगा। इसके अलावा हर वार्ड में नर्सिंग स्टेशन, माइनर प्रोसिजर रूम, ड्रेसिंग रूम, बाथरूम से अटैच्ड डॉक्टरों का ड्यूटी रूम, स्टाफ का चेजिंग रूम, सेपरेट मेल व फीमेल टॉयलेट, वेटिंग एरिया व 20 निजी रूम भी हर फ्लोर पर बनाए जाएंगे।
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सर्टिफिकेट सुविधा भी मिलेगी
सर्टिफिकेट के लिए आने वाले अशक्त लोगों की सुविधा के लिए भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसके लिए अलग से हाल बनेगा। एक हाल एग्जामिनेशन के लिए होगा। साथ ही रजिस्ट्रेशन व सब वेटिंग एरिया अलग से होगा। इसी तरह से टीबी के मरीजों के लिए दो रूम अलग से बनाए जाएंगे।


सिविल अस्पताल में दवाई लेने के लिए मरीज और तीमारदारों को करना पड़ता है कठिनाईयों का सामना, चार खिड़कियों पर लगती है लंबी लाइन
- प्रतिदिन होती है पांच सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी, शाम पांच बजे तक लगी रहती लाइन
- दवाई लेने के लिए हर रोज मरीजों व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के बीच होती है झड़प
- स्वास्थ्य विभाग इस ओर नहीं दे रहा कोई ध्यान, दवाई लेने व जांच कराने के लिए भटकते रहते है मरीज
यमुनानगर।
जिले के सिविल अस्पताल में अव्यवस्थाओं की भरमार है। जिसके चलते मरीज व उनके तीमारदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, ओपीडी में लंबी लाइन में लगने के बाद दवाई लेने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कभी-कभी तो शाम को पांच बजे तक दवाई मिलती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी इस ओर कतई ध्यान नहीं दे रहा है।
मुकुंद लाल नागरिक सिविल अस्पताल में मरीजों को इलाज लेना बिल्कुल आसान नहीं है। मरीजों को चिकित्सक को दिखाने के लिए कई डगर से गुजरना पड़ता है और यदि चिकित्सक को दिखा भी दिया तो दवाई लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में ओपीडी में दिखाने के लिए पहले मरीजों को लाइन में लगकर पर्ची कटानी होती है और फिर चिकित्सक के कक्ष के बाहर लाइन लगानी पड़ती है। इतना हीं नहीं चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाई लेने के लिए तो उस से भी ज्यादा मशक्कत का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में दवाई की चार खिड़की बनाई गई है। जिसमें अक्सर एक खिड़की बंद ही रहती है और तीन खिड़कियों पर मरीज व तीमारदारों की लंबी लाइन लगी रहती है। दवाई लेने के लिए अक्सर स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों व मरीजों की बीच झड़प होती रहती है। लेकिन इस ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे और मरीजों को शाम पांच बजे तक लंबी लाइन में लगकर दवाई लेनी पड़ती है।
बॉक्स
प्रतिदिन 1500 से अधिक की होती है ओपीडी
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1500 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। लेकिन ओपीडी के हिसाब से अस्पताल में दवाई वितरण खिड़की नहीं है। जिस कारण मरीजों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। दवाई वितरण में चार खिड़की है। जिसमें से एक खिड़की बंद रहती है। जिसके चलते मरीजों की लंबी लाइन लगती है।
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वर्जन
लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। जिसके चलते सरकार द्वारा जिले में 200 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
डॉ. विजय दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल
फोटो नंबर-02, 22
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