सरकारी पत्र दो साल में भी पूरी नहीं कर पाया 12 किमी की दूरी
- मुख्य सचिव कार्यालय से 12 किलोमीटर दूर शहरी निकाय कार्यालय में भेजा गया था पत्र
- आरटीआई कार्यकर्ता ने केस का स्टेट मांगा तो जवाब में विभाग ने पत्र नहीं मिलने की पुष्टी की
विकास सैनी
रोहतक। सरकारी व्यवस्था को लकर बार-बार सवाल उठे हैं। यहां की लचर व्यवस्था को लेकर आरोप भी लगे हैं। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं आया है। हालात ये हैं कि मुख्य सचिव कार्यालय से 12 किलोमीटर दूर शहरी स्थानीय निकाय कार्यालय में भेजा गया पत्र दो साल भी वहां नहीं पहुंचा है। जबकि यह दूरी करीब 23 मिनट में तय की जा सकती है। यह हम नहीं खुद सरकारी व्यवस्था कह रही है। आरटीआई से मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ।
दरअसल, शहर के प्रेम नगर में रहने वाले डॉ. दीपक चौहान ने वर्ष 2014-15 में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। इसमें शिक्षा विभाग, रोजगार विभाग, पीडब्ल्यूडी कार्यालय व शहरी स्थानीय निकाय शामिल है। इन विभागों से मिली सूचना में विभिन्न कार्यों में गड़बड़ी सामने आई। इसके चलते वर्ष 2015 में ही मुख्य सचिव हरियाणा सरकार को शिकायत भेजी गई। इस पर संज्ञान लेते हुए सीएस कार्यालय ने वर्ष 2016 को चौकसी विभाग-दो को जांच सौंपी। इस मामले में हुई जांच का स्टेटस जानने के लिए शिकायतकर्ता ने तीन नवंबर 2017 को सीएस कार्यालय में पत्र व्यवहार किया। इसके जवाब में शिक्षा, पीडब्ल्यूडी व रोजगार विभाग से तो जवाब आ गया, मगर शहरी स्थानीय निकाय से कोई जवाब नहीं आया।
सीएस कार्यालय में भेजी शिकायत के जवाब में राज्य जन सूचना अधिकारी ने 12 अप्रैल 2018 को शिकायतकर्ता व विजिलेंस मुख्यालय-दो को पत्र जारी किया। इसमें 24 अगस्त 2016 को पत्र शहरी निकाय विभाग में भेजने की बात कही गई है, मगर शहरी निकाय ने अपने जवाब में कोई पत्र जारी नहीं होने की बात कही है। सीएस कार्यालय की ओर से भेजा गया पत्र चौकसी विभाग-दो में 24 अगस्त 2016 को रिसिव भी हो चुका है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी में यह पुष्टी हुई है। ऐसे में साफ है कि शहरी निकाय शिकायत पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है।
पीएम को दी शिकायत पर शुरू हुई जांच
आरटीआई के जरिए शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, रोजगार व शहरी स्थानीय निकाय से मिली जानकारी में घपले का अंदेशा सामने आया। इसके चलते मुख्य सचिव हरियाणा सरकार को शिकायत भेजी। इस मामले में शहरी निकाय न तो कोई जवाब दिया और न ही कार्रवाई की है। इसके चलते पीएम ग्रीवेंस सेल में शिकायत दी। इसके बाद झूलों की जांच शुरू हो गई है। हरियाणा सरकार की ओर से कार्रवाई अभी भी शेष है। शहरी निकाय कार्यालय ने तो किसी तरह का पत्र ही नहीं मिलने की बात कही है। बाद में भेजा गया पत्र भी धुंधला व पढ़ने योग्य नहीं बताया है।
- डॉ. दीपक चौहान, आरटीआई कार्यकर्ता, प्रेम नगर।
इन चार विभागों में ये आई गड़बड़ी आई थी सामने
शिक्षा : आरटीआई से मिली जानकारी में शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये का घपला सामने आया। इस घपले का अंदेशा बायो मीट्रिक मशीनों की खरीद में दर्शाया गया है। विभाग ने 295 करोड़ रुपये की बायोमैट्रिक मशीनें खरीदी थ्ीा।
रोजगार : सरकार ने बेरोजगारों को नौकरी के लिए पंजीकृत करने की योजना बनाई हुई है। नौकरी नहीं मिलने तक उन्हें कुछ मुआवजा राशि दी जाती है। रोजगार कार्यालय ने कितनी नौकरी दी या कितने महिला व पुरुष उम्मीदवारों के पंजीकरण हुआ, यह रिकॉर्ड ही नहीं है।
पीडब्ल्यूडी : सरकार ने लोगाें की सुविधा के लिए जींद बाइपास पर एक आरओबी बनवाया है। इस आरओबी निर्माण में घालमेल का अंदेशा सामने आया। आरटीआई से मिलने दस्तावेजों के आधार पर मामले की शिकायत मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी गई।
नगर निगम : शहरी स्थानीय निकाय के तहत आने वाले नगर निगम में बड़े घपले का अंदेशा है। इसमें तीन करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट, 78 लाख रुपये के झूले, बढ़ता बिजली बिल, स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस ज्यादा, स्पीडब्रेकर पर मनमाना खर्च व 28 लाख रुपये के सीसीटीवी शामिल हैं।