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निगम पार्षदों की आखिरी मीटिंग को यादगार बनाने की तैयारी

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निगम पार्षदों की आखिरी मीटिंग को यादगार बनाने की तैयारी
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: जून माह में होगी हाउस की मीटिंग, एक माह बाद खत्म हो रहा है कार्यकाल

: मेयर बोली, हड़ताल खत्म होने का था इंतजार, आयुक्त से करेंगे जल्द मीटिंग का आग्रह
: कई चेहरे नहीं दिखाई देंगे नए हाउस में, मेयर व ममता चुनाव न लड़ने का कर चुकी हैं ऐलान
: पांच के कार्यकाल में हाउस कभी गरम तो कभी रहा नरम

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
नगर निगम पार्षदों का कार्यकाल 30 जून को पूरा हो रहा है। ऐसे में मौजूदा हाउस की आखिरी मीटिंग जून माह में बुलाई जाएगी, जिसे पार्षद यादगार बनाना चाहते हैं। इसके लिए मेयर रेनू डाबला जल्द आयुक्त से मिलकर तिथि तय करेंगी।

2 जून 2013 को नगर निगम का पहला चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस समर्थक 13 पार्षदों ने जीत हासिल की। मेयर का पर एससी समुदाय की महिला पार्षद के लिए आरक्षित था। ऐसे में कांग्रेस की हुड्डा सरकार की छत्रछाया में हुए चुनाव में हुड्डा परिवार की करीबी वार्ड नंबर 4 से पार्षद रेनू डाबला मेयर बनी, जबकि कांग्रेस समर्थक मंजू हुड्डा सीनियर डिप्टी मेयर तो अशोक भाटी ने डिप्टी मेयर की कुर्सी संभाली। भाजपा समर्थक पार्षदों को तो हाउस की मीटिंग में बोलने तक का समय नहीं दिया गया, क्योंकि हाउस में भाजपा के चुनाव चिन्ह पर जीते पार्षदों की संख्या मात्र दो थी, जिसमें अशोक खुराना व अजय जैन उर्फ टाटू हैं। भाजपा समर्थक जयकिशन राजोतिया ने चुनाव चिह्न ही लेने से इंकार कर दिया था। वहीं, पूनम किलोई, ममता रानी व सुशीला इंदौरा बाद में भाजपा से जुड़ी।
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पांच साल में देखे पांच कमिश्नर
निगम के मौजूदा पार्षदों ने पांच साल के कार्यकाल में पांच निगम आयुक्त देखे हैं। इसमें चार डीसी अमित अग्रवाल, शेखर विद्यार्थी, डीके बेहरा व अतुल कुमार को निगम आयुक्त का अतिरिक्त कार्यभार मिला था, जबकि अब प्रदीप कुमार को स्पेशल निगम आयुक्त लगाया गया है, जो पहले एडीसी रहे हैं।

डीसी व टाटू और हुड्डा व किलोई के बीच हंगामा रहा यादगार
नगर निगम हाउस में पांच साल के कार्यकाल में वैसे तो कई बार हंगामा हुआ, लेकिन डीसी एवं निगम आयुक्त अतुल कुमार और भाजपा पार्षद अजय जैन उर्फ टाटू के बीच सीधी बहस और सीनियर डिप्टी मेयर मंजू के पति बिजेंद्र हुड्डा और पूनम किलोई के पति सूरजमल किलोई के बीच हंगामा यादगार रहेगा।

हाउस नहीं रहा दमदार, पार्षद अधिकारियों से व्यक्तिगत रिश्ते बनाने में रहे ज्यादा व्यस्त
निगम के पांच साल के कार्यकाल में हाउस ज्यादा दमदार नहीं रहा। कई पास प्रस्ताव आज भी धूल फांक रहे हैं। पार्षदों की ज्यादा रुचि अधिकारियों से व्यक्तिगत रिश्ते बनाकर काम निकालने की ज्यादा रही। क्योंकि पहले डेढ़ साल कांग्रेस की सरकार रही, जिसके चलते अधिकारी कांग्रेसी पार्षदों को ज्यादा अहमियत देते थे। भाजपा पार्षदों को किसी तरह काम निकलवाने पड़ते थे। अक्तूबर 2014 में भाजपा की सरकार आ गई। इसमें कांग्रेसी पार्षदों ने हाउस में बहुमत होने के बावजूद अधिकारियों से व्यक्तिगत तरीके से तालमेल बनाकर काम निकालने में ज्यादा रुचि रखी।

हाउस एक परिवार की तरह होता है। हाउस में कभी माहौल गरम तो कभी नरम रहा। कई पार्षद नए हाउस में नजर नहीं आएंगे। ऐसे में हाउस की आखिरी मीटिंग को यादगार बनाया जाएगा। जल्द वे निगम आयुक्त से समय लेकर मीटिंग बुलाएंगी। यह मीटिंग पार्षदों के लिए विदाई पार्टी की तरह रहेगी।
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रेनू डाबला मेयर, नगर निगम

ये पार्षद नहीं आएंगे नए हाउस में नजर
वार्ड नंबर 1 से राजबीर सैनी, 2 से ममता रानी, 4 से रेनू डाबला, 9 से बलराज उर्फ बल्लू, 10 से अशोक खुराना, 14 से नीरा भटनागर, 17 से जयकिशन शर्मा व 20 से लक्ष्मी देवी शामिल हैं। रेनू व ममता चुनाव नहीं लड़ रही, जबकि राजबीर, जयकिशन शर्मा व अशोक खुराना का वार्ड महिला वर्ग के लिए रिजर्व हो गया है। वहीं, बलराज बल्लू ने दोबारा एमडीयू में मुख्य सुरक्षा अधिकारी की नौकरी ज्वाइन कर ली है। लक्ष्मी देवी का वार्ड अब आरक्षित नहीं रहा है।
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