फ्लैग : पवन व सोमबीर जसिया की गिरफ्तारी पर बोले यशपाल मलिक
हेडिंग : जाटों को हल्के में ले रही सरकार, दिया जाएगा जवाब
: सड़क पर बैठने के अलावा विकल्प और भी हैं सरकार को झुकाने के
: पवन व सोमबीर की गिरफ्तारी से फर्क जरूर पड़ा, लेकिन यह व्यक्ति नहीं समाज की लड़ाई
: जसिया गांव में जिला कार्यकारिणी की मीटिंग आज
: अब ओमप्रकाश हुड्डा व कृष्णलाल हुड्डा पर आई ज्यादा जिम्मेदारी
: समिति की रविवार को जसिया में जिला स्तरीय मीटिंग, खुफिया विभाग पर-पल की गतिविधि पर रख रहा नजर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि सीबीआई द्वारा जाट नेता पवन व सोमबीर जसिया की गिरफ्तारी से साफ है कि सरकार जाट समाज को हल्के में ले रही है। सरकार को समय रहते इसका जवाब दिया जाएगा। सड़क जाम करने बजाए आंदोलन के दूसरे विकल्प आजमाने के लिए रणनीति तैयार करने के लिए रोहतक में रविवार को जिला स्तरीय बैठक होगी।
बैठक में तय किया जाएगा कि बिना पब्लिक को परेशान किए कैसे सरकार पर दबाव बनाया जाए। क्योंकि यह सरकार बातचीत की भाषा समझना छोड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि जसिया से आंदोलन को उठाने में पवन व सोमबीर जसिया की अहम भूमिका रही। दोनाें ने व्यवस्था बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। दोनों की गिरफ्तारी से जिला कार्यकारिणी पर प्रभाव जरूर पड़ा है, लेकिन यह व्यक्तियों की नहीं, बल्कि समाज की लड़ाई है। बता दें
फरवरी 2016 के दंगों में सीबीआई ने यशपाल मलिक के करीबी पवन व सोमबीर जसिया के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की है। जांच टीम पवन के बाद सोमबीर को गिरफ्तार कर चुकी है। सोमबीर जहां तीन दिन के रिमांड पर हैं, जबकि पवन की रिमांड अवधि पूरी हो चुकी है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इसके लिए शनिवार को जसिया में मीटिंग होनी थी, जिसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया था।
ओमप्रकाश हुड्डा व कृष्णलाल हुड्डा पर ज्यादा जिम्मेदारी
जाट आरक्षण संघर्ष समिति की जिला कार्यकारिणी में जसिया के स्थानीय निवासी होने के कारण पवन व सोमबीर की अहम भूमिका रहती थी। अब दोनों की गिरफ्तारी के बाद ओमप्रकाश हुड्डा व कृष्णलाल हुड्डा पर जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। क्योंकि सीबीआई प्रदेश महासचिव अशोक बल्हारा का नाम भी चार्जशीट में शामिल कर चुकी है।
खुफिया विभाग रख रहा कड़ी नजर
दो युवा नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने अपनी गतिविधियों को गुप्त रखना शुरू कर दिया है। यहां तक मीडिया तक को मीटिंग में नहीं जाने दिया जा रहा। मामला संवेदनशील होने के कारण खुफिया विभाग को जाट नेताओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी पड़ रही है। नेता किस गांव में किससे मिलने जा रहे हैं।